erer | Source: ererबच्चों की सुरक्षा केवल उन पर नजर रखने से सुनिश्चित नहीं होती, बल्कि उन्हें सही समय पर अपनी सुरक्षा से जुड़े जरूरी नियम सिखाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। इसी विषय पर गाइनेकोलॉजिस्ट डॉ. शैफाली दधीचि ने सोशल मीडिया के माध्यम से माता-पिता को जागरूक करने की कोशिश की है। उन्होंने एक बच्ची के अनुभव का उदाहरण साझा करते हुए बताया कि यदि बच्चों को समय रहते सही जानकारी दी जाए तो वे किसी भी अनुचित व्यवहार को पहचान सकते हैं और बिना डर अपनी बात परिवार तक पहुंचा सकते हैं।

बच्ची की बात ने सबको सोचने पर किया मजबूर

डॉ. शैफाली दधीचि द्वारा साझा किए गए वीडियो में एक बच्ची से बातचीत दिखाई गई है। डॉक्टर बच्ची से पूछती हैं कि वह डरे बिना बताए कि उसके साथ क्या हुआ। इस पर बच्ची बताती है कि पार्क में एक अंकल ने उसे गलत तरीके से छुआ और उसे टॉफी भी दी। बच्ची की यह बात सुनकर डॉक्टर ने बच्चों की सुरक्षा को लेकर माता-पिता को सतर्क रहने की सलाह दी।

परिवार को तुरंत क्यों नहीं बता सकी बच्ची?

जब डॉक्टर ने बच्ची से पूछा कि उसने यह बात अपने घर में किसी को क्यों नहीं बताई, तो बच्ची ने बताया कि उसकी मां रसोई में व्यस्त थीं, पिता लैपटॉप पर काम कर रहे थे और दादी पूजा कर रही थीं। सभी ने उससे बाद में बात करने के लिए कहा। बच्ची ने यह भी बताया कि इस घटना के बाद वह काफी डर गई थी और समझ नहीं पा रही थी कि क्या करे।

क्या है PANTS Rule और क्यों है इतना जरूरी?

डॉ. शैफाली दधीचि ने बताया कि बच्चों को कम उम्र से ही PANTS Rule जरूर सिखाना चाहिए, ताकि वे अपने शरीर की सुरक्षा को समझ सकें और किसी भी गलत स्पर्श की पहचान कर सकें।

P – Private Parts are Private (प्राइवेट पार्ट्स निजी होते हैं): शरीर के निजी अंगों को बिना उचित कारण और अनुमति के कोई नहीं छू सकता।

A – Always Remember Your Body Belongs to You (हमेशा याद रखें, आपका शरीर आपका अपना है): बच्चों को यह समझाना जरूरी है कि उनके शरीर पर उनका अधिकार है।

N – No Means No (नहीं का मतलब नहीं): यदि कोई स्पर्श या व्यवहार असहज लगे तो बच्चे को स्पष्ट रूप से मना करने का अधिकार है।

T – Talk About All the Secrets to Your Mama and Papa (हर बात माता-पिता से साझा करें): किसी भी ऐसी घटना या रहस्य को अपने माता-पिता या भरोसेमंद बड़े व्यक्ति को जरूर बताना चाहिए।

S – Speak Up, Someone Can Help (चुप न रहें, मदद मांगें): यदि कोई गलत व्यवहार करे तो आवाज उठाएं, क्योंकि कोई न कोई आपकी मदद अवश्य करेगा।

3 से 4 साल की उम्र से शुरू करें जागरूकता

डॉ. दधीचि के अनुसार, बच्चों को लगभग 3 से 4 वर्ष की आयु से ही उनकी समझ के अनुरूप गुड टच और बैड टच के बारे में जानकारी देना शुरू कर देना चाहिए। यदि बच्चों को यह शिक्षा सरल भाषा में दी जाए तो वे किसी भी अनुचित स्थिति को बेहतर तरीके से समझ सकते हैं।

बच्चों के साथ खुलकर संवाद करना भी है जरूरी

डॉक्टर ने कहा कि माता-पिता को ऐसा माहौल बनाना चाहिए, जहां बच्चा बिना किसी डर या झिझक के अपनी हर बात साझा कर सके। यदि बच्चे को यह भरोसा होगा कि उसकी बात ध्यान से सुनी जाएगी, तो वह किसी भी अनुचित घटना की जानकारी समय पर दे सकेगा। यही विश्वास बच्चों की सुरक्षा की सबसे मजबूत नींव बन सकता है।

बच्चों को डर नहीं, जागरूक बनाना है जरूरी

डॉ. शैफाली दधीचि का कहना है कि बच्चों को डराकर नहीं, बल्कि उन्हें सही और गलत की पहचान सिखाकर सुरक्षित बनाया जा सकता है। व्यक्तिगत सुरक्षा, अपने शरीर की समझ और भरोसेमंद लोगों से खुलकर बात करने की आदत बच्चों को कई संभावित खतरों से बचाने में मदद कर सकती है।