चीनी की बढ़ती कीमतों पर केंद्र सरकार को घेरते अरविंद केजरीवाल | Source: Chrome

चीनी की बढ़ती कीमतों पर केंद्र सरकार को घेरते अरविंद केजरीवालSource : Chrome

देश में चीनी की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी को लेकर सियासत तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने बढ़ते दाम को लेकर केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि एथनॉल उत्पादन बढ़ाने की नीति के चलते चीनी की उपलब्धता प्रभावित हुई और अब महंगी चीनी का आयात करना पड़ सकता है।

केजरीवाल ने सरकार पर क्या कहा?

अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए। उन्होंने सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि किसी को यह पता नहीं है कि एक फैसले का आगे क्या असर होगा।केजरीवाल ने दावा किया कि पेट्रोलियम आयात पर खर्च होने वाली विदेशी मुद्रा बचाने के लिए गन्ने से एथनॉल बनाने पर जोर दिया गया। उनके मुताबिक, इसका असर चीनी के उत्पादन और उपलब्धता पर पड़ा और अब जरूरत पूरी करने के लिए विदेश से चीनी मंगानी पड़ सकती है।

17 दिनों में चीनी के दाम में बड़ा उछाल

आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त की शुरुआत से चीनी की कीमतों में तेजी देखी गई है। 31 जुलाई को थोक बाजार में चीनी का भाव करीब 44 रुपये प्रति किलो था, जबकि इसके बाद कीमत लगातार बढ़ती गई।2 अगस्त तक थोक कीमत करीब 49 रुपये और 6 अगस्त को 54 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई। 20 अगस्त को थोक बाजार में भाव बढ़कर करीब 60 रुपये प्रति किलो बताया गया है। वहीं खुदरा बाजार में कीमत करीब 65 रुपये प्रति किलो तक पहुंचने की बात कही गई है।

मिल कीमत भी रिकॉर्ड स्तर पर

चीनी की औसत मिल कीमत भी रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई है। रिपोर्ट के मुताबिक देशभर में औसत मिल कीमत 5,400 से 5,500 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास पहुंच गई है।एक साल पहले यही कीमत करीब 3,900 रुपये प्रति क्विंटल थी। यानी पिछले एक साल में चीनी की मिल कीमत में काफी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

खुदरा कीमत में भी तेजी

उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, चीनी की औसत खुदरा कीमत में भी सालाना आधार पर बढ़ोतरी हुई है। 18 अगस्त को औसत खुदरा भाव करीब 52.3 रुपये प्रति किलो बताया गया, जबकि एक साल पहले यह करीब 46.34 रुपये प्रति किलो था।देश में चीनी की सालाना घरेलू खपत करीब 280 लाख टन है। ऐसे में कीमतों में लगातार बढ़ोतरी का असर सीधे आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ सकता है।

नए सीजन में स्टॉक को लेकर चिंता

आने वाले 2026-27 चीनी सीजन को लेकर भी शुरुआती स्टॉक पर सवाल उठ रहे हैं। अनुमान है कि नए सीजन की शुरुआत में उपलब्ध स्टॉक घरेलू जरूरत के अनुमानित 50 लाख टन से कम रह सकता है।हालांकि, सरकार ने अभी इस आंकड़े को अंतिम रूप नहीं दिया है। उद्योग से जुड़े अनुमानों में भी अंतर है। कुछ लोगों के मुताबिक पुराना स्टॉक करीब 40-42 लाख टन हो सकता है, जबकि कुछ शोधकर्ताओं का अनुमान इससे कम, करीब 32-35 लाख टन का है।

महंगाई के बीच बढ़ी राजनीतिक बहस

चीनी के दाम में तेजी ऐसे समय में हुई है जब महंगाई को लेकर विपक्ष लगातार सरकार पर सवाल उठा रहा है। केजरीवाल ने चीनी की कीमतों को एथनॉल नीति से जोड़ते हुए केंद्र पर हमला बोला है। अब आने वाले दिनों में सरकार की ओर से इस आरोप पर क्या जवाब दिया जाता है, इस पर नजर रहेगी।