erer | Source: ererनई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की ओर से तीन हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों को देश की शीर्ष अदालत में न्यायाधीश नियुक्त करने की सिफारिश के बाद न्यायपालिका में वरिष्ठता और चयन प्रक्रिया को लेकर बहस शुरू हो गई है। कॉलेजियम ने 28 सितंबर 2026 को हुई बैठक में गुजरात हाई कोर्ट की मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सुनीता अग्रवाल, दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और तेलंगाना हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस अपरेश कुमार सिंह को सुप्रीम कोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त करने की अनुशंसा की है।

तीन नामों की सिफारिश के बाद वरिष्ठता पर उठे सवाल

कॉलेजियम की इस सिफारिश के सामने आने के बाद मुख्य सवाल यह उठाया जा रहा है कि क्या हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों की अखिल भारतीय वरिष्ठता सूची में शीर्ष क्रम को दरकिनार कर बाद के नामों को सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नति के लिए चुना गया है। इस मुद्दे को लेकर सोशल मीडिया पर भी बहस तेज हुई है।

रिपोर्ट के अनुसार, आलोचना करने वालों का कहना है कि अखिल भारतीय वरिष्ठता क्रम में पहले तीन स्थानों पर रहने वाले हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों को छोड़कर चौथे, पांचवें और छठे क्रम के नामों की सिफारिश की गई है। हालांकि, इस पर उठाई जा रही आपत्तियां मुख्य रूप से वरिष्ठता और चयन प्रक्रिया के आधार पर हैं।

कॉलेजियम में कौन-कौन शामिल हैं?

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की अध्यक्षता भारत के प्रधान न्यायाधीश सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत करते हैं। वर्तमान कॉलेजियम में उनके अलावा जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस बीवी नागरत्ना, जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस पीएस नरसिम्हा सदस्य हैं।

इसी कॉलेजियम ने तीन हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों को सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीश बनाने की सिफारिश की है। अब इन सिफारिशों पर आगे की संवैधानिक प्रक्रिया के तहत निर्णय होना है।

आशीष जोशी ने उठाया वरिष्ठता का मुद्दा

कॉलेजियम की सिफारिश पर सवाल उठाने वालों में पूर्व नौकरशाह आशीष जोशी भी शामिल हैं। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर इस मुद्दे पर टिप्पणी करते हुए लिखा, “वरिष्ठता में बदलाव संस्थागत क्षरण है।”

जोशी ने पत्रकार मनीष छिब्बर की एक पोस्ट साझा करते हुए कॉलेजियम की ओर से वरिष्ठता क्रम में कथित बदलाव को लेकर सवाल उठाए। उनके अनुसार, यदि अखिल भारतीय वरिष्ठता में शीर्ष तीन हाई कोर्ट मुख्य न्यायाधीशों को छोड़कर चौथे, पांचवें और छठे क्रम के जजों को सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नत किया जाता है, तो इससे न्यायपालिका के दूसरे जजों के बीच वरिष्ठता, सेवा और भविष्य की उम्मीदों को लेकर सवाल खड़े हो सकते हैं।

‘सुपरसेशन’ को लेकर क्या कहा गया?

आशीष जोशी ने आगे अपनी टिप्पणी में कहा कि सेना, सिविल सेवा और न्यायपालिका जैसी संस्थाओं में किसी वरिष्ठ अधिकारी या जज को छोड़कर उससे जूनियर को आगे बढ़ाना यानी सुपरसेशन मनोबल पर प्रभाव डाल सकता है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि वरिष्ठता क्रम से अलग निर्णय लिया जाता है तो उसके कारण स्पष्ट और रिकॉर्ड में दर्ज होने चाहिए।

उन्होंने पारदर्शिता और जवाबदेही से जुड़े सवाल भी उठाए। उनका तर्क था कि यदि वरिष्ठता से अलग जाकर नियुक्तियां की जाती हैं तो ऐसे मामलों में स्पष्ट कारणों की जानकारी सार्वजनिक होनी चाहिए।

मनीष छिब्बर ने भी उठाया था सवाल

पत्रकार मनीष छिब्बर ने भी सोशल मीडिया पर कॉलेजियम की सिफारिश का उल्लेख करते हुए वरिष्ठता क्रम को लेकर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने तीन हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों को सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नत करने की सिफारिश की है और अखिल भारतीय वरिष्ठता क्रम में नंबर 1, 2 और 3 को छोड़कर नंबर 4, 5 और 6 पर रहने वाले नामों की सिफारिश किए जाने की बात कही।

यही दावा अब कॉलेजियम की सिफारिश को लेकर चल रही बहस का प्रमुख हिस्सा बन गया है। चर्चा का केंद्र यह है कि सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति के लिए वरिष्ठता को किस तरह महत्व दिया जाता है और वरिष्ठता क्रम से अलग चयन के पीछे क्या आधार होता है।

सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ेगी

अगर केंद्र सरकार कॉलेजियम की इन तीनों सिफारिशों को मंजूरी देती है तो सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की कुल संख्या 37 हो जाएगी। इसके साथ ही शीर्ष अदालत में महिला न्यायाधीशों की संख्या भी दो से बढ़कर तीन होने की बात कही गई है।

सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश समेत अधिकतम 38 न्यायाधीश हो सकते हैं। ऐसे में तीन नई नियुक्तियां होने के बाद अदालत में स्वीकृत अधिकतम संख्या के मुकाबले केवल एक पद रिक्त रहेगा।

तीनों प्रस्तावित न्यायाधीश कौन हैं?

कॉलेजियम की सिफारिश में जस्टिस सुनीता अग्रवाल का नाम शामिल है, जो गुजरात हाई कोर्ट की मुख्य न्यायाधीश हैं। इसके अलावा जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश हैं, जबकि जस्टिस अपरेश कुमार सिंह तेलंगाना हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में कार्यरत हैं।

इन तीनों नामों की सिफारिश 28 सितंबर को कॉलेजियम की बैठक में की गई। अब इन नियुक्तियों की प्रक्रिया आगे बढ़ने के साथ ही सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या और संरचना में बदलाव होगा।

विवाद का केंद्र वरिष्ठता बनाम चयन प्रक्रिया

पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल वरिष्ठता क्रम और कॉलेजियम की चयन प्रक्रिया को लेकर है। आलोचकों द्वारा यह मुद्दा उठाया जा रहा है कि अगर वरिष्ठता सूची में ऊपर के नामों को छोड़कर नीचे के नामों की सिफारिश की गई है तो इसके पीछे क्या आधार रहा। वहीं, कॉलेजियम की ओर से की गई सिफारिश का मूल तथ्य यह है कि तीन हाई कोर्ट के मौजूदा मुख्य न्यायाधीशों को सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति के लिए प्रस्तावित किया गया है।

इसलिए मौजूदा बहस मुख्य रूप से इस बात पर केंद्रित है कि सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति के दौरान वरिष्ठता, योग्यता, अनुभव और अन्य संबंधित मानकों को किस तरह संतुलित किया जाता है तथा वरिष्ठता क्रम से अलग निर्णय होने पर उसके कारण किस तरह स्पष्ट किए जाते हैं।

आगे क्या होगा?

कॉलेजियम की सिफारिश के बाद अब नियुक्ति प्रक्रिया का अगला चरण केंद्र सरकार के स्तर पर होगा। यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो जस्टिस सुनीता अग्रवाल, जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस अपरेश कुमार सिंह सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में कार्यभार संभालेंगे।

फिलहाल तीनों नामों की सिफारिश के बाद वरिष्ठता क्रम को लेकर उठे सवालों ने कॉलेजियम व्यवस्था, न्यायाधीशों की नियुक्ति और चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता से जुड़े मुद्दों को फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।