नई दिल्ली। WhatsApp इस्तेमाल करने वाले लोगों के बीच इन दिनों एक ऐसा संदेश तेजी से प्रसारित हो रहा है, जिसने निजी बातचीत और कॉल की गोपनीयता को लेकर लोगों की चिंता बढ़ा दी है। वायरल संदेश में दावा किया जा रहा है कि भारत सरकार ने WhatsApp के लिए नए निगरानी नियम लागू किए हैं और अब लोगों की कॉल तथा निजी संदेशों पर नजर रखी जाएगी। संदेश में अलग-अलग रंग के टिक को भी कथित सरकारी निगरानी से जोड़कर बताया जा रहा है। हालांकि, इस दावे की हकीकत कुछ और है। सरकार की तथ्य-जांच एजेंसी पीआईबी फैक्ट चेक ने वायरल संदेश को फर्जी बताते हुए लोगों को सावधान किया है।
वायरल संदेश में किया जा रहा है बड़ा दावा
सोशल मीडिया और WhatsApp पर प्रसारित किए जा रहे संदेश में कथित तौर पर कहा जा रहा है कि सरकार ने WhatsApp की निगरानी से संबंधित नए नियम लागू कर दिए हैं। इसमें लोगों को यह विश्वास दिलाने की कोशिश की जा रही है कि अब उनकी निजी बातचीत और WhatsApp कॉल सरकारी निगरानी के दायरे में आ गई हैं।
इतना ही नहीं, कुछ संदेशों में यह भी दावा किया जा रहा है कि WhatsApp पर दिखाई देने वाले विशेष टिक इस बात का संकेत हैं कि किसी बातचीत को सरकार ने देख लिया है। इस दावे ने कई WhatsApp उपयोगकर्ताओं के बीच भ्रम की स्थिति पैदा कर दी है।
पीआईबी फैक्ट चेक ने खोली वायरल दावे की पोल
वायरल दावे की जांच के बाद पीआईबी फैक्ट चेक ने इसे गलत करार दिया है। 29 अगस्त को जारी की गई जानकारी में फैक्ट चेक एजेंसी ने स्पष्ट किया कि सरकार की ओर से WhatsApp की निगरानी को लेकर ऐसी कोई नई गाइडलाइन जारी नहीं की गई है।
इसका मतलब है कि WhatsApp पर प्रसारित हो रहा कथित सरकारी आदेश वास्तविक सरकारी निर्देश नहीं है। लोगों को सलाह दी गई है कि वे बिना पुष्टि किए ऐसे संदेशों को आगे प्रसारित न करें।
‘लाल टिक’ और ‘तीन नीले टिक’ की कहानी भी निकली झूठी
वायरल संदेश में WhatsApp के टिक से संबंधित दावे भी किए जा रहे हैं। संदेश में अलग-अलग रंगों और टिक की संख्या को कथित सरकारी निगरानी से जोड़कर बताया जा रहा है। कुछ संदेशों में यह भ्रम फैलाया जा रहा है कि किसी खास प्रकार का टिक दिखाई देने का अर्थ है कि सरकारी एजेंसियों ने बातचीत देख ली है या उस पर कार्रवाई की जा सकती है।
पीआईबी फैक्ट चेक ने इन दावों को भी भ्रामक बताया है। WhatsApp के टिक को इस तरह की कथित सरकारी निगरानी व्यवस्था से जोड़ने का कोई आधार नहीं बताया गया है।
क्या सरकार आपकी WhatsApp कॉल रिकॉर्ड कर रही है?
वायरल संदेश का सबसे ज्यादा चिंता पैदा करने वाला हिस्सा WhatsApp कॉल से जुड़ा है। इसमें लोगों को यह बताने की कोशिश की जा रही है कि उनकी WhatsApp कॉल रिकॉर्ड की जा रही हैं या उन पर निगरानी रखी जा रही है।
मौजूदा वायरल दावे की जांच के बाद पीआईबी फैक्ट चेक ने स्पष्ट किया है कि WhatsApp निगरानी को लेकर ऐसी कोई नई सरकारी गाइडलाइन जारी नहीं की गई है। इसलिए केवल इस वायरल संदेश को देखकर यह निष्कर्ष निकालना सही नहीं है कि सरकार हर WhatsApp कॉल को रिकॉर्ड कर रही है।
पुराने दावों की तरह फिर फैलाया जा रहा है भ्रम
WhatsApp पर समय-समय पर ऐसे संदेश सामने आते रहते हैं जिनमें सरकारी नियमों, मोबाइल निगरानी, खाते बंद होने या निजी बातचीत की निगरानी जैसे दावे किए जाते हैं। अक्सर इन संदेशों में सरकारी आदेश जैसा प्रारूप अपनाकर लोगों को विश्वास दिलाने की कोशिश की जाती है।
इस मामले में भी वायरल संदेश को लेकर लोगों के बीच इसी तरह का भ्रम पैदा हुआ। आधिकारिक तथ्य-जांच के बाद यह दावा फर्जी साबित हुआ है।
आगे भेजने से पहले जरूर करें पुष्टि
ऐसे किसी भी संदेश को मिलने पर उसे तुरंत दूसरे लोगों तक भेजने के बजाय उसकी सत्यता की जांच करना जरूरी है। खासतौर पर जब संदेश में सरकार, पुलिस, बैंक या किसी अन्य आधिकारिक संस्था के नाम का इस्तेमाल किया गया हो, तो आधिकारिक स्रोत से जानकारी की पुष्टि करनी चाहिए।
फिलहाल WhatsApp की कथित नई सरकारी निगरानी व्यवस्था को लेकर वायरल हो रहा यह संदेश फर्जी बताया गया है। इसलिए ‘लाल टिक’, ‘तीन नीले टिक’ या सरकारी निगरानी के नाम पर फैलाए जा रहे दावों से घबराने के बजाय उनकी आधिकारिक पुष्टि करना ही सबसे सही तरीका है।
