बिहार के समस्तीपुर जिले के ताजपुर प्रखंड स्थित मोतीपुर गांव के युवा क्रिकेटर वैभव सूर्यवंशी आज लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुके हैं। उनकी सफलता के पीछे सिर्फ प्रतिभा ही नहीं, बल्कि पिता का त्याग, मां का समर्पण और पूरे परिवार का संघर्ष छिपा है। बेटे को क्रिकेटर बनाने के लिए पिता ने अपनी पुश्तैनी जमीन तक बेच दी, जबकि मां रोज सुबह तीन बजे उठकर उसकी तैयारी में जुट जाती थीं। सीमित संसाधनों के बावजूद परिवार ने वैभव के सपनों को कभी टूटने नहीं दिया और आज वही सपना भारतीय क्रिकेट में नई पहचान बना रहा है।

पिता ने बेटे के सपने के लिए बेची जमीन

वैभव सूर्यवंशी के पिता संजीव सूर्यवंशी खुद क्रिकेटर बनना चाहते थे, लेकिन परिस्थितियों के कारण उनका सपना अधूरा रह गया। उन्होंने ठान लिया कि बेटे का सपना हर हाल में पूरा करेंगे। क्रिकेट प्रशिक्षण, किट और यात्रा के खर्च के लिए उन्होंने अपनी पुश्तैनी जमीन का एक हिस्सा तक बेच दिया।

घर के आंगन में तैयार किया क्रिकेट नेट

वैभव की प्रतिभा को निखारने के लिए पिता ने घर के पास ही क्रिकेट नेट बनवाया। यहां कंक्रीट पिच और टर्फ विकेट की व्यवस्था की गई, ताकि वह मैच जैसी परिस्थितियों में अभ्यास कर सके। इसी छोटे से मैदान में घंटों मेहनत कर वैभव ने अपने खेल को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।

मां का समर्पण भी बना सफलता की ताकत

वैभव की मां का योगदान भी उनकी सफलता में बेहद अहम रहा। वह रोज सुबह करीब तीन बजे उठ जाती थीं और बेटे के अभ्यास पर जाने से पहले उसके लिए भोजन तैयार करती थीं। परिवार की पूरी दिनचर्या वैभव के क्रिकेट करियर के इर्द-गिर्द घूमती थी।

कोच को है बड़े भविष्य की उम्मीद

वैभव के कोच बृजेश झा का कहना है कि उनमें सीखने की अद्भुत क्षमता और मेहनत करने का जुनून है। उनका मानना है कि वैभव आने वाले समय में बिहार ही नहीं, बल्कि पूरे देश का नाम रोशन करेंगे।

गांव के युवाओं के लिए बने प्रेरणा

स्थानीय लोगों का कहना है कि वैभव की सफलता ने गांव के बच्चों और युवाओं को भी बड़े सपने देखने की प्रेरणा दी है। उनका मानना है कि मेहनत, समर्पण और परिवार के सहयोग से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।