नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी ने छात्रों और युवा नागरिकों से जुड़े मुद्दे पर एक बार फिर केंद्र सरकार के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। पार्टी ने आरोप लगाया है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा छात्रों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी की संयुक्त सूची मांगे जाने के बावजूद केंद्र सरकार इस जानकारी को शीर्ष अदालत के सामने रखने को लेकर आनाकानी कर रही है। इसी घटनाक्रम के बाद कॉकरोच जनता पार्टी ने सरकार को देशव्यापी आंदोलन की दिशा में आगे बढ़ने की चेतावनी दी है।
सुप्रीम कोर्ट की मांग पर सरकार के रुख से नाराज सीजेपी
कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ता सौरव दास ने 18 अगस्त को सोशल मीडिया मंच एक्स पर जारी बयान में केंद्र सरकार के रुख पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार से देशभर में छात्रों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी की सूची मांगी है। पार्टी का कहना है कि इस सूची के सामने आने से उन मामलों की पहचान और समीक्षा का रास्ता खुल सकता है, जिन पर प्रदर्शन के दौरान कार्रवाई की गई थी।
सौरव दास के मुताबिक, पार्टी सरकार को भारत के छात्रों, जेनेरेशन-जी और युवा नागरिकों के भरोसे के साथ खिलवाड़ करने की अनुमति नहीं देगी। उन्होंने कहा कि यदि सरकार 25 जुलाई को किए गए वादों को पूरा करने के लिए तत्काल और ठोस कदम नहीं उठाती है, तो कॉकरोच जनता पार्टी अगले दो दिनों के भीतर अपनी राष्ट्रीय कार्य समिति की बैठक बुलाएगी।
25 जुलाई के वादों को लेकर क्या है सीजेपी का दावा
कॉकरोच जनता पार्टी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने पूरे घटनाक्रम को 25 जुलाई से जोड़ते हुए कहा कि उस समय संगठन ने अपना देशव्यापी आंदोलन वापस लिया था। पार्टी के अनुसार, आंदोलन वापस लेने के पीछे सरकार की ओर से किए गए कुछ आश्वासन महत्वपूर्ण थे। इनमें प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी वापस लेने, प्रदर्शनकारियों को दंडात्मक कार्रवाई से बचाने और प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने से जुड़े मुद्दे शामिल थे।
सीजेपी का दावा है कि उसने सरकार के साथ बातचीत में संयम बरता और वादों को लागू करने के लिए पर्याप्त समय भी दिया। पार्टी अब यह जानना चाहती है कि सरकार उन प्रतिबद्धताओं को वास्तव में लागू करने की दिशा में क्या कदम उठा रही है।
एफआईआर की संयुक्त सूची पर तीन बार मांग का दावा
सौरव दास ने दावा किया कि 18 अगस्त की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से प्राथमिकी की संयुक्त सूची तीन बार मांगी। उनके अनुसार, केंद्र सरकार की ओर से पेश अधिवक्ता ने इस जानकारी को उपलब्ध कराने का कोई आश्वासन नहीं दिया और सूची पेश किए जाने के कदम का विरोध किया।
सीजेपी प्रवक्ता ने कहा कि शीर्ष अदालत की ओर से संयुक्त सूची मांगे जाने से केंद्र सरकार तथा भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन शासित राज्यों की ओर से किए गए वादों को लागू करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इस पूरे मामले में आगे की प्रक्रिया और अदालत के समक्ष दस्तावेज पेश किए जाने की स्थिति महत्वपूर्ण बनी हुई है।
गंभीर आपराधिक मामलों को अलग रखने का विकल्प
सौरव दास ने अपने बयान में यह भी दावा किया कि अदालत की ओर से एक विकल्प सुझाया गया था। इसके तहत गंभीर आपराधिक अपराधों का इतिहास रखने वाले लोगों से संबंधित प्राथमिकी की अलग से पहचान की जा सकती है। ऐसे मामलों पर उनके अलग-अलग आधारों पर विचार किया जा सकता है।
सीजेपी नेता ने इसी आधार पर सरकार के इरादों पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि युवाओं को यह जानने का अधिकार है कि 25 जुलाई को किए गए वादों को लागू किया जाएगा या फिर वे केवल देशव्यापी आंदोलन को समाप्त कराने के लिए किए गए थे।
दो दिन का अल्टीमेटम, राष्ट्रीय कार्य समिति की बैठक की चेतावनी
कॉकरोच जनता पार्टी ने कहा है कि सरकार की ओर से तत्काल और ठोस कदम नहीं उठाए जाने की स्थिति में संगठन अपनी अगली रणनीति पर विचार करेगा। पार्टी के अनुसार, अगले दो दिनों के भीतर राष्ट्रीय कार्य समिति की बैठक बुलाई जा सकती है।
इस बैठक में देशभर में आगे की कार्रवाई को लेकर फैसला किए जाने की बात कही गई है। सीजेपी ने स्पष्ट किया है कि संगठन की अगली कार्रवाई का स्वरूप पूरी तरह इस बात पर निर्भर करेगा कि भारत सरकार मौजूदा स्थिति में क्या कदम उठाती है।
20 जुलाई को हुआ था संसद मार्च
इस विवाद की पृष्ठभूमि 20 जुलाई को आयोजित संसद मार्च से जुड़ी है। कॉकरोच जनता पार्टी ने कई सप्ताह तक जंतर-मंतर पर चले प्रदर्शन और भूख हड़ताल के बाद संसद मार्च का आयोजन किया था। इस मार्च में हजारों छात्रों के शामिल होने का दावा किया गया था।
प्रदर्शनकारी परीक्षा प्रश्नपत्र लीक होने के मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की मांग कर रहे थे। प्रदर्शनकारियों ने संसद की ओर बढ़ने का प्रयास किया था। इसी दौरान मध्य दिल्ली में प्रदर्शनकारियों के एक हिस्से ने पुलिस बैरिकेड तोड़ने का प्रयास किया।
पुलिस कार्रवाई के बाद बढ़ा विवाद
बैरिकेड तोड़ने के प्रयास के बाद सुरक्षा बलों ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज किया। इसके बाद प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर विवाद और तेज हो गया।
सोशल मीडिया पर साझा किए गए कई वीडियो में कथित तौर पर पुलिसकर्मियों द्वारा प्रदर्शनकारियों के साथ मारपीट किए जाने के दृश्य सामने आने का दावा किया गया। दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस ने अपनी कार्रवाई का बचाव किया था। पुलिस की ओर से कहा गया था कि भीड़ के एक हिस्से के हिंसक होने और कथित तौर पर पथराव किए जाने के बाद ही बल प्रयोग किया गया।
अब सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर टिकी नजर
छात्रों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी और केंद्र सरकार के बीच विवाद अब सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही से भी जुड़ गया है। पार्टी का कहना है कि प्राथमिकी की संयुक्त सूची उपलब्ध होने से मामलों को एक साथ देखने और आगे की प्रक्रिया को स्पष्ट करने में मदद मिल सकती है।
फिलहाल सीजेपी ने सरकार को 25 जुलाई की प्रतिबद्धताओं को लागू करने की दिशा में ठोस कदम उठाने का संकेत देते हुए दो दिनों के भीतर राष्ट्रीय कार्य समिति की बैठक बुलाने की चेतावनी दी है। पार्टी ने कहा है कि आगे का फैसला सरकार के कदमों के आधार पर लिया जाएगा।
