नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे स्वयंभू धर्मगुरु आसाराम को सुप्रीम कोर्ट से फिलहाल कोई राहत नहीं मिली है। शीर्ष अदालत ने मेडिकल आधार पर अंतरिम जमानत देने से इनकार कर दिया है। हालांकि, कोर्ट ने उनकी याचिका पर राजस्थान सरकार को नोटिस जारी करते हुए मामले की विस्तृत सुनवाई करने की बात कही है।
मेडिकल आधार पर फिलहाल नहीं मिलेगी जमानत
आसाराम ने राजस्थान हाईकोर्ट के उस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें उनकी उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा गया था। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार का पक्ष सुने बिना अंतरिम जमानत पर फैसला नहीं लिया जा सकता। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल उनका इलाज जारी रहेगा और यदि भविष्य में उनकी स्वास्थ्य स्थिति गंभीर होती है, तो अंतरिम जमानत की अर्जी पर जल्द सुनवाई की जा सकती है।
राजस्थान सरकार को जारी किया नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने मामले में राजस्थान सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि 2 जून को आसाराम को अस्पताल ले जाकर जांच कराई गई थी, जिसमें उनकी जान को कोई तत्काल खतरा नहीं पाया गया। अदालत ने कहा कि इस मामले की अगली सुनवाई अदालत की छुट्टियों के बाद की जाएगी।
क्या है पूरा मामला?
आसाराम को वर्ष 2013 में दो नाबालिग लड़कियों से जुड़े दुष्कर्म मामले में दोषी ठहराया गया था। राजस्थान हाईकोर्ट ने मई 2026 में अपने फैसले में सह-आरोपियों को बरी कर दिया था, जबकि आसाराम के खिलाफ दुष्कर्म के आरोपों को पर्याप्त साक्ष्यों के आधार पर सही मानते हुए निचली अदालत द्वारा सुनाई गई उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा। इसी फैसले के खिलाफ उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने क्या कहा?
सुनवाई के दौरान आसाराम के वकील ने अदालत को बताया कि उनके मुवक्किल की उम्र 90 वर्ष है और उनकी खराब सेहत को देखते हुए अंतरिम जमानत दी जानी चाहिए। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आसाराम एक प्रभावशाली व्यक्ति हैं, इसलिए जमानत पर निर्णय लेते समय इस पहलू को भी ध्यान में रखा जाएगा। फिलहाल अदालत ने अंतरिम जमानत देने से इनकार करते हुए मामले की विस्तृत सुनवाई का फैसला किया है।
