लीजा गार्ग की यूपीएससी सफलता की कहानी उन अभ्यर्थियों के लिए प्रेरणा देने वाली है, जो लगातार असफलताओं के बाद खुद पर संदेह करने लगते हैं। स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद करीब पांच साल तक रोजगार की तलाश, कई प्रतियोगी परीक्षाओं में नाकामी और यूपीएससी की लगातार असफल कोशिशों के बीच लीजा ने अपनी तैयारी जारी रखी। आखिरकार यूपीएससी 2025 में उन्होंने ऑल इंडिया रैंक 303 हासिल की।
डिग्री के बाद पांच साल तक नहीं मिली नौकरी
लीजा गार्ग ने एक वीडियो साक्षात्कार में अपने संघर्ष के बारे में बताया। स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने करीब पांच साल तक बेरोजगारी का सामना किया। इस दौरान उन्होंने कई सरकारी नौकरियों की परीक्षाएं दीं, लेकिन सफलता उनके हाथ नहीं लगी।
यूपीएससी की वर्ष 2023 और 2024 की प्रारंभिक परीक्षा में भी उन्हें सफलता नहीं मिली। लगातार असफलताओं ने उनके आत्मविश्वास को प्रभावित किया और करियर को लेकर अनिश्चितता बढ़ती गई।
मां की आंखों के आंसू और पिता की चिंता ने झकझोरा
लीजा के संघर्ष का सबसे भावुक पहलू उनका पारिवारिक अनुभव रहा। उन्होंने बताया कि अपनी बेरोजगारी के कारण वह अपनी मां को परेशान देखती थीं। उनकी मां प्रोफेसर थीं और बेटी के करियर को लेकर चिंता स्वाभाविक थी।
वहीं, पिता की सबसे बड़ी चिंता बेटी के भविष्य की आर्थिक सुरक्षा को लेकर थी। परिवार की इन परिस्थितियों का असर लीजा पर भी पड़ा। उन्हें लगने लगा था कि उनकी असफलता उनके माता-पिता की उम्मीदों पर भारी पड़ रही है।
‘प्रोफेसर की बेटी होकर भी कुछ नहीं कर पाई’ जैसे तानों का सामना
यूपीएससी की तैयारी के दौरान लीजा को परीक्षा की चुनौतियों के साथ सामाजिक दबाव भी झेलना पड़ा। रिश्तेदारों की ओर से उनकी शिक्षा और पारिवारिक पृष्ठभूमि को लेकर ताने सुनने पड़े।
‘प्रोफेसर की बेटी होकर भी कुछ नहीं कर पाई’ जैसी बातें उनके लिए बेहद परेशान करने वाली थीं। लगातार असफलताओं और सामाजिक दबाव के बीच एक समय ऐसा भी आया, जब वह खुद को लेकर सवाल करने लगी थीं।
जब हार मानने के बजाय मंदिर पहुंचीं लीजा
लगातार निराशा के बीच लीजा एक मंदिर गईं। उनके मुताबिक, उस समय उन्होंने वहां सफलता या किसी पद की मांग नहीं की, बल्कि आगे संघर्ष करते रहने की शक्ति मांगी।
यह अनुभव उनके लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। इसके बाद उन्होंने अपनी तैयारी के तरीके पर दोबारा विचार किया और पुरानी कमियों को पहचानने की कोशिश की।
नवंबर 2025 में बदली तैयारी की रणनीति
लीजा ने नवंबर 2025 में अपनी तैयारी को नए तरीके से शुरू किया। इस बार उनका जोर केवल विषयों को याद करने पर नहीं, बल्कि उनकी बुनियादी समझ विकसित करने पर रहा।
उन्होंने अपनी पिछली गलतियों का विश्लेषण किया और तैयारी की रणनीति में बदलाव किया। लगातार मेहनत और बेहतर योजना के साथ उन्होंने यूपीएससी परीक्षा की तैयारी जारी रखी।
6 साल के संघर्ष के बाद मिली AIR 303
मेहनत का परिणाम यूपीएससी 2025 के परिणाम में सामने आया। लीजा गार्ग ने ऑल इंडिया रैंक 303 हासिल की। उनके लिए यह उपलब्धि सिर्फ परीक्षा में मिली रैंक नहीं थी, बल्कि लंबे समय से चले आ रहे संघर्ष के बाद हासिल की गई सफलता थी।
जिस बेरोजगारी और असफलताओं ने कभी उन्हें परेशान किया था, उसी दौर को पार करते हुए उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा में अपनी जगह बनाई। उनकी सफलता के बाद परिवार के लिए भी यह गर्व का क्षण बना।
असफलता से सफलता तक पहुंची कहानी
लीजा गार्ग की कहानी में बेरोजगारी, परीक्षा में असफलता, पारिवारिक चिंता और सामाजिक दबाव जैसे कई पड़ाव रहे। लेकिन उन्होंने अपनी तैयारी का तरीका बदला और प्रयास जारी रखा। यूपीएससी 2025 में 303वीं रैंक हासिल करना उनके इसी लंबे संघर्ष का परिणाम रहा।
