ere | Source: ereनई दिल्ली। हार्ट अटैक ऐसी आपात स्थिति है जिसमें इलाज शुरू होने में होने वाली देरी दिल की मांसपेशियों को ज्यादा नुकसान पहुंचा सकती है। सीने में दबाव या दर्द, सांस लेने में परेशानी, ठंडा पसीना, मितली, चक्कर या दर्द का हाथ, पीठ, गर्दन, जबड़े अथवा पेट तक फैलना इसके संभावित संकेत हो सकते हैं। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर इंतजार करने के बजाय तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता बुलाना सबसे जरूरी कदम है।

हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट में क्या अंतर है?

हार्ट अटैक तब होता है जब हृदय तक रक्त पहुंचाने वाली धमनियों में रक्त प्रवाह रुक जाता है। वहीं कार्डियक अरेस्ट में हृदय की विद्युत गतिविधि में गंभीर गड़बड़ी के कारण दिल प्रभावी ढंग से रक्त पंप करना बंद कर देता है। हार्ट अटैक कभी-कभी कार्डियक अरेस्ट का कारण बन सकता है, लेकिन दोनों एक ही स्थिति नहीं हैं।

कार्डियक अरेस्ट की स्थिति में व्यक्ति अचानक बेहोश हो सकता है और सामान्य रूप से सांस लेना बंद कर सकता है। ऐसी स्थिति में तुरंत आपातकालीन सेवा को फोन करने के साथ सीपीआर शुरू करना और उपलब्ध होने पर स्वचालित बाह्य डिफिब्रिलेटर का इस्तेमाल करना बेहद महत्वपूर्ण होता है।

इन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें

हार्ट अटैक के लक्षण हर व्यक्ति में एक जैसे नहीं होते। आम संकेतों में सीने में दबाव, जकड़न या दर्द, सांस फूलना, ठंडा पसीना, मितली, चक्कर और शरीर के ऊपरी हिस्से में दर्द या असहजता शामिल हो सकती है। दर्द एक या दोनों हाथों, पीठ, गर्दन, जबड़े या पेट तक भी फैल सकता है। महिलाओं में कभी-कभी असामान्य थकान, सांस फूलना, मितली या पीठ और जबड़े में असहजता जैसे अपेक्षाकृत कम सामान्य लक्षण भी सामने आ सकते हैं।

पहले घंटे में क्या करना चाहिए?

1. तुरंत आपातकालीन सेवा को फोन करें: हार्ट अटैक का संदेह होने पर सबसे पहले आपातकालीन चिकित्सा सहायता बुलाएं। मरीज को खुद गाड़ी चलाकर अस्पताल ले जाने के बजाय प्रशिक्षित आपातकालीन सेवा की मदद लेना अधिक सुरक्षित माना जाता है।

2. मरीज को आराम की स्थिति में रखें: उसे बैठाकर या आरामदायक स्थिति में रखें और अनावश्यक चलने-फिरने या मेहनत से बचाएं। मदद आने तक मरीज की स्थिति पर नजर रखें।

3. मरीज को शांत रखें: घबराहट और शारीरिक मेहनत से बचाना जरूरी है। उसे भरोसा दें कि चिकित्सा सहायता रास्ते में है।

4. एस्पिरिन के मामले में सावधानी रखें: अमेरिकी हृदय संघ और अमेरिकी रेड क्रॉस की 2024 की प्राथमिक उपचार गाइडलाइन के अनुसार, यदि वयस्क मरीज होश में है और सीने में गैर-चोट संबंधी दर्द है, तो आपातकालीन सहायता बुलाने के बाद 162 से 325 मिलीग्राम एस्पिरिन चबाने की सलाह दी जा सकती है, बशर्ते उसे एस्पिरिन से एलर्जी न हो और किसी स्वास्थ्यकर्मी ने इसे लेने से मना न किया हो। यदि इसे लेकर कोई संदेह हो तो आपातकालीन चिकित्सा टीम के आने तक इंतजार करना उचित है।

5. पहले से लिखी दवा ही दें: यदि मरीज को एंजाइना के लिए डॉक्टर ने नाइट्रोग्लिसरीन या कोई अन्य दवा पहले से लिखी है, तो उसे डॉक्टर के निर्देश के अनुसार ही लेने में मदद करें। किसी दूसरे व्यक्ति की दवा अपनी ओर से न दें।

6. मरीज बेहोश हो जाए और सामान्य सांस न ले तो सीपीआर शुरू करें: ऐसी स्थिति में तुरंत आपातकालीन सहायता सक्रिय करें और सीपीआर शुरू करें। उपलब्ध होने पर स्वचालित बाह्य डिफिब्रिलेटर का इस्तेमाल भी किया जाना चाहिए।

इन गलतियों से बचना भी उतना ही जरूरी

हार्ट अटैक के लक्षण आने पर दर्द अपने आप ठीक होने का इंतजार नहीं करना चाहिए। चिकित्सा सहायता बुलाने में देरी नहीं करनी चाहिए और बिना जानकारी के अलग-अलग दवाएं नहीं खिलानी चाहिए। खासतौर पर ऐसी दवा न दें जो मरीज के लिए पहले से निर्धारित नहीं है।

इसी तरह मरीज को खुद वाहन चलाकर अस्पताल ले जाना भी उचित नहीं है। आपातकालीन चिकित्सा सेवा को सक्रिय करने से रास्ते में ही आवश्यक सहायता शुरू हो सकती है और अस्पताल तक पहुंचने में इलाज की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ सकती है।

शुरुआती मिनटों में सही कदम सबसे अहम

हार्ट अटैक में समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। सीने में दबाव या दर्द के साथ सांस फूलना, पसीना, मितली, चक्कर या दर्द का शरीर के दूसरे हिस्सों तक फैलना दिखाई दे तो इसे सामान्य परेशानी मानकर टालना खतरनाक हो सकता है। तेजी से आपातकालीन सहायता लेना और मरीज की स्थिति बिगड़ने पर सीपीआर शुरू करना शुरुआती मदद के सबसे महत्वपूर्ण हिस्से हैं। यह जानकारी प्राथमिक सहायता के लिए है, डॉक्टर की जांच या अस्पताल में मिलने वाले उपचार का विकल्प नहीं है। हार्ट अटैक का संदेह होने पर लक्षण कम होने का इंतजार किए बिना तत्काल आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें।