नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की केंद्र सरकार के खिलाफ मुखर रुख अपनाने वाली कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) अब कथित ‘लिबरल इकोसिस्टम’ को लेकर दिए गए अपने नेताओं के बयानों के कारण चर्चा में है। CJP के सह-संयोजक सौरभ दास और आशुतोष रांका ने कथित लिबरल्स की आलोचना करते हुए अभिजीत दीपके के खिलाफ हो रही टिप्पणियों पर सवाल उठाए। दोनों नेताओं ने आरोप लगाया कि यह समूह कई मौकों पर भाजपा के इकोसिस्टम से भी अधिक खराब तरीके से व्यवहार करता है।
ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग के बीच सामने आया विवाद
यह बयान ऐसे समय सामने आया है जब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर CJP, वाम दलों और अन्य राजनीतिक संगठनों की ओर से दिल्ली और मुंबई में प्रदर्शन किए गए। प्रदर्शन के एक दिन बाद CJP नेताओं की ओर से कथित ‘लिबरल इकोसिस्टम’ को लेकर तीखी टिप्पणियां सामने आईं।
मूल रिपोर्ट के अनुसार, आशुतोष रांका और सौरभ दास ने अपने बयानों में उन लोगों पर निशाना साधा, जो अभिजीत दीपके की आलोचना कर रहे हैं। हालांकि, दोनों नेताओं ने अपने बयान के पीछे किसी एक स्पष्ट घटना या कारण को सीधे तौर पर नहीं बताया।
आंदोलन के नेतृत्व और श्रेय को लेकर खींचतान का दावा
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अलग-अलग राजनीतिक दलों और संगठनों के बीच युवा नेतृत्व को लेकर मतभेद सामने आने की चर्चा है। मुद्दों पर सहमति होने के बावजूद आंदोलन की अगुआई और उसके श्रेय को लेकर अलग-अलग खेमों के बीच खींचतान की बात कही गई है।
शनिवार को CJP, आम आदमी पार्टी, कांग्रेस और वाम दलों की ओर से ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध का जिक्र करते हुए रिपोर्ट में कहा गया कि इन समूहों के कार्यक्रमों और गतिविधियों में पूरी तरह तालमेल नजर नहीं आया। कुछ नेता मुंबई पहुंचे, जबकि कुछ दिल्ली में रहे और कुछ ने सोशल मीडिया के जरिए अपनी प्रतिक्रिया दी। जंतर-मंतर पहुंचने का समय भी अलग-अलग बताया गया।
आशुतोष रांका ने ‘स्वघोषित लिबरल’ इकोसिस्टम पर साधा निशाना
CJP के सह-संयोजक आशुतोष रांका ने अपने बयान में कथित ‘स्वघोषित लिबरल’ इकोसिस्टम की आलोचना की। उन्होंने कहा कि अभिजीत दीपके और लंबे समय के बाद लाखों भारतीयों की कल्पना को प्रभावित करने वाली पहल की निंदा करने के लिए एक पूरा ‘स्वघोषित लिबरल’ इकोसिस्टम सक्रिय हो गया है।
रांका ने इसे हास्यास्पद बताते हुए कहा कि यह इकोसिस्टम केवल ट्विटर पर मौजूद है, लेकिन इसके लोग खुद को लोकतंत्र का एकमात्र रक्षक मानते हैं। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई।
कांग्रेस नेता रीतम सिंह ने CJP पर लगाए अलग आरोप
आशुतोष रांका की टिप्पणी पर कांग्रेस नेता रीतम सिंह ने प्रतिक्रिया देते हुए आरोप लगाया कि CJP आम आदमी पार्टी और अरविंद केजरीवाल के इशारों पर काम कर रही है। उन्होंने असम से जुड़े एक घटनाक्रम का जिक्र करते हुए कहा कि रांका और अन्य लोगों को हिरासत से कांग्रेस ने छुड़ाया था, लेकिन इसके बाद उन्होंने गौरव गोगोई से मुलाकात करने से इनकार कर दिया।
रीतम सिंह ने दावा किया कि ऐसा आम आदमी पार्टी के कहने पर किया गया। उन्होंने नेहा बोरा को नजरअंदाज करने और राहुल गांधी को साथ नहीं लेने को लेकर भी CJP पर सवाल उठाए। ये आरोप कांग्रेस नेता की ओर से लगाए गए हैं।
सौरभ दास ने भी ‘लिबरल्स’ को लेकर जताई नाराजगी
CJP के दूसरे सह-संयोजक सौरभ दास ने आशुतोष रांका के बयान को आगे बढ़ाते हुए कथित ‘लिबरल इकोसिस्टम’ पर तीखी टिप्पणी की। दास ने कहा कि समस्या केवल भाजपा तक सीमित नहीं है और एक खास वर्ग यह मानता है कि ‘भारत और संविधान को बचाना’ केवल उसी की जिम्मेदारी है।
उन्होंने ऐसे लोगों को ‘स्वघोषित लिबरल्स’ और ‘स्वघोषित संविधान के ठेकेदार’ बताया। दास ने आरोप लगाया कि यह एक ऐसा तंत्र है, जो कई बार भाजपा के इकोसिस्टम से भी खराब व्यवहार करता है।
‘युवाओं पर अपनी राय न थोपें’, सौरभ दास की अपील
सौरभ दास ने अपने बयान में कहा कि इस तरह लोगों को बांटकर राजनीति नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि वर्षों की विफलता ने ऐसी स्थिति पैदा कर दी है, जहां अब युवाओं को रास्ता दिखाने की जरूरत पड़ रही है।
उन्होंने कथित लिबरल्स से युवाओं पर अपनी राय थोपने के बजाय उनके समर्थन पर ध्यान देने की बात कही। अपने बयान के अंत में दास ने बेहद तीखी भाषा का इस्तेमाल करते हुए इसे ‘मूर्खों का जमावड़ा’ बताया।
CJP और विपक्षी खेमों के बीच बयानबाजी से बढ़ी राजनीतिक हलचल
ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर चल रहे विरोध के बीच CJP नेताओं की ओर से दिए गए इन बयानों ने राजनीतिक बहस का एक नया पहलू सामने ला दिया है। एक तरफ चुनाव आयोग और ज्ञानेश कुमार को लेकर विरोध जारी है, वहीं दूसरी ओर आंदोलन से जुड़े विभिन्न समूहों के बीच नेतृत्व, रणनीति और सार्वजनिक छवि को लेकर मतभेद की बातें सामने आ रही हैं।
आशुतोष रांका और सौरभ दास के बयानों में कथित ‘लिबरल इकोसिस्टम’ पर मुख्य निशाना साधा गया है। दूसरी ओर, कांग्रेस नेता रीतम सिंह ने CJP को लेकर अलग आरोप लगाए हैं। ऐसे में इस पूरे विवाद में अलग-अलग राजनीतिक पक्षों के दावे और प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
क्या है पूरे विवाद का केंद्र
पूरे घटनाक्रम का केंद्र अभिजीत दीपके को लेकर सामने आई आलोचना, कथित ‘लिबरल इकोसिस्टम’ की भूमिका और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर चल रहे विरोध के बीच विभिन्न समूहों के आपसी संबंध हैं। CJP नेताओं ने अपने बयानों के जरिए उन लोगों पर सवाल उठाए हैं, जिन्हें वे कथित ‘स्वघोषित लिबरल’ और ‘संविधान के ठेकेदार’ मानते हैं।
वहीं, कांग्रेस नेता रीतम सिंह की प्रतिक्रिया में CJP के राजनीतिक संबंधों और उसके आंदोलन से जुड़े फैसलों पर सवाल उठाए गए हैं। इस तरह एक ही विरोध के बीच अलग-अलग राजनीतिक समूहों की बयानबाजी ने विवाद को और चर्चा में ला दिया है।
