पटना। नेपाल में लगातार सामने आ रही बाढ़ और जलप्रलय की घटनाओं के बीच बिहार के लिए भी चिंता बढ़ गई है। शुक्रवार को तिब्बत-नेपाल सीमा पर एक और झील के फटने की सूचना के बाद बिहार में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया। संभावित खतरे को देखते हुए वाल्मीकिनगर से लेकर कोसी बराज तक निगरानी बढ़ा दी गई है। जल संसाधन विभाग ने प्रमुख तटबंधों की दिन-रात निगरानी करने और नदियों के जलस्तर तथा प्रवाह में होने वाले बदलाव पर लगातार नजर रखने का निर्देश दिया है।
नेपाल में बाढ़ से हुई भारी तबाही के बाद बिहार सरकार किसी भी संभावित स्थिति से निपटने के लिए पहले से तैयारी में जुटी है। खासतौर पर गंडक नदी में जलस्तर के उतार-चढ़ाव और नेपाल की ओर से आने वाले मलबे को देखते हुए सारण तटबंध समेत अन्य महत्वपूर्ण तटबंधों की चौबीसों घंटे निगरानी की जा रही है।
कोसी बराज के 56 में से 17 फाटक खोले गए
नेपाल में बाढ़ की स्थिति गंभीर होने के बाद वीरपुर स्थित कोसी बराज पर भी निगरानी बढ़ा दी गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार कोसी बराज के कुल 56 फाटकों में से 17 फाटक खोल दिए गए हैं। जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक पूर्वी और पश्चिमी दोनों तटबंध सुरक्षित हैं। बराज के स्पर, स्टड और अन्य संबंधित संरचनाओं की स्थिति भी सामान्य बताई गई है।
शुक्रवार सुबह आठ बजे कोसी बराज से 1,42,360 क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज दर्ज किया गया, जबकि इसी समय बराह क्षेत्र में 90,800 क्यूसेक पानी दर्ज हुआ। दोपहर 12 बजे कोसी बराज का डिस्चार्ज 1,34,225 क्यूसेक रहा, जबकि बराह में यह बढ़कर 99,500 क्यूसेक दर्ज किया गया। शाम छह बजे कोसी बराज से पानी का डिस्चार्ज बढ़कर 1,44,775 क्यूसेक पहुंच गया। बराह में डिस्चार्ज 99,500 क्यूसेक रहा।
भोटे कोशी से अतिरिक्त पानी आने की संभावना
जल संसाधन विभाग के अनुसार नेपाल के भोटे कोशी से 10 हजार क्यूसेक तक अतिरिक्त पानी आने की संभावना है। हालांकि विभाग का कहना है कि इससे कोसी के प्रवाह पर किसी बड़े प्रभाव की संभावना नहीं है। इसके बावजूद अधिकारियों को पूरी तरह सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।
नदी के जलस्तर में किसी भी तरह का अचानक बदलाव होने की स्थिति में तत्काल कार्रवाई की जा सके, इसके लिए संबंधित अधिकारियों को लगातार निगरानी रखने को कहा गया है। विभागीय स्तर पर नदियों के प्रवाह की जानकारी नियमित रूप से जुटाई जा रही है।
हर आधे घंटे में गंडक के डिस्चार्ज की जानकारी
गंडक नदी को लेकर भी बिहार में विशेष सतर्कता बरती जा रही है। जल संसाधन विभाग के मुख्यालय स्तर पर हर आधे घंटे में गंडक नदी के डिस्चार्ज की जानकारी ली जा रही है। इंजीनियरों की टीम चौबीसों घंटे सक्रिय है।
संबंधित जिलों के पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को भी अलर्ट मोड में रहने का निर्देश दिया गया है। जिलाधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्र के तटबंधों की लगातार निगरानी करने को कहा गया है। उद्देश्य यह है कि यदि कहीं बाढ़ की स्थिति बनती है या तटबंध पर किसी तरह का दबाव बढ़ता है तो तत्काल आवश्यक कदम उठाए जा सकें।
डिप्टी सीएम विजय कुमार चौधरी ने बताया बिहार में स्थिति क्यों अलग
उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने नेपाल में ग्लेशियर फटने के कारण आई बाढ़ का उल्लेख करते हुए बिहार की स्थिति पर जानकारी दी। उन्होंने कहा कि वाल्मीकिनगर स्थित गंडक बराज और नेपाल में बाढ़ के केंद्रबिंदु के बीच लगभग 250 से 300 किलोमीटर की दूरी है।
उनके मुताबिक इतनी दूरी के कारण नेपाल से आने वाले पानी का प्रभाव नीचे की ओर पहुंचते-पहुंचते कम हो गया। उन्होंने यह भी कहा कि गंडक के पूरे प्रवाह में पहले से सामान्य से कम पानी था। इसी वजह से नेपाल से पानी आने के बावजूद बिहार में स्थिति बहुत भयावह नहीं बनी।
विजय कुमार चौधरी के अनुसार शुक्रवार को वाल्मीकिनगर बराज के पास गंडक नदी में करीब एक लाख क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज होता रहा।
उत्तर बिहार के लिए क्यों महत्वपूर्ण हैं नेपाल से आने वाली नदियां?
नेपाल की पहाड़ियों से निकलने वाली गंडक समेत दो दर्जन से अधिक पहाड़ी नदियां उत्तर बिहार के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। इन नदियों के जलस्तर में अचानक बढ़ोतरी होने पर पश्चिम चंपारण समेत उत्तर बिहार के कई इलाकों पर बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है।
नेपाल की त्रिशूली नदी में यदि इसी तरह की गंभीर घटना दोबारा होती है तो सीमावर्ती इलाकों के साथ पश्चिम चंपारण और उत्तर बिहार में गंडक तथा सिकरहना नदियों के जरिए पानी का दबाव बढ़ने की आशंका जताई गई है।
नेपाल से भारत में प्रवेश करने वाली नारायणी नदी को भारत में गंडक के नाम से जाना जाता है। इसमें काली गंडक, मर्स्यांगदी, माड़ी और सेती जैसी नदियां मिलती हैं। नेपाल के देवघाट के पास त्रिशूली नदी भी नारायणी में मिलती है।
त्रिशूली नदी के पीछे छिपा है बड़ा जलप्रवाह तंत्र
नेपाल डेवलपमेंट रिसर्च इंस्टीट्यूट के समन्वयक डॉ. विवास बहादुर बस्न्यात और नवलपरासी जिले के वरिष्ठ जल विज्ञानी बिनोद पराजुली के अनुसार त्रिशूली नदी तिब्बत के क्यिरोंग जिले की पेखु कांगरी पर्वतमाला से निकलती है।
त्रिशूली नदी के जलप्रवाह में भोटेकोशी, ल्हेन्दे खोला, मैलमंग खोला, चिलीमे खोला, आंखू खोला और बूढ़ी गंडक नदी का पानी भी शामिल होता है। ऊंचे पहाड़ी क्षेत्रों से आने के कारण त्रिशूली नदी को बेहद खतरनाक नदी माना जाता है। इसी नदी में बाढ़ के कारण नेपाल में भारी तबाही हुई है।
ऐसे में दोबारा किसी झील के टूटने या पहाड़ी क्षेत्र में अचानक भारी जलप्रवाह बनने की स्थिति में उसका प्रभाव भारतीय क्षेत्र तक पहुंचने की आशंका को देखते हुए बिहार में सतर्कता बढ़ाई गई है।
गंडक नदी का नाम और रास्ता भी बेहद महत्वपूर्ण
नदियों के विशेषज्ञ देवी लाल यादव के अनुसार गंडक नदी का उद्गम तिब्बत के कागबेनी क्षेत्र के एक नाले से माना जाता है, जहां इसे जुगूं खोला कहा जाता है। अन्नपूर्णा के पास यह काली गंडकी के नाम से जानी जाती है। आगे इसमें ठाकुर जी नदी मिलती है और फिर यह कृष्णा गंडकी तथा देवघाट में नारायणी के नाम से जानी जाती है। बराज से पहले इसका नाम गंडक हो जाता है।
विशेषज्ञ के अनुसार नेपाल में 123 झीलें हैं, जिनमें अवरोधक बने हुए हैं। इनमें कभी भी झील फटने जैसी स्थिति पैदा हो सकती है, जिससे बड़े पैमाने पर तबाही की आशंका बन सकती है। इसी वजह से पहाड़ी क्षेत्रों में होने वाली घटनाओं का असर बिहार जैसे निचले इलाकों में भी चिंता का कारण बनता है।
सिकरहना में 2017 की बाढ़ की याद क्यों आई?
उत्तर बिहार में सिकरहना नदी को लेकर भी सतर्कता जरूरी मानी जा रही है। रामनगर और गौनाहा से आने वाली करीब डेढ़ दर्जन पहाड़ी नदियां लौरिया, चनपटिया और सिकटा में सिकरहना नदी से मिलती हैं।
वर्ष 2017 में सिकरहना में आई बाढ़ के दौरान चंपारण के साथ मुजफ्फरपुर और बेगूसराय तक असर देखने को मिला था। इसी पुराने अनुभव को देखते हुए नेपाल से आने वाले पानी और पहाड़ी नदियों के प्रवाह पर विशेष निगरानी रखी जा रही है।
26 अगस्त की बाढ़ के बाद से लगातार बढ़ी निगरानी
बताया गया कि 26 अगस्त को नेपाल में प्रलयंकारी बाढ़ की स्थिति बनी थी। नेपाल से आने वाले पानी के गंडक नदी में पहुंचने के बाद गोपालगंज, सारण और मुजफ्फरपुर में बाढ़ की संभावना को लेकर चिंता बढ़ी थी।
स्थिति को देखते हुए जल संसाधन विभाग ने गंडक बराज पर मुख्यालय स्तर से अधीक्षण अभियंता के नेतृत्व में तकनीकी दल तैनात किया है। नेपाल से आने वाले पानी को सुरक्षित तरीके से निकालने के लिए गंडक बराज के सभी 36 फाटक खोल दिए गए हैं।
वाल्मीकिनगर से कोसी तक प्रशासन पूरी तरह सतर्क
तिब्बत-नेपाल सीमा पर एक और झील फटने की सूचना के बाद बिहार में सतर्कता का दायरा और बढ़ गया है। वाल्मीकिनगर स्थित गंडक बराज से लेकर वीरपुर के कोसी बराज तक जलप्रवाह की लगातार निगरानी की जा रही है। तटबंधों, स्पर और अन्य संरचनाओं की स्थिति पर भी नजर रखी जा रही है।
फिलहाल विभागीय अधिकारियों के अनुसार प्रमुख तटबंध सुरक्षित हैं और इंजीनियरिंग टीमें लगातार निगरानी में जुटी हैं। प्रशासन की कोशिश है कि नेपाल और पहाड़ी क्षेत्रों में होने वाली किसी भी नई घटना का प्रभाव बिहार तक पहुंचने से पहले उसकी जानकारी मिल सके और आवश्यकता पड़ने पर तत्काल कार्रवाई की जा सके।
