बिहार में गुरुवार को मौसम ने अचानक करवट ली। कोसी-सीमांचल और पूर्वी बिहार के कई जिलों में तेज हवा, गरज-चमक और बारिश हुई। जहां एक ओर लोगों को भीषण गर्मी और उमस से राहत मिली, वहीं खगड़िया जिले में यह बारिश एक परिवार के लिए जिंदगी भर का दर्द बन गई। जिले के चौथम प्रखंड के कन्हौली गांव में खेत में काम कर रहे एक ही परिवार के तीन सदस्यों की वज्रपात की चपेट में आने से मौत हो गई। मृतकों में पिता, पुत्र और 10 वर्षीय पोता शामिल हैं। घटना के बाद पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई।
खेत में काम कर रहे थे, अचानक गिरा ठनका
जानकारी के अनुसार, पौरा थाना क्षेत्र के कन्हौली बहियार स्थित दुखहरण बाबा स्थान के समीप गुरुवार सुबह खेत में काम के दौरान अचानक ठनका गिर गया। हादसे में कन्हौली यादव टोला निवासी 62 वर्षीय विद्यानंद यादव, उनके 26 वर्षीय पुत्र आशुतोष यादव और आशुतोष के 10 वर्षीय बेटे अंकेश कुमार की मौके पर ही मौत हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक तेज गर्जना के साथ बिजली गिरी, जिसके बाद आसपास के लोगों में अफरा-तफरी मच गई। परिजन और ग्रामीण जब तक मौके पर पहुंचे, तब तक तीनों की सांसें थम चुकी थीं।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची। तीनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। हादसे के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। गांव में मातम पसरा हुआ है और हर कोई इस दर्दनाक घटना से स्तब्ध है।
बारिश ने दी राहत, गर्मी का टूटा कहर
खगड़िया की दर्दनाक घटना के बीच बिहार के कई जिलों में मौसम ने राहत भरा रुख भी दिखाया। बांका, भागलपुर, मधेपुरा समेत आसपास के क्षेत्रों में सुबह से ही बादल छाए रहे और कुछ ही देर में तेज बारिश शुरू हो गई। लगातार पड़ रही तपिश और उमस से परेशान लोगों को आखिरकार सुकून मिला। बारिश के बाद वातावरण में ठंडक घुल गई और तापमान में भी उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई।
बारिश का असर जनजीवन पर भी साफ दिखाई दिया। सड़कों पर आवाजाही कम हो गई और बाजारों में भीड़ घट गई। वहीं किसानों के चेहरों पर खुशी नजर आई, क्योंकि यह बारिश खेती और आने वाली फसलों के लिए फायदेमंद मानी जा रही है। हालांकि मौसम विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगले कुछ दिनों तक गरज-चमक और वज्रपात की गतिविधियां जारी रह सकती हैं, इसलिए लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
वज्रपात के दौरान बरतें सावधानी
विशेषज्ञों के अनुसार, प्री-मानसून सीजन में बिहार में वज्रपात की घटनाएं तेजी से बढ़ जाती हैं। ऐसे मौसम में खुले खेतों, ऊंचे पेड़ों और बिजली के खंभों के पास खड़े होने से बचना चाहिए। गरज-चमक शुरू होते ही सुरक्षित स्थान पर शरण लेना ही सबसे प्रभावी बचाव माना जाता है। खगड़िया की यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि बारिश राहत जरूर लाती है, लेकिन लापरवाही कई बार जानलेवा साबित हो सकती है।
