हरियाणा के गुरुग्राम से सामने आया एक मामला आधुनिक दौर में भी बंधुआ मजदूरी और मानव शोषण की भयावह तस्वीर पेश करता है। पश्चिम बंगाल की रहने वाली 39 वर्षीय आदिवासी महिला भादू मंडी कथित तौर पर दो साल तक एक घर में कैद जैसी परिस्थितियों में रहने को मजबूर थी। परिवार का आरोप है कि उसे घरेलू काम दिलाने के नाम पर गुरुग्राम लाया गया, लेकिन यहां पहुंचने के बाद उसकी आजादी छीन ली गई। स्मार्ट लॉक और डिजिटल निगरानी से लैस घर में वह न तो बाहर जा सकती थी और न ही अपने परिवार से संपर्क कर सकती थी। आखिरकार एक सर्विस टेक्नीशियन की मदद से की गई फोन कॉल उसकी रिहाई का कारण बनी।
घरेलू काम के बहाने लाई गई, फिर बन गई बंधुआ मजदूर
भादू मंडी पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले की रहने वाली हैं। परिवार के अनुसार, उन्हें बेहतर रोजगार का झांसा देकर गुरुग्राम भेजा गया था। इसके बदले पहले से करीब 40 हजार रुपये का भुगतान भी किया गया था। आरोप है कि गुरुग्राम के सेक्टर-91 स्थित एक आवासीय सोसाइटी में पहुंचने के बाद उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल गई। उन्हें घर से बाहर निकलने की अनुमति नहीं थी और परिवार से संपर्क के सभी रास्ते बंद कर दिए गए थे। बहन लक्ष्मी टुडू का कहना है कि पिछले दो वर्षों से भादू किसी तरह की स्वतंत्रता के बिना रह रही थीं। उनसे रोजाना 16 घंटे से अधिक काम कराया जाता था और विरोध करने पर मारपीट तथा मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ता था। परिवार लगातार उनकी तलाश और संपर्क की कोशिश करता रहा, लेकिन सफलता नहीं मिली।
डिजिटल लॉक और निगरानी के बीच कैद जैसी जिंदगी
बताया जा रहा है कि जिस घर में भादू काम कर रही थीं वहां अत्याधुनिक डिजिटल सुरक्षा व्यवस्था लगी हुई थी। स्मार्ट लॉक, इलेक्ट्रॉनिक एक्सेस सिस्टम और निगरानी के कारण उनके लिए बाहर निकलना लगभग असंभव था। परिवार का दावा है कि उनके पास मोबाइल फोन तक की पहुंच नहीं थी। ऐसे में वह अपनी स्थिति किसी को बता भी नहीं पा रही थीं। आधुनिक तकनीक से लैस इस घर में सुरक्षा व्यवस्था कथित तौर पर इतनी कड़ी थी कि महिला पूरी तरह बाहरी दुनिया से कट गई थी। यह मामला इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि तकनीक का उपयोग सुरक्षा के बजाय किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता सीमित करने के आरोपों के साथ जुड़ गया है।
टेक्नीशियन के फोन से परिवार तक पहुंची पुकार, फिर हुआ रेस्क्यू
मामले में बड़ा मोड़ तब आया जब घर में किसी उपकरण की मरम्मत के लिए एक सर्विस टेक्नीशियन पहुंचा। इसी दौरान भादू को मदद मांगने का मौका मिला और उन्होंने टेक्नीशियन के फोन से अपने परिवार से संपर्क किया। परिवार को पूरी आपबीती बताने के बाद सामाजिक संगठनों, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA), श्रम विभाग और प्रशासन को सूचना दी गई। जांच के बाद श्रम विभाग ने इसे बंधुआ मजदूरी का मामला मानते हुए कार्रवाई की सिफारिश की। इसके बाद पश्चिम बंगाल और हरियाणा प्रशासन के समन्वय से संयुक्त अभियान चलाया गया और महिला को सुरक्षित बाहर निकाला गया। भादू की बहन की शिकायत पर पश्चिम बंगाल में बंधुआ मजदूरी उन्मूलन कानून, 1976 तथा भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और प्रशासन ने पीड़िता को कानूनी व सामाजिक सहायता उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है।
