मुंबई। अभिनेता संजय दत्त ने अपने जीवन के उस दौर से जुड़े कई अनकहे अनुभव साझा किए हैं, जब उन्हें जेल में रहना पड़ा था। हाल ही में शेखर सुमन के टॉक शो ‘शेखर टुनाइट’ में बातचीत के दौरान संजय दत्त ने बताया कि जेल में अधिकारियों ने उन्हें मानसिक रूप से दबाव में लाने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने परिस्थितियों के सामने खुद को कमजोर नहीं पड़ने दिया।
‘क्या कभी जान देने का ख्याल आया?’ संजय दत्त का सीधा जवाब
कार्यक्रम के दौरान शेखर सुमन ने संजय दत्त से जेल के कठिन दौर को लेकर सवाल किया। उन्होंने पूछा कि क्या कभी ऐसी परिस्थितियां आईं, जब उन्हें अपनी जिंदगी खत्म करने का विचार आया हो। संजय दत्त ने इस सवाल का जवाब देते हुए कहा कि ऐसा ख्याल उनके मन में कभी नहीं आया।
अभिनेता ने बताया कि उन्हें अपने पिता और परिवार की परेशानियों का अहसास था, लेकिन उन्होंने खुद को कमजोर मानने से इनकार किया। उनके मुताबिक, मुश्किल समय में भी परिवार के लिए मजबूत बने रहना उनके लिए जरूरी था।
जब पिता सुनील दत्त के सामने लगाई गई हथकड़ी
संजय दत्त ने बातचीत में उस घटना को भी याद किया जब पुलिस ने पहली बार उन्हें हथकड़ी पहनाई थी। उस समय उनके पिता सुनील दत्त भी वहां मौजूद थे। संजय के मुताबिक, यह दृश्य उनके पिता के लिए बेहद भावुक और परेशान करने वाला था।
उन्होंने बताया कि सुनील दत्त की आंखों में आंसू आ गए थे और उन्होंने पुलिस से सवाल किया था कि उनके बेटे के साथ ऐसा क्यों किया जा रहा है। संजय ने पिता को गले लगाकर उन्हें शांत करने की कोशिश की और कहा कि वे हथकड़ियों को लेकर परेशान न हों।
हालांकि, संजय ने स्वीकार किया कि उस समय बाहर से मजबूत दिखने के बावजूद यह घटना उन्हें अंदर तक प्रभावित कर रही थी। उन्होंने कहा कि उन्हें अपने पिता के सामने खुद को संभालकर रखना था।
जेल में स्टारडम का कोई असर नहीं दिखाना चाहते थे
संजय दत्त ने जेल में बिताए समय को याद करते हुए कहा कि उन्होंने कभी अपनी लोकप्रियता या फिल्मी पहचान को अपने आसपास मौजूद दूसरे लोगों से खुद को अलग मानने की वजह नहीं बनने दिया।
अभिनेता के अनुसार, उन्होंने जेल में दूसरे कैदियों के साथ सामान्य तरीके से रहने की कोशिश की। उनका कहना था कि स्टारडम उनके लिए ऐसी चीज नहीं थी, जिसके आधार पर वे खुद को दूसरों से बेहतर समझें।
सेट पर जमीन पर बैठकर भी खा चुके हैं खाना
संजय दत्त ने अपने व्यक्तित्व और सोच का श्रेय अपने माता-पिता को भी दिया। उन्होंने बताया कि बचपन में उन्हें द लॉरेंस स्कूल, सनावर भेजा गया था, जहां उन्हें जीवन के अलग-अलग अनुभव मिले।
उन्होंने कहा कि फिल्म सेट पर भी उन्होंने कई बार जमीन पर बैठकर खाना खाया है। उनके मुताबिक, काम करने वाले लोगों के साथ बैठकर भोजन करने में उन्हें कभी कोई परेशानी नहीं हुई और उन्होंने हमेशा इस तरह की चीजों को सहजता से लिया।
‘सर, यहां बीड़ी तो मिल जाएगी…’
जेल के अधिकारियों से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा बताते हुए संजय दत्त ने कहा कि कुछ अधिकारियों को लगता था कि उनसे सेलिब्रिटी वाली सुविधाएं छीन लेने पर वे परेशान होकर टूट जाएंगे।
संजय के अनुसार, एक अधिकारी ने उनसे कहा कि जेल में उन्हें सिगरेट नहीं मिलेगी और फिर पूछा कि अब वे क्या करेंगे। इस पर अभिनेता ने मजाकिया अंदाज में जवाब दिया कि वहां बीड़ी तो मिल जाएगी।
संजय ने बताया कि उनकी इस प्रतिक्रिया से अधिकारी हैरान रह गए। उनके मुताबिक, अधिकारियों को उम्मीद थी कि सुविधाएं छिनने के बाद वह परेशान होंगे, लेकिन उन्होंने परिस्थितियों के मुताबिक खुद को ढाल लिया।
मुश्किल दौर को याद कर संजय ने बताई अपनी सोच
संजय दत्त की बातचीत से उनके जेल जीवन का एक ऐसा पक्ष सामने आया, जिसमें परिवार की चिंता, कठिन परिस्थितियों का सामना और सामान्य जीवनशैली बनाए रखने की कोशिश शामिल थी। उन्होंने बताया कि उस दौर में उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण बात खुद को संभालना और अपने परिवार के सामने मजबूत बने रहना था।
