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बिहार सरकार सरकारी स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था को अधिक जवाबदेह और पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने संकेत दिया है कि अब शिक्षकों की उपस्थिति और गतिविधियों पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित निगरानी रखी जाएगी। कैमूर जिले के रामगढ़ में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि विद्यालय अवधि के दौरान बिना अनुमति स्कूल परिसर से बाहर जाने वाले शिक्षकों की उपस्थिति प्रभावित हो सकती है। साथ ही उन्होंने शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और शिक्षकों की लंबित समस्याओं के समाधान का भी भरोसा दिलाया।
AI मॉनिटरिंग से होगी शिक्षकों की निगरानी
रामगढ़ में भाजपा के अभिनंदन समारोह को संबोधित करते हुए शिक्षा मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा क्षेत्र में तकनीक के अधिकतम उपयोग पर जोर दे रही है। इसी कड़ी में AI आधारित निगरानी व्यवस्था विकसित की जा रही है, जिसके माध्यम से शिक्षकों की उपस्थिति, समयपालन और विद्यालय में उनकी गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी। मंत्री ने कहा कि स्कूल समय में बिना अनुमति परिसर छोड़ने की स्थिति में संबंधित शिक्षक की हाजिरी प्रभावित हो सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षा व्यवस्था में अनुशासन और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए सरकार सख्त कदम उठाने को तैयार है। उनका कहना था कि बिहार के बच्चों का भविष्य शिक्षकों के हाथ में है, इसलिए किसी भी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
शिक्षकों की समस्याओं के समाधान के लिए सिंगल विंडो सिस्टम
मंत्री ने शिक्षकों को आश्वस्त करते हुए कहा कि सरकार केवल सख्ती ही नहीं, बल्कि उनकी समस्याओं के समाधान के लिए भी गंभीर है। उन्होंने बताया कि एसीपी, वेतन विसंगति, प्रोन्नति और अन्य लंबित मामलों के निपटारे के लिए विभाग में सिंगल विंडो सिस्टम लागू किया गया है। इसके तहत शिक्षकों को बार-बार सचिवालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और शिकायतों का समाधान निर्धारित समय सीमा में किया जाएगा। उन्होंने कहा कि 20 दिनों के भीतर मामलों के निपटारे का लक्ष्य रखा गया है और यदि इसमें अनावश्यक देरी होती है तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।
सरकारी स्कूलों को बेहतर बनाने का लक्ष्य
शिक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य सरकारी विद्यालयों को इतना बेहतर बनाना है कि मंत्री, विधायक और अधिकारी भी गर्व के साथ अपने बच्चों को वहां पढ़ाएं। इसके लिए स्कूलों में आवश्यक संसाधन, बेहतर शैक्षणिक माहौल और गुणवत्तापूर्ण शिक्षण व्यवस्था विकसित की जा रही है। उन्होंने यह भी बताया कि महिला शिक्षकों को उनके मूल पंचायत के नजदीक और पुरुष शिक्षकों को उनके मूल प्रखंड के आसपास पदस्थापित करने की नीति अपनाई गई है, ताकि उन्हें आवागमन की परेशानी कम हो और वे पढ़ाई पर अधिक ध्यान दे सकें। मंत्री ने शिक्षकों से संकल्प लेने का आह्वान करते हुए कहा कि सभी के सहयोग से बिहार की शिक्षा व्यवस्था की तस्वीर बदली जा सकती है।
