उमर फ़ारूक़:



कोलकाता: पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) इन दिनों गंभीर राजनीतिक संकट से गुजर रही है। पार्टी के भीतर बढ़ती गुटबाजी और लगातार हो रहे इस्तीफों ने नेतृत्व की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। इसी बीच राज्यसभा सांसद प्रकाश चिक बराइक के इस्तीफे ने पार्टी को एक और बड़ा झटका दिया है।

टीएमसी के कई वरिष्ठ सांसद और नेता बागी खेमे का हिस्सा बन चुके हैं, जिससे पार्टी की एकजुटता पर सवाल खड़े हो गए हैं। राजनीतिक गलियारों में कांग्रेस के साथ संभावित विलय की अटकलें भी तेज हो गई थीं, हालांकि टीएमसी और कांग्रेस दोनों ने इन खबरों को खारिज कर दिया है।

सोनिया ने ममता से साथ आने की अपील की

कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से भाजपा के खिलाफ विपक्षी एकता को मजबूत करने के लिए कांग्रेस के साथ मिलकर काम करने की अपील की है। यह संदेश दोनों नेताओं की हालिया मुलाकात के दौरान दिया गया।

वहीं टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी ने भी नई दिल्ली में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से मुलाकात की। इस बैठक के बाद विपक्षी राजनीति और टीएमसी की आंतरिक स्थिति को लेकर चर्चाएं और तेज हो गई हैं।

विलय की खबरों को बताया निराधार

टीएमसी के बागी नेता रिताब्रत बनर्जी ने कांग्रेस के साथ किसी भी तरह के विलय की संभावना से साफ इनकार किया है। उन्होंने कहा कि पार्टी में जो कुछ हो रहा है, वह पूरी तरह आंतरिक मामला है।

उधर कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी और जयराम रमेश ने भी कांग्रेस-टीएमसी विलय की खबरों को गलत और निराधार बताया है। दोनों दलों का कहना है कि ऐसी किसी चर्चा की कोई जानकारी नहीं है।

सुष्मिता देव का इस्तीफा बना चर्चा का विषय

टीएमसी छोड़ चुकीं राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव का इस्तीफा भी स्वीकार कर लिया गया है। उन्होंने कहा है कि अब वह असम में अपने राजनीतिक कार्यों पर ध्यान केंद्रित करेंगी। उनकी असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा से मुलाकात के बाद राजनीतिक अटकलें और बढ़ गई हैं।

इससे पहले वरिष्ठ नेता सुखेंदु शेखर रॉय भी राज्यसभा और पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे चुके हैं। उन्होंने पश्चिम बंगाल में पार्टी के प्रदर्शन को लेकर नेतृत्व पर सवाल उठाए थे।

बागी सांसदों और विधायकों ने बढ़ाई चिंता

टीएमसी सांसद काकोली घोष दस्तिदार के अनुसार, 20 सांसदों के एक समूह ने लोकसभा में अलग बैठने की मांग की है। इसे पार्टी के भीतर बढ़ते विभाजन का संकेत माना जा रहा है।

वहीं पश्चिम बंगाल विधानसभा में भी टीएमसी को झटका लगा है। बड़ी संख्या में विधायकों ने पार्टी नेतृत्व के फैसले का विरोध करते हुए बागी नेता रिताब्रत बनर्जी का समर्थन किया है।

लगातार इस्तीफों, बढ़ती बगावत और नेतृत्व को मिल रही चुनौतियों ने टीएमसी के सामने बड़ा राजनीतिक संकट खड़ा कर दिया है। अब सभी की नजरें ममता बनर्जी की अगली रणनीति पर टिकी हैं।