erer | Source: ereनई दिल्ली। अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) विद्यार्थियों को मिलने वाली पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के नियमों में बदलाव की तैयारी की चर्चा तेज हो गई है। लंबे समय से इस योजना के तहत विद्यार्थियों के माता-पिता की वार्षिक आय सीमा 2.5 लाख रुपये निर्धारित है। अब सरकार की ओर से इस सीमा में बदलाव के संकेत मिलने के बाद उन परिवारों के विद्यार्थियों को भी राहत मिलने की उम्मीद जगी है, जिनकी वार्षिक आय मौजूदा सीमा से अधिक है।

वर्तमान नियमों के तहत निर्धारित आय सीमा के कारण कई विद्यार्थी छात्रवृत्ति के दायरे से बाहर हो जाते हैं। सामाजिक संगठनों की ओर से लगातार यह मांग उठाई जाती रही है कि महंगाई और परिवारों की बढ़ती आर्थिक जरूरतों को देखते हुए आय सीमा में संशोधन किया जाना चाहिए।

2013 में बढ़ी थी आय सीमा, उसके बाद नहीं हुआ बदलाव

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय तथा जनजातीय कार्य मंत्रालय की ओर से इस छात्रवृत्ति योजना के लिए पारिवारिक आय सीमा में अंतिम संशोधन वर्ष 2013 में किया गया था। उस समय आय सीमा को 2 लाख रुपये से बढ़ाकर 2.5 लाख रुपये किया गया था।

योजना के नियमों के मुताबिक महंगाई और बदलती आर्थिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए आय सीमा की समय-समय पर समीक्षा की जानी चाहिए। हालांकि, लंबे समय से इसमें बदलाव नहीं होने को लेकर सामाजिक संगठनों ने सवाल उठाए हैं।

EWS की 8 लाख रुपये सीमा से तुलना

SC-ST छात्रवृत्ति की मौजूदा आय सीमा को लेकर कुछ संगठनों ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए निर्धारित आय सीमा से तुलना करते हुए सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि EWS के लिए आय सीमा 8 लाख रुपये होने के बावजूद SC-ST विद्यार्थियों की पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति के लिए सीमा 2.5 लाख रुपये पर बनी हुई है।

डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर नेशनल एसोसिएशन ऑफ इंजीनियर्स (BANAE), नेशनल कन्फेडरेशन ऑफ दलित ऑर्गेनाइजेशंस (NACDOR) और नेशनल कैंपेन फॉर दलित ह्यूमन राइट्स (NCDHR) सहित कुछ संगठनों ने आय सीमा बढ़ाने की मांग की है।

12 लाख रुपये तक आय सीमा करने की मांग

BANAE के अध्यक्ष नागसेन सोनारे ने कहा है कि बीते वर्षों में महंगाई को देखते हुए छात्रवृत्ति की आय सीमा में कई बार संशोधन होना चाहिए था। संगठन की ओर से इसे बढ़ाकर कम से कम 12 लाख रुपये वार्षिक करने की मांग रखी गई है।

वहीं NACDOR के अध्यक्ष अशोक भारती ने आरोप लगाया कि आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग और SC-ST वर्ग के विद्यार्थियों के लिए आर्थिक स्थिति का आकलन अलग-अलग मानकों से किया जा रहा है। उन्होंने इस अंतर को समाप्त करने की मांग की है।

संगठनों ने 8 लाख रुपये तक सीमा बढ़ाने की भी मांग की

NCDHR की सचिव बीना जे. पल्लीकल ने छात्रवृत्ति की आय सीमा में संशोधन में देरी का मुद्दा उठाया। उनके मुताबिक कई सामाजिक संगठनों ने सरकार को ज्ञापन देकर आय सीमा बढ़ाकर 8 लाख रुपये करने की मांग की है।

संगठनों का कहना है कि मौजूदा आय सीमा के कारण ऐसे विद्यार्थी भी छात्रवृत्ति से बाहर हो सकते हैं, जिन्हें उच्च शिक्षा जारी रखने में आर्थिक सहायता की जरूरत है। हालांकि, छात्रवृत्ति की नई आय सीमा और पात्रता को लेकर अंतिम निर्णय सरकार की ओर से आधिकारिक अधिसूचना जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

फैसले का इंतजार कर रहे विद्यार्थियों की नजरें सरकार पर

पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति की आय सीमा में संभावित बदलाव का सीधा असर SC-ST वर्ग के उन विद्यार्थियों पर पड़ सकता है, जो वर्तमान आय सीमा से कुछ अधिक पारिवारिक आय होने के कारण योजना का लाभ नहीं ले पा रहे हैं।

फिलहाल सरकार की ओर से नई आय सीमा की अंतिम राशि और लागू होने की तारीख की औपचारिक घोषणा नहीं हुई है। ऐसे में 4.5 लाख रुपये या उससे अधिक वार्षिक आय वाले परिवारों के विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति का लाभ मिलेगा या नहीं, यह सरकार के अंतिम फैसले और संशोधित नियमों के बाद ही तय होगा।