एक स्कूल, उर्दू की कुछ कक्षाएं, फिर विरोध, हंगामा, मारपीट और दोनो तरफ से एफआईआर। तेलंगाना के निजामाबाद जिले का यह मामला अब सिर्फ एक स्कूल तक सीमित नहीं रह गया है। यह विवाद शिक्षा, भाषा, राजनीति और सामाजिक माहौल से जुड़ी बड़ी सवाल में बदलता दिखाई दे रहा है। खास बात यह है कि जिस उर्दू भाषा को तेलंगाना में आधिकारिक तौर पर दूसरी राजभाषा (Second Official Language) का दर्जा प्राप्त है, उसी भाषा की पढ़ाई को लेकर विवाद खड़ा हो गया। अब सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि स्कूल में क्या पढ़ाया जा रहा था, बल्कि यह भी है कि क्या भाषाएं भी अब राजनीतिक और धार्मिक टकराव का नया केंद्र बनती जा रही हैं?पुलिस के सामने शिक्षक को थप्पड़ मारने का आरोप

पुलिस के सामने शिक्षक को थप्पड़ मारने का आरोप

उर्दू की क्लास से शुरू हुआ विवाद, स्कूल में घुसकर हुआ हंगामा

निजामाबाद जिले के अरमूर क्षेत्र स्थित भारत चंद्र हाई स्कूल में कथित तौर पर गैर-मुस्लिम छात्रों को उर्दू पढ़ाए जाने की सूचना के बाद विवाद शुरू हुआ। कुछ अभिभावकों और दक्षिणपंथी संगठनों ने आरोप लगाया कि छात्रों को निर्धारित हिंदी पाठ्यक्रम की जगह उर्दू पढ़ाई जा रही थी और उन्हें नमाज़ तथा कलमा भी सिखाया जा रहा था। आरोप सामने आने के बाद भाजपा नेताओं और स्थानीय कार्यकर्ताओं ने स्कूल पहुंचकर विरोध प्रदर्शन किया। इसी दौरान स्कूल के प्रिंसिपल आमिर खान के साथ कथित मारपीट और अभद्र व्यवहार हुआ। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में पुलिस की मौजूदगी में एक व्यक्ति द्वारा थप्पड़ मारने का दृश्य भी सामने आया, जिसने पूरे मामले को और ज्यादा संवेदनशील बना दिया। दूसरी ओर स्कूल प्रशासन ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। प्रिंसिपल आमिर खान का कहना है कि कुछ अभिभावकों के अनुरोध पर केवल दो-तीन दिन उर्दू वर्णमाला सिखाई गई थी। उनका दावा है कि न तो नमाज़ सिखाई गई और न ही किसी प्रकार का धार्मिक पाठ पढ़ाया गया। उनके मुताबिक नियुक्त उर्दू शिक्षक केवल भाषा की शुरुआती जानकारी दे रहे थे।

दोनों पक्षों पर एफआईआर, पुलिस जांच में जुटी

घटना के बाद पुलिस ने दोनों पक्षों की शिकायतों के आधार पर अलग-अलग मामले दर्ज किए हैं। स्कूल में घुसकर हंगामा, मारपीट और धमकी देने के आरोप में भाजपा नेता बालू सहित करीब 20 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। वहीं दूसरी ओर स्कूल के कॉरेस्पोंडेंट, प्रिंसिपल और उर्दू शिक्षक के खिलाफ भी कथित तौर पर बिना अनुमति उर्दू पढ़ाने और धार्मिक आधार पर वैमनस्य फैलाने के आरोप में मामला दर्ज किया गया है। अरमूर पुलिस का कहना है कि दोनों मामलों की जांच की जा रही है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी। पुलिस का कहना है कि फिलहाल किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी और जांच पूरी होने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।

उर्दू दूसरी राजभाषा, फिर भी विवाद क्यों?

तेलंगाना देश के उन राज्यों में शामिल है जहां उर्दू को आधिकारिक तौर पर दूसरी राजभाषा का दर्जा प्राप्त है। सरकारी स्तर पर कई विभागों में उर्दू का उपयोग किया जाता है और स्कूलों में भी वैकल्पिक भाषा के रूप में इसकी पढ़ाई की व्यवस्था है। ऐसे में इस घटना ने एक नई बहस को जन्म दे दिया है कि यदि उर्दू राज्य की मान्यता प्राप्त भाषा है तो उसके शिक्षण को लेकर इतना बड़ा विवाद क्यों खड़ा हुआ !इस बीच राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। मजलिस बचाओ तहरीक (MBT) के प्रवक्ता अमजद उल्लाह खान ने आरोप लगाया कि "कांग्रेस सरकार के शासन में तेलंगाना धीरे-धीरे RSS की प्रयोगशाला बनता जा रहा है।" उन्होंने दावा किया कि पुलिस की मौजूदगी में स्कूल स्टाफ के साथ मारपीट हुई और अल्पसंख्यकों को निशाना बनाया जा रहा है। वहीं AIMIM से जुड़े नेताओं और कई अल्पसंख्यक संगठनों ने भी इस घटना की निंदा करते हुए आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। हालांकि अभी तक सरकार या पुलिस ने इन आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।

शिक्षा, भाषा और राजनीति... अब जांच के बाद ही साफ होगी तस्वीर

इस घटना के बाद निजामाबाद में कई अल्पसंख्यक और शिक्षक संगठनों ने बंद का आह्वान किया है। उनकी मांग है कि स्कूल के प्रिंसिपल और स्टाफ की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए तथा मारपीट करने वालों पर सख्त कार्रवाई हो। वहीं दूसरी ओर शिकायत करने वाले अभिभावक और दक्षिणपंथी संगठन पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं!फिलहाल यह मामला केवल एक स्कूल का विवाद नहीं रह गया है। इसमें शिक्षा व्यवस्था, भाषाई अधिकार, धार्मिक संवेदनशीलता और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप सभी एक साथ जुड़ गए हैं। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि स्कूल में वास्तव में क्या पढ़ाया जा रहा था, आरोप कितने सही थे और हिंसा की जिम्मेदारी किसकी थी। लेकिन इतना तय है कि तेलंगाना का यह मामला आने वाले दिनों में भाषा और शिक्षा को लेकर राष्ट्रीय बहस का हिस्सा बन सकता है।