नई दिल्ली। नेपाल-चीन सीमा से सामने आई तस्वीरें और वीडियो इस समय हर किसी को हैरान कर रहे हैं। कुछ ही पलों में पानी की बेहद तेज धारा ने सीमावर्ती क्षेत्र में बने बड़े ढांचे को अपनी चपेट में ले लिया। नेपाल के रसुवा जिले में अचानक आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। इस आपदा में 105 भारतीयों समेत बड़ी संख्या में लोगों के लापता होने की सूचना है। वहीं चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में भी भूस्खलन और बाढ़ से कई महत्वपूर्ण स्थान प्रभावित हुए हैं।
पानी आया तो लोगों को भागने का भी नहीं मिला समय
घटना से जुड़े वीडियो में पानी की प्रचंड धारा बेहद तेज गति से आगे बढ़ती दिखाई देती है। कुछ ही सेकंड में यह पानी रास्ते में मौजूद एक बड़ी संरचना को अपनी चपेट में ले लेता है। देखते ही देखते पूरा ढांचा तेज बहाव में बहता नजर आता है। वीडियो में मौजूद लोगों के बीच इसके बाद अफरा-तफरी का माहौल दिखाई देता है।
नेपाल-चीन सीमा पर स्थित केरुंग क्षेत्र के आसपास बाढ़ का असर इतना व्यापक रहा कि कस्टम कार्यालय और उससे जुड़े ढांचे भी प्रभावित हुए। यह मार्ग व्यापार के लिहाज से महत्वपूर्ण है। चीन से नेपाल आने वाले कंटेनर इसी संपर्क मार्ग का इस्तेमाल करते हैं। मानसरोवर यात्रा पर जाने वाले यात्रियों के लिए भी यह क्षेत्र महत्वपूर्ण है।
भोटे कोशी नदी ने बदला अपना रूप
नेपाल के रसुवा जिले में बुधवार सुबह भोटे कोशी नदी का जलस्तर अचानक तेजी से बढ़ा। स्थानीय समय के अनुसार सुबह करीब 9 बजे तिब्बत की दिशा से नदी में बाढ़ का पानी तेजी से आया। देखते ही देखते नदी का बहाव इतना तेज हो गया कि आसपास के इलाकों में भारी नुकसान शुरू हो गया।
रसुवा के साथ धाडिंग और काठमांडू के दक्षिण-पश्चिम में स्थित नुवाकोट के कुछ हिस्से भी प्रभावित हुए। नदी किनारे बसे क्षेत्रों में पानी और मलबे के तेज बहाव ने सड़क, पुल और अन्य बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाया।
105 भारतीयों समेत सैकड़ों लोगों के लापता होने की सूचना
इस आपदा के बाद बड़ी संख्या में लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। नेपाल पर्यटन बोर्ड के अनुसार रसुवा में बाढ़ के कारण कुल 384 यात्री लापता बताए गए हैं। इनमें 291 विदेशी और 93 नेपाली नागरिक शामिल हैं।
लापता लोगों में 105 भारतीय पर्यटक और 37 अनिवासी भारतीय शामिल हैं। इसके अलावा अमेरिका, मलेशिया, ब्रिटेन, दक्षिण अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया और नीदरलैंड के नागरिकों के भी लापता होने की जानकारी दी गई है। उपलब्ध रिपोर्टों में कुल लापता लोगों की संख्या करीब 400 बताई गई है।
19 पुल और 40 किलोमीटर सड़क को नुकसान
अचानक आई बाढ़ की रफ्तार इतनी तेज थी कि रास्ते में आने वाले बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा। रिपोर्ट के अनुसार करीब 40 किलोमीटर सड़क पानी और मलबे की चपेट में आई है। इसके अलावा 19 पुलों के क्षतिग्रस्त होने या बह जाने की जानकारी सामने आई है।
नदी के आसपास के इलाकों में कई घरों और अन्य संरचनाओं पर भी असर पड़ा है। कम से कम एक दर्जन पनबिजली परियोजनाओं को नुकसान पहुंचने की सूचना है। इससे स्पष्ट है कि आपदा का असर केवल आवागमन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि ऊर्जा और परिवहन ढांचे पर भी पड़ा है।
चीन के ग्यिरोंग पोर्ट के पास भी भूस्खलन
नेपाल में बाढ़ के बीच चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र से भी प्राकृतिक आपदा की खबर सामने आई। चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार शिगात्से में ग्यिरोंग काउंटी के ग्यिरोंग पोर्ट के पास बुधवार को भूस्खलन हुआ।
भूस्खलन के कारण पोर्ट तक पहुंचने वाली सड़क बंद हो गई। संचार और बिजली आपूर्ति भी प्रभावित हुई। चीनी सरकारी मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार ड्रोन से लिए गए दृश्यों में पोर्ट के आसपास कुछ इमारतें मलबे में दबी दिखाई दीं।
आखिर अचानक इतनी भयावह बाढ़ आई कैसे?
भोटे कोशी नदी का ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र तिब्बत में स्थित है। हिमालयी क्षेत्रों में भूस्खलन और चट्टानों के खिसकने जैसी घटनाएं नदी के प्रवाह को अचानक प्रभावित कर सकती हैं। ऐसी परिस्थितियों में नदी का रास्ता कुछ समय के लिए अवरुद्ध हो सकता है और पीछे पानी जमा हो सकता है।
यदि ऐसा प्राकृतिक अवरोध अचानक टूटता है तो जमा पानी, मिट्टी, पत्थर और मलबा बहुत तेज गति से नीचे की ओर बढ़ सकता है। ऐसी अचानक आने वाली तेज बाढ़ को फ्लैश फ्लड कहा जाता है। हालांकि, इस घटना के सटीक कारण की आधिकारिक पुष्टि के लिए विस्तृत जानकारी का इंतजार है।
हिमालय की ढलानों ने बढ़ाई पानी की रफ्तार
नेपाल और तिब्बत का यह पूरा क्षेत्र हिमालयी भूभाग में आता है, जहां कई जगहों पर ढलान बेहद खड़ी हैं। तेज बारिश या अचानक बड़ी मात्रा में पानी आने की स्थिति में पानी और मलबे की गति कई गुना बढ़ सकती है।
इसी वजह से सड़क, पुल, वाहन और दूसरी संरचनाएं कुछ ही समय में बहाव की चपेट में आ सकती हैं। रसुवागढ़ी बॉर्डर क्रॉसिंग और तिमुरे इलाके को इस आपदा से सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में बताया जा रहा है।
चीनी राष्ट्रपति ने दिए बचाव अभियान तेज करने के निर्देश
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने तिब्बत में चीन-नेपाल सीमा के पास भूस्खलन से लापता लोगों की तलाश और बचाव के लिए हरसंभव प्रयास करने का आदेश दिया है। बचाव अभियान में मदद के लिए पीपल्स आर्म्ड पुलिस की शिगात्से टुकड़ी के 145 अधिकारियों और जवानों को प्रभावित सीमावर्ती क्षेत्र में भेजा गया है।
स्थानीय प्रशासन की ओर से भी आपदा प्रभावित इलाकों में कर्मचारियों को भेजा गया है। संचार व्यवस्था प्रभावित होने के कारण राहत और बचाव कार्य में अतिरिक्त चुनौतियां सामने आ रही हैं।
नेपाल में चीनी दूतावास भी सक्रिय
बाढ़ और भूस्खलन की घटनाओं के बाद नेपाल स्थित चीनी दूतावास ने अपना आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र सक्रिय कर दिया है। दूतावास ने प्रभावित इलाके में मौजूद चीनी नागरिकों और कंपनियों की स्थिति का जायजा लिया।
इसके साथ ही नेपाल सरकार और संबंधित एजेंसियों से प्रभावित क्षेत्र में बचाव कार्य तेज करने का आग्रह किया गया है। नेपाल में मौजूद चीनी नागरिकों और संस्थानों के लिए सुरक्षा संबंधी नई सलाह भी जारी की गई है।
नेपाल-चीन सीमा का यह मार्ग इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र और नेपाल के बीच सीमा करीब 1,400 किलोमीटर लंबी है। इस सीमा पर कई मार्ग दोनों देशों के बीच व्यापार और आवागमन के लिए महत्वपूर्ण हैं। ग्यिरोंग पोर्ट और नेपाल का रसुवागढ़ी क्षेत्र इन्हीं प्रमुख संपर्क मार्गों में शामिल हैं।
चीन से नेपाल पहुंचने वाले मालवाहक कंटेनरों के लिए यह मार्ग महत्वपूर्ण है। इसके अलावा मानसरोवर यात्रा करने वाले यात्रियों की आवाजाही भी इस क्षेत्र से जुड़ी हुई है। ऐसे में सड़क और पुलों को हुए नुकसान से सामान्य आवाजाही प्रभावित होना स्वाभाविक है।
एक वीडियो ने दिखा दी बाढ़ की असली ताकत
सामने आया वीडियो इस आपदा की भयावहता को बेहद स्पष्ट तरीके से दिखाता है। तेज पानी का बहाव जिस तरह कुछ ही सेकंड में एक बड़ी संरचना को बहा ले जाता है, उससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि प्रभावित क्षेत्र में स्थिति कितनी गंभीर रही होगी।
स्थानीय प्रत्यक्षदर्शियों के हवाले से चीनी मीडिया में भी बताया गया कि पानी आने के बाद लोगों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचने के लिए बहुत कम समय मिला। इसी वजह से अचानक आई बाढ़ ने बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाया।
राहत और बचाव पर टिकी नजर
नेपाल और चीन दोनों तरफ प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव अभियान चलाया जा रहा है। बड़ी संख्या में लोगों के लापता होने के कारण तलाश अभियान सबसे महत्वपूर्ण बना हुआ है। वहीं क्षतिग्रस्त सड़कों, पुलों और संपर्क मार्गों को लेकर भी स्थिति पर नजर रखी जा रही है।
