
Source : NBT
अलीगढ़ में प्रतिबंधित मांस की तस्करी से जुड़े एक बहुचर्चित मामले में पुलिस ने करीब छह महीने की जांच के बाद बड़ी कार्रवाई करते हुए खुर्जा के कारोबारी और अलहम्द मीट फैक्ट्री के मालिक अनवर हुसैन को गिरफ्तार कर लिया है। अनवर हुसैन पूर्व केंद्रीय खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति राज्य मंत्री सरवर हुसैन के भाई हैं, जिसके चलते यह मामला अब सिर्फ अवैध मांस तस्करी तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि राजनीतिक चर्चाओं का भी केंद्र बन गया है। दरअसल, जनवरी 2026 में एक वाहन से 700 किलो से अधिक संदिग्ध मांस बरामद किया गया था, जिसे बर्फ से भरे बॉक्सों में छिपाकर ले जाया जा रहा था। उस समय चालक और परिचालक ने इसे मछलियों के चारे के लिए ले जाने का दावा किया था, लेकिन पुलिस को मामले में गड़बड़ी की आशंका हुई और नमूनों को फोरेंसिक जांच के लिए भेज दिया गया। कई महीनों तक चली जांच, लैब रिपोर्ट और सप्लाई चेन की पड़ताल के बाद पुलिस ने फैक्ट्री मालिक तक पहुंचते हुए गिरफ्तारी की कार्रवाई की है। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस कथित नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल थे तथा प्रतिबंधित मांस की आपूर्ति किन इलाकों तक की जा रही थी।
15 जनवरी की बरामदगी से शुरू हुई थी जांच
मामले की शुरुआत 15 जनवरी 2026 की रात हुई थी, जब गोरक्षा दल के कार्यकर्ताओं को सूचना मिली कि खुर्जा से अलीगढ़ की ओर एक वाहन में बड़ी मात्रा में संदिग्ध मांस ले जाया जा रहा है। सूचना के आधार पर वाहन का पीछा किया गया और गभाना टोल प्लाजा के पास उसे रोक लिया गया। जांच में वाहन से 700 किलो से अधिक मांस बरामद हुआ, जिसे बर्फ से भरे बॉक्सों में छिपाकर रखा गया था। चालक और परिचालक ने दावा किया कि यह मांस मछलियों के चारे के लिए ले जाया जा रहा था, लेकिन पुलिस ने संदेह के आधार पर नमूने जब्त कर फोरेंसिक जांच के लिए भेज दिए और मुकदमा दर्ज कर लिया।
लैब रिपोर्ट ने खोली सप्लाई नेटवर्क की परतें
कई महीनों तक चली जांच के बाद अप्रैल में आई लैब रिपोर्ट ने मामले को नया मोड़ दे दिया। रिपोर्ट में बरामद मांस को प्रतिबंधित और संरक्षित पशु का बताया गया। इसके बाद पुलिस ने मांस की सप्लाई चेन खंगालनी शुरू की। जांच में सामने आया कि खेप खुर्जा स्थित अलहम्द मीट फैक्ट्री से भेजी गई थी। पुलिस के अनुसार उपलब्ध साक्ष्यों, कॉल डिटेल्स और दस्तावेजों के आधार पर फैक्ट्री मालिक अनवर हुसैन और उनके कर्मचारी इस्लाम खान की भूमिका सामने आई, जिसके बाद दोनों को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया गया और न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
गिरफ्तारी के बाद बढ़ी सियासी हलचल
अनवर हुसैन की गिरफ्तारी के बाद पूरे मामले ने राजनीतिक रंग भी पकड़ लिया है। स्थानीय स्तर पर कई प्रभावशाली लोगों और जनप्रतिनिधियों के पुलिस अधिकारियों से संपर्क करने की चर्चा रही, लेकिन पुलिस ने कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए आरोपियों को जेल भेज दिया। अनवर हुसैन के भाई सरवर हुसैन राष्ट्रीय राजनीति का जाना-पहचाना नाम रहे हैं और पूर्व में केंद्र सरकार में मंत्री पद संभाल चुके हैं। फिलहाल पुलिस इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ इस मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।
