मथुरा: उत्तर प्रदेश के मथुरा स्थित वृंदावन के गौरी गोपाल आश्रम में आचार्य प्रमोद कृष्णम पहुंचे, जहां कथावाचक अनिरुद्धाचार्य महाराज ने उनका स्वागत किया। इस दौरान प्रमोद कृष्णम ने आश्रम में रहने वाली बुजुर्ग माताओं से मुलाकात की और उनके जीवन तथा आश्रम में मिलने वाली सुविधाओं के बारे में जानकारी ली। उन्होंने भक्तों को भोजन भी वितरित किया। इस मुलाकात से जुड़ा वीडियो प्रमोद कृष्णम ने अपने सोशल मीडिया मंच एक्स पर साझा किया है।
अनिरुद्धाचार्य महाराज ने किया प्रमोद कृष्णम का स्वागत
मथुरा के वृंदावन स्थित गौरी गोपाल आश्रम पहुंचने पर आचार्य प्रमोद कृष्णम का कथावाचक अनिरुद्धाचार्य महाराज ने स्वागत किया। इसके बाद प्रमोद कृष्णम ने आश्रम में रहने वाली बुजुर्ग महिलाओं से बातचीत की। उन्होंने महिलाओं से उनके रहने, खाने-पीने, स्वास्थ्य और आश्रम में उपलब्ध दूसरी सुविधाओं के बारे में जानकारी ली।
प्रमोद कृष्णम ने आश्रम में रह रही माताओं के साथ समय बिताया और उनकी बातें सुनीं। इस दौरान उन्होंने भक्तों को भोजन भी वितरित किया। यात्रा से संबंधित वीडियो उन्होंने अपने एक्स खाते पर साझा किया।
‘घोर कलियुग में सतयुग की झलक’, प्रमोद कृष्णम ने की तारीफ
आचार्य प्रमोद कृष्णम ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में गौरी गोपाल आश्रम में चल रही सेवा की प्रशंसा की। उन्होंने लिखा कि घोर ‘कलियुग’ के इस दौर में ‘सतयुग’ की झलक दिखाई दी।
उन्होंने अनिरुद्धाचार्य महाराज की सेवा भावना की सराहना करते हुए लिखा कि धन्य है वह मां, जिसने अनिरुद्धाचार्य जैसे सपूत को जन्म दिया। उन्होंने वृद्ध और बीमार माताओं की निःशुल्क तथा निस्वार्थ सेवा को अद्भुत और अकल्पनीय उदाहरण बताया।
प्रमोद कृष्णम ने अपनी पोस्ट में ‘गईया’ और ‘मैया’ के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित करने वाले अनिरुद्धाचार्य महाराज को शुभाशीष दिया। साथ ही श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की आत्मीय बधाई भी दी।
आश्रम में करीब दो साल से रह रही हैं बीना
गौरी गोपाल आश्रम में रहने वाली बीना ने बताया कि उन्हें यहां रहते हुए करीब दो साल हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि आश्रम में रहने के दौरान उन्हें किसी तरह की परेशानी नहीं होती। खाने-पीने के साथ दूध और दवाइयों की व्यवस्था भी ठीक है।
बीना के अनुसार, जरूरत के मुताबिक उन्हें हर सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। आश्रम में मिलने वाली देखभाल को लेकर उन्होंने संतोष जताया। उनका कहना है कि यहां महाराज जी और आश्रम से जुड़े लोग बुजुर्ग महिलाओं की जिस तरह सेवा करते हैं, उससे उन्हें अपनापन महसूस होता है।
जन्माष्टमी पर आधी रात को होता है कान्हा जी का जन्म
बीना ने बताया कि जन्माष्टमी के अवसर पर आश्रम में कई दिन पहले से तैयारियां शुरू हो जाती हैं। जन्माष्टमी की रात 12 बजे कान्हा जी का जन्म कराया जाता है। इस दौरान खीरे के इस्तेमाल की परंपरा भी निभाई जाती है।
कान्हा जी के जन्म के बाद उन्हें भोग लगाया जाता है। व्रत के दौरान खाए जाने वाले सिंघाड़े और तिखुर जैसी चीजों का भी भोग लगाया जाता है। बीना ने बताया कि आश्रम में अनिरुद्धाचार्य महाराज की ओर से प्रसाद और अन्य चीजों की भी व्यवस्था की जाती है।
परिवार से कम लोग आते हैं, बेटी और दामाद अब भी मिलने पहुंचते हैं
बीना ने बताया कि अब उनके मायके या परिवार से बहुत कम लोग उनसे मिलने आते हैं। हालांकि उनकी बेटी और दामाद समय-समय पर उनसे मिलने आते रहते हैं। बेटी उनके लिए कपड़े और जरूरत का सामान भी लेकर आती है।
उन्होंने बताया कि बेटी साड़ी, ब्लाउज और कंबल जैसी चीजें भी उनके लिए लेकर आती है। परिवार की ओर से मिलने वाला यह अपनापन उनके लिए काफी मायने रखता है।
बीना ने आश्रम में मिलने वाली सेवा के बारे में कहा कि यहां आने के बाद उन्हें अपने घर की याद बहुत कम आती है। उनके मुताबिक, आश्रम में बुजुर्ग महिलाओं की जिस तरह से देखभाल की जाती है, उससे उन्हें घर जैसा अपनापन महसूस होता है।
दूसरी महिला ने कहा- ‘गुरु जी बहुत अच्छे हैं’
आश्रम में रहने वाली एक अन्य महिला ने भी अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि वह करीब दो साल से गौरी गोपाल आश्रम में रह रही हैं। महिला के अनुसार, गुरु जी ने उन्हें बहुत अच्छे तरीके से रखा है और यहां उन्हें किसी चीज की कमी महसूस नहीं होती।
उन्होंने बताया कि दूध, चाय, नाश्ता, खाना और अन्य जरूरी चीजें उन्हें समय पर मिलती हैं। महिला ने आश्रम में होने वाली देखभाल की तारीफ करते हुए कहा कि जिस तरह की देखभाल यहां होती है, वैसी शायद हर कोई नहीं कर सकता।
परिवार के लिए किया काम, फिर खुद सहारे की जरूरत पड़ी
महिला ने अपने परिवार के बारे में बताते हुए कहा कि उनकी मां अब इस दुनिया में नहीं हैं। उन्होंने अपने भाई को बड़ा किया और परिवार के लिए काफी कुछ किया। बाद में भाई की शादी हुई और उसके बच्चे भी हुए।
उन्होंने बताया कि उन्होंने बड़े लोगों के घरों में बच्चों की देखभाल करने का काम भी किया। परिवार के लोग धीरे-धीरे अपनी जिंदगी में व्यस्त होते गए और एक समय ऐसा आया जब उन्हें खुद सहारे की जरूरत महसूस होने लगी।
इसी दौरान उन्हें गौरी गोपाल आश्रम के बारे में जानकारी मिली और वह यहां आ गईं। आश्रम में आने के बाद उन्हें रहने के साथ-साथ भोजन, दूध, दवाइयां और अन्य जरूरी सुविधाएं मिल रही हैं।
बुजुर्ग माताओं से बातचीत ने खींचा ध्यान
मथुरा के वृंदावन स्थित गौरी गोपाल आश्रम में आचार्य प्रमोद कृष्णम की यात्रा के दौरान धार्मिक गतिविधियों के साथ बुजुर्ग महिलाओं की जिंदगी और उनकी देखभाल से जुड़ी बातें भी सामने आईं। आश्रम में रहने वाली महिलाओं ने अपनी जिंदगी के अनुभव साझा किए और बताया कि उन्हें यहां आवश्यक सुविधाएं मिल रही हैं।
प्रमोद कृष्णम ने अनिरुद्धाचार्य महाराज की सेवा भावना की प्रशंसा करते हुए आश्रम में वृद्ध और बीमार माताओं की निःशुल्क एवं निस्वार्थ सेवा को सराहा। उन्होंने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में इसे ‘घोर कलियुग में सतयुग की झलक’ बताया।
वहीं, आश्रम में रहने वाली बीना और दूसरी महिला की बातों से उनके जीवन के संघर्ष और सहारे की जरूरत से जुड़ी तस्वीर सामने आई। दोनों ने आश्रम में मिलने वाली सुविधाओं और देखभाल के बारे में अपने अनुभव बताए।
मथुरा के वृंदावन में हुई इस मुलाकात में आचार्य प्रमोद कृष्णम और अनिरुद्धाचार्य महाराज की बातचीत के साथ गौरी गोपाल आश्रम में रहने वाली बुजुर्ग माताओं की जिंदगी भी चर्चा का केंद्र बनी। प्रमोद कृष्णम ने अनिरुद्धाचार्य महाराज की सेवा भावना की सराहना करते हुए उन्हें शुभाशीष दिया और श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की बधाई दी।
