भारत ने जिम्बाब्वे को तीन मैचों की टी20 सीरीज में 3-0 से हराकर शानदार क्लीन स्वीप किया। इस ऐतिहासिक जीत के सबसे बड़े हीरो 15 साल के युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी रहे। पूरी सीरीज में आक्रामक बल्लेबाजी करते हुए उन्होंने सबसे ज्यादा रन बनाए और अपने प्रदर्शन के दम पर 'प्लेयर ऑफ द सीरीज' का खिताब अपने नाम किया। यह उनके अंतरराष्ट्रीय करियर का पहला मैन ऑफ द मैच और पहला मैन ऑफ द सीरीज अवॉर्ड भी रहा। इस उपलब्धि के बाद वैभव ने जो बयान दिया, उसने क्रिकेट प्रेमियों का दिल जीत लिया।
Vaibhav Suryavanshi: 'सपना सच होने जैसा है', मैन ऑफ द सीरीज बनने के बाद 15 साल के वैभव का दिल जीत लेने वाला बयानSource : Abp news.com
'सपना सच होने जैसा है'
प्लेयर ऑफ द सीरीज चुने जाने के बाद वैभव सूर्यवंशी ने कहा, "यह सपना सच होने जैसा पल है। अपना पहला मैन ऑफ द मैच और मैन ऑफ द सीरीज अवॉर्ड पाकर मैं बहुत खुश हूं। हरारे पहुंचने के बाद दो या तीन दिनों तक हमारी तैयारी बहुत अच्छी रही। मैंने यहां अंडर-19 वर्ल्ड कप भी खेला था, इसलिए मुझे इस जगह पर खेलने में बहुत मजा आता है। कप्तान, कोच और पूरी टीम ने मेरा पूरा साथ दिया। मैं सभी का शुक्रगुजार हूं।"
टीम के लिए खेलना ही सबसे बड़ा लक्ष्य
वैभव ने कहा कि उनकी पहली प्राथमिकता हमेशा टीम को मजबूत शुरुआत दिलाना होती है। उन्होंने कहा, "मेरा खेलने का तरीका वही है, जैसा मैं टी20 क्रिकेट में हमेशा अपनाता हूं। मैं सिर्फ टीम के लिए अपना योगदान देने की कोशिश करता हूं। तीनों मैचों में मेरा लक्ष्य टीम को तेज और अच्छी शुरुआत देना था। जब भी अच्छी शुरुआत मिली, मैंने पारी को लंबा ले जाने की कोशिश की। अभ्यास के दौरान जिस तरह की तैयारी करता हूं, उसे मैच में दोहराने की कोशिश करता हूं।"
पूरी सीरीज में बल्ले से मचाया धमाल
जिम्बाब्वे के खिलाफ तीन मैचों की टी20 सीरीज में वैभव सूर्यवंशी ने शानदार बल्लेबाजी का प्रदर्शन किया। उन्होंने 50.33 की औसत और 196.10 के स्ट्राइक रेट से कुल 151 रन बनाए, जो सीरीज में किसी भी बल्लेबाज द्वारा सबसे ज्यादा रहे। इस शानदार प्रदर्शन के दम पर वह सीरीज के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी चुने गए और भारत की क्लीन स्वीप जीत के सबसे बड़े नायक साबित हुए।
9 छक्के, 15 चौके और यादगार प्रदर्शन
पूरी सीरीज के दौरान वैभव का बल्ला जमकर बोला। उन्होंने तीन मुकाबलों में कुल 9 छक्के लगाए और 15 चौके जड़े। वह सीरीज में सबसे ज्यादा छक्के लगाने वाले बल्लेबाज रहे, जबकि चौके लगाने के मामले में दूसरे स्थान पर रहे। उनकी विस्फोटक बल्लेबाजी ने जिम्बाब्वे के गेंदबाजों पर लगातार दबाव बनाए रखा और भारत को हर मैच में मजबूत शुरुआत दिलाई।
शतक से चूके, लेकिन जीत लिया दिल
सीरीज के तीसरे और अंतिम टी20 मुकाबले में वैभव सूर्यवंशी शानदार लय में नजर आए। उन्होंने केवल 81 रनों की बेहतरीन पारी खेलकर भारत की जीत की नींव रखी। हालांकि वह अपने पहले अंतरराष्ट्रीय शतक से चूक गए, लेकिन उनकी इस मैच जिताऊ पारी ने एक बार फिर साबित कर दिया कि वह भारतीय क्रिकेट के सबसे प्रतिभाशाली युवा खिलाड़ियों में शामिल हैं।
भविष्य के सितारे के रूप में उभरे वैभव
महज 15 साल की उम्र में वैभव सूर्यवंशी ने जिस आत्मविश्वास और निडर अंदाज से बल्लेबाजी की है, उसने क्रिकेट विशेषज्ञों और प्रशंसकों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। आयरलैंड और इंग्लैंड दौरे की निराशा को पीछे छोड़ते हुए उन्होंने जिम्बाब्वे में दमदार वापसी की और दिखा दिया कि बड़े मंच पर दबाव को कैसे अवसर में बदला जाता है। उनकी यह सफलता भारतीय क्रिकेट के उज्ज्वल भविष्य की भी मजबूत तस्वीर पेश करती है।
