उमर फ़ारूक़:

कोलकाता: तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के वरिष्ठ सांसद और ममता बनर्जी के करीबी माने जाने वाले कल्याण बनर्जी ने पार्टी नेतृत्व को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि ममता बनर्जी को यह तय करना होगा कि वह अपने भतीजे अभिषेक बनर्जी के साथ हैं या उनके जैसे पुराने और समर्पित पार्टी कार्यकर्ता के साथ।

ममता दी को करना होगा फैसला

कल्याण बनर्जी ने कहा कि वह ममता बनर्जी के साथ हैं, लेकिन पार्टी को लेकर अंतिम फैसला ममता बनर्जी को ही करना होगा। उन्होंने कहा कि अगर पार्टी अभिषेक बनर्जी के बिना नहीं चल सकती, तो फिर उनके लिए पार्टी में बने रहना मुश्किल होगा।

डेरिक ओ'ब्रायन के जरिए भेजा संदेश

टीएमसी सांसद ने दावा किया कि उन्होंने पार्टी के वरिष्ठ नेता डेरिक ओ'ब्रायन से कहा है कि वह ममता बनर्जी तक उनका संदेश पहुंचाएं। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी को अभिषेक बनर्जी और उनके जैसे पुराने कार्यकर्ता के बीच चुनाव करना होगा।

अभिषेक के मामलों से बनाई दूरी

कल्याण बनर्जी ने यह भी घोषणा की कि अब वह अभिषेक बनर्जी से जुड़े किसी भी कानूनी मामले में उनकी पैरवी नहीं करेंगे। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब अभिषेक बनर्जी ने पश्चिम बंगाल सीआईडी के समन को चुनौती देते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया है।

सम्मान नहीं देते अभिषेक

वरिष्ठ अधिवक्ता कल्याण बनर्जी ने आरोप लगाया कि अभिषेक बनर्जी लगातार उनका अपमान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने अदालत में मामले की तत्काल सुनवाई के लिए प्रयास किया था, लेकिन बाद में उन्हें बताया गया कि उनकी जगह कोई जूनियर वकील अभिषेक की ओर से पेश होगा।

अहंकार की हद पार

कल्याण बनर्जी ने अभिषेक बनर्जी पर अहंकारी होने का आरोप लगाते हुए कहा कि वह किसी का सम्मान नहीं करते। उन्होंने कहा कि 45 वर्षों के कानूनी अनुभव के बावजूद उनके साथ ऐसा व्यवहार किया गया, जो स्वीकार्य नहीं है।

चुनावी हार के बाद बढ़ी अंदरूनी कलह

टीएमसी के भीतर यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब पार्टी हालिया चुनावी झटके के बाद आंतरिक असंतोष का सामना कर रही है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पार्टी के भीतर बढ़ती खींचतान आने वाले दिनों में टीएमसी नेतृत्व के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है।

पार्टी पर मंडरा रहा संकट

करीब 15 वर्षों से पश्चिम बंगाल की सत्ता पर मजबूत पकड़ रखने वाली टीएमसी इस समय अपने सबसे कठिन दौर से गुजरती दिखाई दे रही है। पार्टी के भीतर उठ रहे सवाल और नेताओं के बीच बढ़ते मतभेद आने वाले समय में बंगाल की राजनीति को नई दिशा दे सकते हैं।