दिल की बीमारियां दुनियाभर में मौत के प्रमुख कारणों में शामिल हैं। आमतौर पर हार्ट हेल्थ का आकलन करने के लिए LDL-C (लो-डेंसिटी लिपोप्रोटीन कोलेस्ट्रॉल) की जांच की जाती है, जिसे "बैड कोलेस्ट्रॉल" भी कहा जाता है। हालांकि, हाल के शोध बताते हैं कि केवल LDL-C का सामान्य स्तर होना हार्ट अटैक के खतरे को पूरी तरह खत्म नहीं करता।
विशेषज्ञों के अनुसार, ApoB (एपोलिपोप्रोटीन B) एक ऐसा प्रोटीन है जो धमनियों में प्लाक बनाने वाले सभी हानिकारक लिपोप्रोटीन कणों पर मौजूद होता है। इसलिए ApoB की मात्रा यह बताने में अधिक सक्षम होती है कि रक्त में कितने एथेरोजेनिक (धमनियों को नुकसान पहुंचाने वाले) कण मौजूद हैं।

LDL-C और ApoB में क्या अंतर है?
LDL-C रक्त में मौजूद खराब कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को मापता है, जबकि ApoB हानिकारक कणों की कुल संख्या का संकेत देता है। कई बार किसी व्यक्ति का LDL-C स्तर सामान्य होता है, लेकिन ApoB अधिक होने पर धमनियों में रुकावट और हृदय रोग का खतरा बना रह सकता है।
किन लोगों के लिए ApoB टेस्ट ज्यादा उपयोगी?
डॉक्टरों के मुताबिक, डायबिटीज, मोटापा, हाई ट्राइग्लिसराइड्स या मेटाबॉलिक सिंड्रोम से पीड़ित लोगों में ApoB टेस्ट हार्ट डिजीज के जोखिम का बेहतर आकलन कर सकता है। इससे समय रहते इलाज और जीवनशैली में बदलाव करने में मदद मिलती है।
विशेषज्ञों की सलाह
स्वास्थ्य विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि हृदय रोग के जोखिम वाले लोगों को नियमित कोलेस्ट्रॉल जांच के साथ-साथ ApoB टेस्ट कराने पर भी विचार करना चाहिए। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, धूम्रपान से दूरी और तनाव नियंत्रण हृदय को स्वस्थ रखने के लिए जरूरी हैं।
Disclaimer:
यह लेख केवल सामान्य जानकारी और जागरूकता के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसमें दी गई जानकारी चिकित्सा सलाह का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या, जांच या उपचार से संबंधित निर्णय लेने से पहले योग्य डॉक्टर या स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें। स्वास्थ्य संबंधी जानकारी समय-समय पर बदल सकती है, इसलिए नवीनतम चिकित्सकीय सलाह को प्राथमिकता दें।
