पश्चिम बंगाल की राजनीति में TMC के भीतर जारी सियासी खींचतान के बीच एक नया मामला सामने आया है, जिसने राजनीतिक में हलचल बढ़ा दी है। पार्टी के वरिष्ठ सांसद सुदीप बंदोपाध्याय की केंद्रीय मंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता भूपेंद्र यादव से मुलाकात की खबर सामने आने के बाद कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। यह मुलाकात ऐसे समय हुई है, जब टीएमसी के कुछ सांसदों के बागी रुख और एनडीए के करीब जाने की चर्चाएं पहले से ही सुर्खियों में हैं। ऐसे में सुदीप बंदोपाध्याय की यह मुलाकात महज एक औपचारिक बैठक थी या इसके पीछे कोई बड़ा राजनीतिक संदेश छिपा है, इसे लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। हालांकि अभी तक न तो सुदीप बंदोपाध्याय और न ही टीएमसी नेतृत्व ने इस मुलाकात को लेकर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी किया है।

बागी सांसदों की बैठकों से क्यों तेज हुई सियासी हलचल?

टीएमसी में कथित असंतोष की खबरों के बीच कुछ सांसदों की गतिविधियों ने राजनीतिक चर्चाओं को और तेज कर दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हाल के दिनों में पार्टी के कुछ असंतुष्ट सांसदों ने केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के आवास पर बैठक की थी। इन बैठकों के बाद यह अटकलें लगने लगीं कि टीएमसी के भीतर एक ऐसा समूह सक्रिय है, जो पार्टी नेतृत्व के मौजूदा रुख से सहमत नहीं है।बागी खेमे से जुड़े नेताओं का दावा है कि उन्हें कई सांसदों का समर्थन प्राप्त है और वे संसद में अलग पहचान के साथ काम करने की संभावनाओं पर विचार कर रहे हैं। यही कारण है कि वरिष्ठ सांसद सुदीप बंदोपाध्याय की भूपेंद्र यादव से मुलाकात को भी इसी राजनीतिक घटनाक्रम से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि अब तक इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन लगातार सामने आ रही बैठकों और चर्चाओं ने बंगाल की राजनीति में नई अटकलों को जरूर जन्म दे दिया है।

टीएमसी ने क्या दिया जवाब?

टीएमसी नेतृत्व ने पार्टी में किसी बड़े विभाजन या बगावत की अटकलों को सिरे से खारिज किया है। पार्टी का कहना है कि तृणमूल कांग्रेस पूरी तरह एकजुट है और कुछ नेताओं द्वारा किए जा रहे दावे वास्तविक स्थिति को नहीं दर्शाते। टीएमसी का आरोप है कि पार्टी के भीतर असंतोष और टूट की खबरों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है।वहीं, पार्टी के वरिष्ठ नेता कल्याण बनर्जी और कीर्ति आजाद ने भी बागी खेमे के दावों पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि यदि कोई सांसद वास्तव में पार्टी की विचारधारा और नेतृत्व से असहमत है तथा टीएमसी छोड़ना चाहता है, तो उसे पहले सांसद पद से इस्तीफा देना चाहिए। नेताओं का कहना है कि पार्टी के टिकट पर जीतकर संसद पहुंचने के बाद अलग रुख अपनाना जनता के जनादेश का सम्मान नहीं माना जा सकता। टीएमसी का दावा है कि अधिकांश सांसद अब भी पार्टी नेतृत्व और ममता बनर्जी के साथ मजबूती से खड़े हैं।