श्रीलंका क्रिकेट में इन दिनों बड़ा प्रशासनिक बदलाव देखने को मिल रहा है। भ्रष्टाचार के आरोपों और लगातार खराब प्रदर्शन के बीच सरकार ने सख्त कदम उठाते हुए बोर्ड के कामकाज में सीधे दखल देने का फैसला किया है। जानकारी के मुताबिक, Sri Lanka सरकार ने तत्काल प्रभाव से क्रिकेट बोर्ड के प्रशासनिक अधिकार अस्थायी रूप से युवा एवं खेल मंत्रालय को सौंप दिए हैं।
सरकार का कहना है कि यह फैसला क्रिकेट प्रशासन में पारदर्शिता लाने और अंदरूनी समस्याओं को दूर करने के लिए लिया गया है। इसके साथ ही एक विशेष समिति भी बनाई जाएगी, जो बोर्ड के कामकाज की जांच करेगी और सुधार के लिए सुझाव देगी। माना जा रहा है कि यह समिति बोर्ड में चल रही गड़बड़ियों और भ्रष्टाचार के आरोपों की गहराई से जांच करेगी।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच श्रीलंका क्रिकेट के चार बार अध्यक्ष रह चुके Shammi Silva ने मंगलवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उनके इस्तीफे को इस संकट से जोड़कर देखा जा रहा है। खबरें हैं कि अब बोर्ड की जिम्मेदारी एरन विक्रमारत्ने को सौंपी जा सकती है, जो पेशे से एक इन्वेस्टमेंट बैंकर रहे हैं और प्रशासनिक मामलों में अनुभव रखते हैं।
श्रीलंका क्रिकेट टीम का हालिया प्रदर्शन भी चिंता का विषय बना हुआ है। टीम पिछले कुछ समय से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पा रही है। खासतौर पर ICC Men's T20 World Cup 2026 में टीम का प्रदर्शन निराशाजनक रहा, जहां उसे शुरुआती दौर में ही बाहर होना पड़ा। इससे प्रशंसकों और क्रिकेट विशेषज्ञों में काफी निराशा देखने को मिली।
अगर श्रीलंका क्रिकेट के इतिहास पर नजर डालें तो टीम ने आखिरी बार 2014 में कोई बड़ी सफलता हासिल की थी, जब उसने टी20 वर्ल्ड कप का खिताब जीता था। उसके बाद से अब तक लगभग 12 साल बीत चुके हैं, लेकिन टीम कोई बड़ा अंतरराष्ट्रीय खिताब नहीं जीत पाई है। इस लंबे समय तक सफलता न मिलने के कारण भी बोर्ड और टीम मैनेजमेंट पर सवाल उठ रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि सिर्फ खिलाड़ियों का प्रदर्शन ही नहीं, बल्कि बोर्ड के अंदर की राजनीति और प्रबंधन की कमजोरियां भी इसके लिए जिम्मेदार हैं। यही वजह है कि अब सरकार को सीधे हस्तक्षेप करना पड़ा है, ताकि व्यवस्था को सुधारा जा सके और टीम को फिर से मजबूत बनाया जा सके।

