रिश्तों में अपने साथी की परवाह करना एक सामान्य बात है, लेकिन जब यह परवाह लगातार डर, असुरक्षा और बेचैनी में बदल जाए तो यह मानसिक तनाव का कारण बन सकती है। कई लोग ऐसे होते हैं जो अपने रिश्ते में सब कुछ ठीक होने के बावजूद हर समय किसी अनहोनी की आशंका से घिरे रहते हैं। उन्हें लगता है कि कहीं उनका पार्टनर उन्हें छोड़ न दे, उनसे नाराज न हो जाए या रिश्ता टूट न जाए। यही स्थिति आगे चलकर रिलेशनशिप एंग्जायटी का रूप ले सकती है।एक युवती ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि लंबे समय तक उसे समझ ही नहीं आया कि उसके भीतर चल रही बेचैनी की असली वजह क्या है। शुरुआत में उसे लगता था कि वह अपने पार्टनर से बहुत ज्यादा जुड़ी हुई है, लेकिन धीरे-धीरे उसे महसूस हुआ कि यह सामान्य लगाव नहीं बल्कि लगातार बनी रहने वाली चिंता है।

कैसे बढ़ने लगी परेशानी?

युवती के मुताबिक, अगर पार्टनर का मैसेज आने में थोड़ी भी देर हो जाती थी तो वह बेचैन हो जाती थी। फोन न उठाने पर तरह-तरह के नकारात्मक विचार आने लगते थे। वह बार-बार सोचती थी कि कहीं रिश्ता खत्म होने वाला तो नहीं है। छोटी-छोटी बातों को लेकर भी उसका मन अशांत रहने लगा था।

रिश्ता सही था, लेकिन मन में था डर

दिलचस्प बात यह थी कि रिश्ते में कोई बड़ी समस्या नहीं थी। पार्टनर सहयोगी था और दोनों के बीच संवाद भी अच्छा था। इसके बावजूद मन में एक अनजाना डर बना रहता था। धीरे-धीरे उसे एहसास हुआ कि समस्या रिश्ते में नहीं, बल्कि उसकी सोच और असुरक्षा में है।

क्या होती है रिलेशनशिप एंग्जायटी?

विशेषज्ञों के अनुसार, रिलेशनशिप एंग्जायटी ऐसी स्थिति है जिसमें व्यक्ति अपने रिश्ते को लेकर जरूरत से ज्यादा चिंता करने लगता है। उसे हर समय लगता है कि कहीं कुछ गलत न हो जाए। कई बार यह डर पिछले अनुभवों, आत्मविश्वास की कमी या असुरक्षा की भावना से भी जुड़ा हो सकता है।

किन संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए?

  • पार्टनर के व्यवहार को लेकर लगातार चिंता करना।
  • बार-बार आश्वासन मांगना कि रिश्ता ठीक है।
  • छोटी बातों को बड़ा खतरा मान लेना।
  • खुद को रिश्ते के योग्य न समझना।
  • हर समय रिश्ते के भविष्य को लेकर तनाव में रहना।

कैसे मिली राहत?

युवती ने बताया कि जब उसने अपनी भावनाओं को समझना शुरू किया और अपने पार्टनर से खुलकर बातचीत की, तब स्थिति बेहतर होने लगी। उसने खुद पर भरोसा बढ़ाने और नकारात्मक सोच को नियंत्रित करने की कोशिश की। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में संवाद, आत्मविश्वास और जरूरत पड़ने पर पेशेवर सलाह काफी मददगार साबित हो सकती है।


रिश्तों में चिंता होना स्वाभाविक है, लेकिन अगर यह चिंता हर समय आपके मन पर हावी रहने लगे तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। समय रहते इसकी पहचान कर ली जाए तो न सिर्फ मानसिक तनाव कम किया जा सकता है, बल्कि रिश्ते को भी ज्यादा मजबूत और स्वस्थ बनाया जा सकता है।