बिहार की राजनीति में कभी नीतीश कुमार के सबसे भरोसेमंद सहयोगी रहे आरसीपी सिंह एक बार फिर सुर्खियों में हैं। लंबे राजनीतिक अंतराल और रिश्तों में आई तल्खी के बाद शनिवार को आरसीपी सिंह ने मुख्यमंत्री एवं जेडीयू अध्यक्ष नीतीश कुमार से उनके 7, सर्कुलर रोड स्थित आवास पर मुलाकात की। इस मुलाकात की तस्वीर सामने आते ही राजनीतिक गलियारों में नए समीकरणों की चर्चा शुरू हो गई है। सवाल यह उठने लगा है कि क्या यह सिर्फ शिष्टाचार भेंट थी या फिर जेडीयू में आरसीपी सिंह की वापसी की पटकथा लिखी जा रही है? विधानसभा चुनाव के बाद से आरसीपी सिंह द्वारा लगातार नीतीश कुमार और उनके पुत्र निशांत कुमार की सार्वजनिक प्रशंसा ने इन अटकलों को और मजबूत कर दिया है।नीतीश-आरसीपी मुलाकात से बढ़ी सियासी हलचल | फोटो: ITG

नीतीश कुमार-आरसीपी सिंह की मुलाकात | फोटो: ITG

एक मुलाकात और कई राजनीतिक संकेत

शनिवार सुबह तय समय पर आरसीपी सिंह मुख्यमंत्री आवास पहुंचे और कुछ देर तक नीतीश कुमार के साथ बंद कमरे में बातचीत की। हालांकि दोनों नेताओं की ओर से मुलाकात के एजेंडे को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की गई है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषक इसे सामान्य मुलाकात मानने को तैयार नहीं हैं। बिहार में विधानसभा चुनाव के बाद बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच इस मुलाकात को जेडीयू के भीतर संभावित पुनर्संरचना और पुराने रिश्तों को फिर से मजबूत करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। खासकर तब, जब हाल के महीनों में आरसीपी सिंह का रुख लगातार नीतीश कुमार के पक्ष में दिखाई देता रहा है।

जन सुराज से मोहभंग के बाद बदले राजनीतिक संकेत

विधानसभा चुनाव 2025 के दौरान आरसीपी सिंह ने अपनी पार्टी 'आसा' का विलय प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी में कर दिया था। उस समय इसे जेडीयू से उनकी अंतिम दूरी माना गया था। लेकिन चुनाव परिणाम आने के बाद राजनीतिक परिस्थितियां बदल गईं। जन सुराज के भीतर उनकी सक्रियता कम होती गई और उन्होंने सार्वजनिक मंचों पर कई बार नीतीश कुमार के नेतृत्व और उनके बेटे निशांत कुमार की तारीफ की। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह केवल व्यक्तिगत बयान नहीं थे, बल्कि जेडीयू के साथ रिश्ते सुधारने के संकेत भी थे। ऐसे में मुख्यमंत्री आवास पर हुई मुलाकात ने इन चर्चाओं को और हवा दे दी है।

कभी जेडीयू में नंबर-2 थे आरसीपी सिंह

आरसीपी सिंह का राजनीतिक सफर जेडीयू और नीतीश कुमार के साथ गहराई से जुड़ा रहा है। भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) छोड़कर राजनीति में आए आरसीपी सिंह को नीतीश कुमार का सबसे भरोसेमंद रणनीतिकार माना जाता था। वर्ष 2016 में उन्हें राज्यसभा में जेडीयू का नेता बनाया गया और बाद में पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी सौंपी गई। संगठन और सरकार दोनों में उनका प्रभाव इतना मजबूत था कि उन्हें जेडीयू का नंबर-2 नेता कहा जाने लगा। लेकिन केंद्र सरकार में मंत्री बनने के बाद दोनों नेताओं के रिश्तों में दरार आई और अंततः उन्होंने पार्टी छोड़ दी। इसके बाद उन पर कई राजनीतिक और संगठनात्मक आरोप भी लगे, जिससे दोनों के बीच दूरी और बढ़ गई।

क्या 2027 की तैयारी का हिस्सा है यह मुलाकात?

बिहार विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियां धीरे-धीरे शुरू हो चुकी हैं और सभी दल अपने राजनीतिक समीकरण मजबूत करने में जुटे हैं। ऐसे समय में आरसीपी सिंह और नीतीश कुमार की मुलाकात को भविष्य की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। यदि आरसीपी सिंह की जेडीयू में वापसी होती है, तो यह पार्टी के लिए संगठनात्मक मजबूती का संदेश भी हो सकता है। हालांकि फिलहाल न तो जेडीयू और न ही आरसीपी सिंह ने किसी राजनीतिक निर्णय की पुष्टि की है। लेकिन इतना तय है कि एक तस्वीर ने बिहार की राजनीति में कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि आने वाले दिनों में यह मुलाकात केवल राजनीतिक शिष्टाचार साबित होती है या फिर बिहार की राजनीति में नए अध्याय की शुरुआत।