भारत में तंबाकू और शराब का सेवन लंबे समय से सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। हाल ही में जारी नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-6 (NFHS-6) 2023-24 की रिपोर्ट ने देश में लोगों की बदलती आदतों और स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों की नई तस्वीर पेश की है। रिपोर्ट में तंबाकू और शराब के सेवन से जुड़े कई चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। तंबाकू सेवन करने वालों की संख्या में मामूली गिरावट जरूर दर्ज की गई है, लेकिन इसकी लत अब भी करोड़ों लोगों के जीवन को प्रभावित कर रही है। वहीं, शराब के सेवन के आंकड़ों में बहुत बड़ा बदलाव देखने को नहीं मिला है।

तंबाकू और शराब का बढ़ता असर
सर्वे के अनुसार, 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के 36.3 प्रतिशत पुरुष किसी न किसी रूप में तंबाकू का सेवन करते हैं। यह आंकड़ा NFHS-5 के 38 प्रतिशत की तुलना में थोड़ा कम है, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार स्थिति अब भी चिंताजनक बनी हुई है। महिलाओं में भी 8.4 प्रतिशत तंबाकू का उपयोग करती हैं। वहीं, शराब सेवन की बात करें तो देश में 18.9 प्रतिशत पुरुष शराब पीते हैं। यह आंकड़ा पिछले सर्वेक्षण की तुलना में लगभग स्थिर बना हुआ है।
ग्रामीण इलाकों में अधिक है तंबाकू और शराब की लत
NFHS-6 की रिपोर्ट में ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच स्पष्ट अंतर देखने को मिला है। ग्रामीण क्षेत्रों में 41.1 प्रतिशत पुरुष तंबाकू का सेवन करते हैं, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह आंकड़ा 26.2 प्रतिशत है। महिलाओं में भी ग्रामीण इलाकों में तंबाकू सेवन की दर 10 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जबकि शहरों में यह केवल 4.6 प्रतिशत है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रामीण भारत में गुटखा, खैनी, जर्दा और चबाने वाले तंबाकू उत्पाद आसानी से उपलब्ध होते हैं। कम कीमत और सामाजिक स्वीकार्यता के कारण इनका सेवन अधिक किया जाता है। कई राज्यों में तंबाकू का सेवन पारंपरिक आदत का हिस्सा बन चुका है।
शराब सेवन के मामले में भी ग्रामीण क्षेत्र आगे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, ग्रामीण इलाकों में 20.6 प्रतिशत पुरुष शराब का सेवन करते हैं, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह आंकड़ा 15.5 प्रतिशत है। महिलाओं में शराब सेवन की दर काफी कम है और केवल 1.1 प्रतिशत महिलाएं शराब पीती हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय समाज में महिलाओं के शराब सेवन को आज भी अच्छी नजर से नहीं देखा जाता, जो इसके कम आंकड़ों की एक वजह हो सकती है।
गंभीर बीमारियों का बढ़ता खतरा
डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, तंबाकू और शराब दोनों ही शरीर के लिए बेहद हानिकारक हैं। तंबाकू के सेवन से ओरल कैंसर, फेफड़ों का कैंसर, स्ट्रोक, हृदय रोग और COPD जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। वहीं, अत्यधिक शराब का सेवन लिवर डैमेज, हाई ब्लड प्रेशर, मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं और कई प्रकार के कैंसर का कारण बन सकता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, भारत में हर वर्ष 10 लाख से अधिक लोगों की मौत तंबाकू से जुड़ी बीमारियों के कारण होती है। यह समस्या केवल स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था पर भी बड़ा बोझ बनती जा रही है।
जागरूकता और सख्त कदमों की जरूरत
NFHS-6 की रिपोर्ट इस ओर संकेत करती है कि भारत को अब लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियों पर गंभीरता से काम करने की आवश्यकता है। सरकार ने तंबाकू उत्पादों पर चेतावनी, करों में वृद्धि और विज्ञापनों पर प्रतिबंध जैसे कई कदम उठाए हैं, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों तक प्रभावी जागरूकता अभियान पहुंचाना अब भी चुनौती बना हुआ है।
विशेषज्ञों का मानना है कि स्कूल स्तर से स्वास्थ्य शिक्षा, गांवों में जागरूकता अभियान और नशामुक्ति कार्यक्रमों को मजबूत करने की जरूरत है। यदि समय रहते प्रभावी और सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले वर्षों में तंबाकू और शराब से जुड़ी बीमारियां भारत के लिए और बड़ी चुनौती बन सकती हैं।
