erer | Source: ereबेंगलुरु। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने कानून की पढ़ाई पूरी कर पेशेवर दुनिया में कदम रखने जा रहे छात्रों को न्याय, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा करने का महत्वपूर्ण संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि कानूनी पेशा कमजोर दिल वालों के लिए नहीं है। इस क्षेत्र में सफल होने के लिए केवल कानूनों और पुराने न्यायिक फैसलों की जानकारी होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि अन्याय के खिलाफ खड़े होने का साहस, अपने सिद्धांतों के प्रति ईमानदारी और उन लोगों की बात सुनने की विनम्रता भी जरूरी है, जिनकी आवाज अक्सर अनसुनी रह जाती है।

मुख्य न्यायाधीश शनिवार, 17 अक्टूबर 2026 को बेंगलुरु स्थित नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी के 34वें वार्षिक दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने कानून की पढ़ाई पूरी करने वाले विद्यार्थियों को बधाई देने के साथ उनके सामने पेशेवर जीवन की जिम्मेदारियों को भी रेखांकित किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि कानूनी शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री हासिल करना या कानून की धाराओं को याद करना नहीं है। इसका वास्तविक महत्व न्याय की समझ विकसित करने, अलग-अलग विचारों का सम्मान करने और समाज की सेवा करने की क्षमता पैदा करने में है।

“कानूनी पेशा कमजोर दिल वालों के लिए नहीं”

सीजेआई सूर्यकांत ने अपने संबोधन में कहा, “कानूनी पेशा कमजोर दिल वालों के लिए नहीं है। इसमें न केवल कानूनों और पुराने फैसलों की गहरी समझ होनी चाहिए, बल्कि सही बात का बचाव करने का साहस और उन आवाजों को सुनने की विनम्रता भी होनी चाहिए, जिन्हें अक्सर अनसुना कर दिया जाता है।” उनके इस संदेश का प्रमुख उद्देश्य कानून के विद्यार्थियों को यह समझाना था कि न्याय के क्षेत्र में काम करने वाले लोगों की जिम्मेदारी केवल कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करने तक सीमित नहीं होती। उन्हें यह भी सुनिश्चित करना होता है कि जिन लोगों को अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर नहीं मिलता, उनकी समस्याओं और अधिकारों को गंभीरता से सुना जाए। कानूनी पेशे में कई बार ऐसे हालात सामने आते हैं, जहां सही बात के समर्थन में खड़ा होना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ऐसे में वकीलों और कानून से जुड़े अन्य पेशेवरों के लिए साहस, ईमानदारी और अपने सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्धता महत्वपूर्ण हो जाती है। मुख्य न्यायाधीश ने विद्यार्थियों को इसी जिम्मेदारी का एहसास कराया।

कानून की पढ़ाई का उद्देश्य केवल डिग्री हासिल करना नहीं

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि कानूनी शिक्षा का उद्देश्य केवल अकादमिक ज्ञान अर्जित करना नहीं है। यह विद्यार्थियों को अलग-अलग विचारों, सामाजिक परिस्थितियों और नजरियों को समझने के लिए भी तैयार करती है। कानून का अध्ययन करने वाले छात्रों को यह सीखना चाहिए कि समाज में मौजूद समस्याओं को केवल एक दृष्टिकोण से नहीं देखा जा सकता। उन्होंने स्नातक होने वाले विद्यार्थियों से कहा कि वे अपने ज्ञान का इस्तेमाल व्यापक सामाजिक हित में करें। कानून की पढ़ाई के दौरान हासिल की गई समझ का महत्व तभी बढ़ता है, जब उसका उपयोग न्याय सुनिश्चित करने, लोगों के अधिकारों की रक्षा करने और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए किया जाए। सीजेआई के अनुसार, कानूनी शिक्षा में आपराधिक कानून, संवैधानिक कानून और न्यायिक फैसलों का अध्ययन महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके साथ उन लोगों से संवाद करने की क्षमता भी विकसित करनी चाहिए, जो दुनिया को अलग नजरिये से देखते हैं। इससे कानून के विद्यार्थियों में संवेदनशीलता और न्यायपूर्ण निर्णय लेने की समझ विकसित हो सकती है।

न्याय के लिए साहस और दूसरों की बात सुनने की विनम्रता जरूरी

सीजेआई सूर्यकांत ने कानून के विद्यार्थियों को समझाया कि किसी मामले को समझने के लिए केवल कानूनी प्रावधानों की जानकारी पर्याप्त नहीं होती। इसके लिए संबंधित लोगों की परिस्थितियों, अनुभवों और समस्याओं को समझना भी आवश्यक है। उन्होंने विशेष रूप से उन लोगों की आवाज सुनने पर जोर दिया, जिन्हें अक्सर समाज में पर्याप्त महत्व नहीं मिलता। उनके संदेश के अनुसार, कानूनी पेशे से जुड़े लोगों को ऐसे व्यक्तियों की बातों को भी गंभीरता से सुनना चाहिए, जिनके पास अपनी समस्याओं को प्रभावी तरीके से सामने रखने के संसाधन या अवसर सीमित होते हैं। कानून का उद्देश्य केवल विवादों का निपटारा करना नहीं, बल्कि न्याय की भावना को मजबूत करना भी है। इसलिए वकीलों के लिए जरूरी है कि वे अपने पेशेवर ज्ञान के साथ मानवीय संवेदनशीलता भी बनाए रखें। मुख्य न्यायाधीश की यह अपील कानून के विद्यार्थियों को अपनी भूमिका को केवल करियर तक सीमित न रखने और समाज के प्रति जिम्मेदारी समझने का संदेश देती है।

सिद्धांतों से समझौता और शॉर्टकट अपनाने से बचें छात्र

दीक्षांत समारोह में मुख्य न्यायाधीश ने विद्यार्थियों को पेशेवर जीवन में अपने सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्ध रहने की सलाह दी। उन्होंने उन्हें ऐसे रास्ते अपनाने से सावधान किया, जिनमें अपने मूल्यों से समझौता करना पड़े या सफलता पाने के लिए शॉर्टकट का सहारा लिया जाए। सूर्यकांत ने छात्रों से संस्थान में सीखे गए मूल्यों को अपने पेशेवर जीवन में बनाए रखने की अपील की। कानून के क्षेत्र में काम करने वाले लोगों के निर्णयों का प्रभाव केवल उनके व्यक्तिगत करियर पर नहीं पड़ता, बल्कि आम नागरिकों के अधिकारों और न्याय व्यवस्था के प्रति लोगों के विश्वास पर भी पड़ सकता है। ऐसे में ईमानदारी और जिम्मेदारी को कानूनी पेशे का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाना चाहिए। मुख्य न्यायाधीश ने विद्यार्थियों को याद दिलाया कि कानून के माध्यम से समाज की सेवा करने का अवसर उन्हें अन्याय दूर करने, व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा करने और संविधान में निहित मूल्यों को बनाए रखने में योगदान देने का मौका देता है।

व्यक्तिगत स्वतंत्रता और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा करें

सीजेआई सूर्यकांत ने कानून के विद्यार्थियों से न्याय के लिए खड़े होने और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा करने का आह्वान किया। उन्होंने संवैधानिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता बनाए रखने पर भी जोर दिया। व्यक्तिगत स्वतंत्रता और संवैधानिक अधिकार न्याय व्यवस्था के महत्वपूर्ण आधार हैं। कानूनी पेशे से जुड़े लोगों की भूमिका इन अधिकारों की रक्षा करने और लोगों को न्याय प्राप्त करने में सहायता देने के लिहाज से अहम होती है। मुख्य न्यायाधीश के संदेश में इस जिम्मेदारी को प्रमुखता दी गई। उन्होंने विद्यार्थियों को यह समझाने का प्रयास किया कि कानून का ज्ञान तभी सार्थक है, जब उसका इस्तेमाल न्याय और संवैधानिक मूल्यों को मजबूत करने के लिए किया जाए। कानूनी पेशे में आगे बढ़ते समय छात्रों को अपने संस्थान में सीखी गई नैतिकता और जिम्मेदारी को प्राथमिकता देनी चाहिए।

देश को केवल कानून के जानकार नहीं, उम्मीद जगाने वाले पेशेवर चाहिए

मुख्य न्यायाधीश ने स्नातक होने वाले विद्यार्थियों से देश के प्रति अपनी व्यापक जिम्मेदारी पहचानने की अपील की। उन्होंने कहा कि राष्ट्र उनसे केवल कानून के पेशेवर के रूप में काम करने की उम्मीद नहीं करता, बल्कि उन्हें उम्मीद जगाने वाले लोगों के रूप में भी देखता है। उनके अनुसार, विद्यार्थियों को संस्थान से निकलकर पेशेवर जीवन में प्रवेश करते समय यह याद रखना चाहिए कि समाज उनसे केवल कानूनी ज्ञान के इस्तेमाल की अपेक्षा नहीं करता। उनसे यह भी उम्मीद की जाती है कि वे न्याय की भावना को मजबूत करें और लोगों के अधिकारों की रक्षा में योगदान दें। यह संदेश उन विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण है, जो वकालत, न्यायिक सेवाओं या कानून से जुड़े दूसरे क्षेत्रों में अपना करियर शुरू करने जा रहे हैं। मुख्य न्यायाधीश ने उन्हें अपने ज्ञान और कौशल का उपयोग व्यापक सामाजिक हित में करने की प्रेरणा दी।