आज के समय में महिलाओं की जिंदगी पहले से कहीं ज्यादा व्यस्त हो गई है। ऑफिस का काम, घर की जिम्मेदारियां और रोजमर्रा की भागदौड़ के बीच कई बार वे अपनी सेहत पर पूरा ध्यान नहीं दे पातीं। इसका असर अब उनकी सेहत पर भी दिखने लगा है। खासकर शहरों में रहने वाली कामकाजी महिलाओं में यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (UTI) और वैजाइनल इन्फेक्शन के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि लंबे समय तक पेशाब रोककर रखना, कम पानी पीना, तनाव में रहना और साफ-सफाई से जुड़ी कुछ छोटी-छोटी गलतियां इसकी बड़ी वजह बन रही हैं। कई महिलाओं को यह संक्रमण बार-बार हो रहा है, जिससे उनकी रोजमर्रा की जिंदगी भी प्रभावित हो रही है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि यूटीआई क्यों होता है, इसके पीछे कौन-सी आदतें जिम्मेदार हैं और इससे बचने के लिए क्या सावधानियां बरतनी चाहिए।
ऑफिस कल्चर और खराब हाइजीन बन रहे बड़े कारण
डॉक्टरों का कहना है कि कॉर्पोरेट और ऑफिस कल्चर ने भी यूटीआई के मामलों को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। कई महिलाएं मीटिंग्स, व्यस्त शेड्यूल या साफ वॉशरूम की कमी के कारण घंटों तक पेशाब रोककर रखती हैं। ऐसा करने से मूत्राशय में बैक्टीरिया को बढ़ने का मौका मिलता है और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा, पर्याप्त मात्रा में पानी न पीना भी एक बड़ी वजह है। कम पानी पीने से शरीर बैक्टीरिया को बाहर निकालने में सक्षम नहीं हो पाता। विशेषज्ञ बताते हैं कि इंटीमेट हाइजीन को लेकर की जाने वाली कुछ सामान्य गलतियां, जैसे अत्यधिक केमिकल युक्त वॉश या खुशबूदार उत्पादों का इस्तेमाल, वैजाइना में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया के प्राकृतिक संतुलन को बिगाड़ देता है, जिससे संक्रमण और फंगल समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है।
सेल्फ-मेडिकेशन और अधूरा इलाज बना रहा स्थिति को गंभीर
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, यूटीआई के बढ़ते मामलों के पीछे एक बड़ी वजह एंटीबायोटिक्स का गलत इस्तेमाल भी है। कई महिलाएं पेशाब में जलन, दर्द या बार-बार यूरिन आने जैसे लक्षण दिखने पर डॉक्टर से सलाह लेने के बजाय खुद ही दवा लेना शुरू कर देती हैं। शुरुआती आराम मिलते ही दवा का कोर्स बीच में छोड़ देना संक्रमण को पूरी तरह खत्म नहीं होने देता। इससे बैक्टीरिया अधिक मजबूत हो जाते हैं और एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस विकसित होने लगता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) भी एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस को वैश्विक स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा मान चुका है। ऐसे मामलों में संक्रमण बार-बार लौटता है और बाद में उसका इलाज अधिक जटिल हो जाता है।
टाइट कपड़े, तनाव और कमजोर इम्यूनिटी भी बढ़ा रहे जोखिम
विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक जीवनशैली से जुड़ी आदतें भी यूटीआई के बढ़ते मामलों के लिए जिम्मेदार हैं। लंबे समय तक टाइट जींस, लेगिंग्स या सिंथेटिक फैब्रिक पहनने से इंटीमेट एरिया में नमी और गर्माहट बढ़ जाती है, जो बैक्टीरिया और फंगस के पनपने के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करती है। इसके साथ ही, लगातार काम का दबाव, लक्ष्य पूरा करने की चिंता और घर-ऑफिस की दोहरी जिम्मेदारी महिलाओं में क्रोनिक स्ट्रेस बढ़ा रही है। शोध बताते हैं कि लंबे समय तक रहने वाला तनाव शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर कर देता है, जिससे संक्रमण होने का खतरा बढ़ जाता है। डॉक्टर सलाह देते हैं कि पर्याप्त पानी पीना, समय पर वॉशरूम जाना, कॉटन के कपड़े पहनना, संतुलित आहार लेना और बिना सलाह दवा न लेना जैसी छोटी-छोटी सावधानियां यूटीआई के खतरे को काफी हद तक कम कर सकती हैं।
Disclaimer: यह लेख सिर्फ जानकारी देने के लिए है। इसे डॉक्टर की सलाह न समझें। अगर आपको पेशाब में जलन, दर्द या बार-बार पेशाब आने जैसी समस्या हो रही है, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी दवा न लें।
