मुजफ्फरपुर में निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली को लेकर स्वास्थ्य विभाग की सख्ती लगातार बढ़ रही है। इसी क्रम में आयुष्मान भारत योजना के तहत सूचीबद्ध मदांता अस्पताल के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की गई है। इलाज में कथित लापरवाही और कुछ अनियमितताओं की शिकायत मिलने के बाद विभाग ने अस्पताल को आयुष्मान भारत योजना के पैनल से अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया है। इस फैसले के बाद अस्पताल फिलहाल योजना के लाभार्थियों को कैशलेस इलाज की सुविधा नहीं दे सकेगा। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि मरीजों को गुणवत्तापूर्ण और सुरक्षित स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है, इसलिए किसी भी शिकायत को गंभीरता से लिया जा रहा है।

जांच रिपोर्ट के बाद हुई कार्रवाई

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, जीरो माइल स्थित मदांता अस्पताल के खिलाफ एक मरीज के इलाज में लापरवाही की शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायत मिलने के बाद विभागीय स्तर पर मामले की जांच कराई गई। जांच के दौरान मरीज के उपचार से जुड़े दस्तावेजों और अन्य पहलुओं की समीक्षा की गई, जिसमें कुछ ऐसे तथ्य सामने आए जिन्हें विभाग ने गंभीर माना। इसके बाद अस्पताल को आयुष्मान भारत योजना के पैनल से अस्थायी रूप से निलंबित करने का निर्णय लिया गया। अधिकारियों का कहना है कि योजना में शामिल सभी अस्पतालों को निर्धारित मानकों, गुणवत्ता संबंधी नियमों और मरीजों की सुरक्षा से जुड़े दिशा-निर्देशों का पालन करना अनिवार्य है। किसी भी प्रकार की लापरवाही या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होने पर कार्रवाई की जाती है।

पहले भी हो चुकी है कार्रवाई

मुजफ्फरपुर में यह पहला मामला नहीं है जब किसी निजी अस्पताल पर स्वास्थ्य विभाग ने सख्त कदम उठाया हो। इससे पहले ब्रह्मपुरा स्थित प्रसाद अस्पताल को भी आयुष्मान भारत योजना से बाहर कर दिया गया था। अस्पताल में हुए भीषण अग्निकांड में कई लोगों की मौत के बाद प्रशासन ने उसके खिलाफ कार्रवाई की थी और बाद में उसका निबंधन भी रद्द कर दिया गया था। इसके आधार पर उसे आयुष्मान भारत योजना के पैनल से भी हटा दिया गया। लगातार सामने आ रहे मामलों के बाद विभाग निजी अस्पतालों की निगरानी बढ़ा रहा है और यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहा है कि सरकारी योजनाओं का लाभ लेने वाले मरीजों को बेहतर इलाज और सुरक्षित वातावरण मिल सके।

सभी प्रखंडों से मांगी गई रिपोर्ट

मदांता अस्पताल पर कार्रवाई के बाद स्वास्थ्य विभाग ने जिले के सभी 16 प्रखंडों में संचालित निजी अस्पतालों की समीक्षा प्रक्रिया भी तेज कर दी है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और संबंधित अधिकारियों से ऐसे अस्पतालों की रिपोर्ट मांगी गई है, जहां जांच के दौरान उपचार संबंधी खामियां, मानकों का उल्लंघन या अन्य गंभीर अनियमितताएं सामने आई हों। विभाग इन रिपोर्टों के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगा। अधिकारियों का कहना है कि आयुष्मान भारत योजना का उद्देश्य गरीब और जरूरतमंद लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है, इसलिए योजना से जुड़े अस्पतालों की जवाबदेही तय करना जरूरी है। आने वाले दिनों में जांच अभियान और तेज होने की संभावना है।