अहमदाबाद विमान हादसे का दर्द अब भी बरकरार, एकमात्र जीवित बचे यात्री ने उठाए कई सवालबाद में एयर इंडिया की फ्लाइट AI-171 दुर्घटना को एक वर्ष पूरा होने वाला है, लेकिन इस भीषण हादसे के एकमात्र अहमदाबाद विमान हादसे का दर्द अब भी बरकरार, एकमात्र जीवित बचे यात्री ने उठाए कई सवाल जीवित बचे यात्री विश्वास कुमार रमेश के लिए समय जैसे थम गया है। 12 जून 2025 को हुए इस विमान हादसे में यात्रियों और चालक दल समेत कुल 260 लोगों की जान चली गई थी।

अहमदाबाद से लंदन जा रही एयर इंडिया की फ्लाइट AI-171 उड़ान भरने के महज 32 सेकंड बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। बोइंग 787-8 ड्रीमलाइनर विमान जमीन से टकराने के बाद आग के विशाल गोले में तब्दील हो गया। इस भयावह हादसे में सीट 11A पर बैठे विश्वास कुमार रमेश चमत्कारिक रूप से बच निकले।


"आज भी कई सवालों के जवाब नहीं मिले"

ब्रिटेन में रहने वाले विश्वास कुमार रमेश ने हाल ही में दिए एक साक्षात्कार में कहा कि हादसे के एक साल बाद भी उनके मन में कई अनसुलझे सवाल हैं।

उन्होंने कहा, "विमान दुर्घटना वाले दिन मेरा दुख समाप्त नहीं हुआ था। मैं आज भी अपने भाई को खोने के दर्द और इस सवाल के साथ जी रहा हूं कि आखिर यह हादसा कैसे और क्यों हुआ। केवल मुझे ही नहीं, बल्कि इस दुर्घटना से प्रभावित हर परिवार को सच्चाई जानने का अधिकार है। सबसे अधिक जरूरत ईमानदारी, पारदर्शिता और जवाबदेही की है।"


सीट 11A बनी जीवनदान का कारण

हादसे के समय विश्वास कुमार रमेश विमान के आपातकालीन निकास द्वार के पास स्थित सीट 11A पर बैठे थे। विमान के दो हिस्सों में टूटने के बाद बने एक खुले हिस्से से वह बाहर निकलने में सफल रहे। विमानन विशेषज्ञों के अनुसार, यह सीट विंग बॉक्स के निकट स्थित होती है, जिसे विमान का सबसे मजबूत हिस्सा माना जाता है।


भाई को नहीं बचा सके

विश्वास के छोटे भाई अजय कुमार रमेश भी उसी उड़ान में सीट 11J पर सवार थे, लेकिन हादसे में उनकी मृत्यु हो गई। दोनों भाई ब्रिटेन लौट रहे थे और पारिवारिक फिशिंग व्यवसाय से जुड़े हुए थे। अपने भाई को खोने का दर्द आज भी विश्वास को अंदर तक झकझोरता है।


मानसिक आघात से जूझ रहे हैं विश्वास

हादसे के बाद विश्वास लंबे समय तक सदमे में रहे। उन्होंने बताया कि वह आज भी उस भयावह दिन की यादों से मुक्त नहीं हो पाए हैं। भीड़भाड़ से दूर रहना पसंद करते हैं और अधिकतर समय अपने कमरे में अकेले बिताते हैं।

उन्होंने स्वीकार किया कि अवसाद के कारण वह अपनी पत्नी और पांच वर्षीय बेटे से भी पहले की तरह बातचीत नहीं कर पाते। उनका कहना है कि उन्हें अक्सर ऐसा महसूस होता है जैसे वह अब भी उसी दुर्घटना के पल में फंसे हुए हैं।


आर्थिक और शारीरिक चुनौतियां भी रहीं

दुर्घटना में विश्वास के कंधे, पीठ, घुटनों और बाएं हाथ में चोटें आई थीं। शारीरिक दर्द और मानसिक तनाव के कारण वह काम पर वापस नहीं लौट सके। भाई की मृत्यु और अपनी स्वास्थ्य समस्याओं के चलते उनके पारिवारिक व्यवसाय को भी नुकसान हुआ।

हालांकि उन्हें एयर इंडिया और टाटा समूह की ओर से मुआवजा मिला, लेकिन उनका कहना है कि उन्हें ब्रिटिश सरकार की ओर से कोई विशेष प्रत्यक्ष सहायता प्राप्त नहीं हुई।


हादसे की वजह अब भी स्पष्ट नहीं

दुर्घटना की जांच अभी जारी है और अंतिम रिपोर्ट सामने नहीं आई है। भारत के एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) की प्रारंभिक रिपोर्ट में संकेत मिले थे कि टेकऑफ के तुरंत बाद विमान के दोनों फ्यूल स्विच कट-ऑफ स्थिति में चले गए थे, जिससे इंजनों तक ईंधन की आपूर्ति बंद हो गई थी।

एक साल बाद भी यह हादसा न केवल विमानन जगत के लिए बल्कि पीड़ित परिवारों के लिए भी कई अनुत्तरित सवाल छोड़ गया है, जिनके जवाब का इंतजार अब भी जारी है।