यह खबर सिर्फ एक परंपरा की नहीं, बल्कि आस्था और विज्ञान के बीच चल रही बहस की भी कहानी है। हैदराबाद का चर्चित 'फिश प्रसादम' एक बार फिर सुर्खियों में है, जहां हर साल हजारों-लाखों लोग दमा और सांस संबंधी परेशानियों से राहत की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं। भारत में आस्था से जुड़ी कई ऐसी परंपराएं हैं, जो दशकों ही नहीं बल्कि सदियों से चली आ रही हैं। इन्हीं में से एक है यह करीब 180 साल पुरानी परंपरा, जिसमें लोगों को जिंदा मछली के साथ एक विशेष हर्बल मिश्रण दिया जाता है। समर्थकों का दावा है कि इससे दमा और श्वसन संबंधी समस्याओं में राहत मिलती है, जबकि वैज्ञानिक समुदाय इसके पक्ष में कोई ठोस प्रमाण नहीं मानता।

आखिर क्या होता है फिश प्रसादम?

इस परंपरा में एक छोटी जिंदा मछली के मुंह में विशेष हर्बल पेस्ट भरा जाता है और फिर इसे दमा तथा अन्य श्वसन संबंधी समस्याओं से पीड़ित लोगों को निगलने के लिए दिया जाता है। इस परंपरा को आगे बढ़ाने वाला परिवार दावा करता है कि यह हर्बल फार्मूला पीढ़ियों से उनके पास सुरक्षित है और इसके सेवन से सांस संबंधी बीमारियों में राहत मिल सकती है। मानसून की शुरुआत में आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम में देशभर से लोग बड़ी संख्या में हिस्सा लेने पहुंचते हैं।

लाखों लोग क्यों पहुंचते हैं?

फिश प्रसादम लेने वालों का मानना है कि इससे उन्हें दमा के लक्षणों में सुधार महसूस होता है। कई लोग अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए बताते हैं कि इस उपचार के बाद उनकी सांस लेने की समस्या पहले की तुलना में कम हुई। इसी भरोसे और वर्षों से चली आ रही परंपरा के कारण हर साल लाखों लोग इस आयोजन में शामिल होते हैं। कई परिवार तो पीढ़ियों से इस परंपरा का हिस्सा बने हुए हैं और इसे अपनी आस्था से जोड़कर देखते हैं।

डॉक्टर क्या कहते हैं और क्यों होती है बहस?

चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि अब तक ऐसा कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है, जो यह साबित कर सके कि फिश प्रसादम दमा का इलाज कर सकता है। डॉक्टरों के अनुसार दमा एक जटिल बीमारी है, जिसका इलाज वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित दवाओं और उपचारों से ही किया जाना चाहिए। यही वजह है कि हर साल फिश प्रसादम को लेकर आस्था और विज्ञान के बीच बहस छिड़ जाती है। एक ओर लोग इसे परंपरा और व्यक्तिगत अनुभवों से जोड़ते हैं, तो दूसरी ओर वैज्ञानिक समुदाय प्रमाण आधारित चिकित्सा पर जोर देता है। डिजिटल युग में भी इस परंपरा की लोकप्रियता बनी हुई है और हर साल इसके वीडियो व तस्वीरें सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन जाती हैं।