नई दिल्ली। देश में पिछले कुछ दिनों से तेजी से बढ़ रही चीनी की कीमतों को लेकर आम लोगों के लिए राहत की खबर सामने आई है। केंद्र सरकार की ओर से उठाए गए दो अहम कदमों के बाद चीनी की एक्स-मिल कीमत में करीब 18 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। जिस चीनी की एक्स-मिल कीमत कुछ समय पहले 67 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई थी, वह अब घटकर करीब 55 रुपये प्रति किलो रह गई है।
अचानक क्यों महंगी हो गई थी चीनी?
चीनी की कीमतों में यह तेजी पिछले करीब 15 दिनों के दौरान देखने को मिली। इस अवधि में चीनी की एक्स-मिल कीमत तेजी से बढ़ते हुए 67 रुपये प्रति किलोग्राम के रिकॉर्ड ऊंचे स्तर तक पहुंच गई थी। कीमतों में इस अचानक उछाल का असर धीरे-धीरे थोक और खुदरा बाजार पर भी पड़ने लगा था।
खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा ने पीटीआई को बताया कि चीनी की कीमतों में अचानक आई तेजी के पीछे मुख्य वजह चीनी मिलों की ओर से दरों में मनमाने तरीके से बढ़ोतरी करना थी। मिलों की कीमत बढ़ने के कारण बाजार में चीनी की लागत बढ़ी और इसका असर आगे की आपूर्ति श्रृंखला पर भी दिखाई देने लगा।
कीमत बढ़ते ही सरकार ने उठाए दो बड़े कदम
चीनी की कीमत 67 रुपये प्रति किलो के स्तर तक पहुंचने के बाद केंद्र सरकार ने बाजार की स्थिति को नियंत्रित करने के लिए दो महत्वपूर्ण कदम उठाए। पहला कदम चीनी के आयात को मंजूरी देने का था। सरकार के इस निर्णय से विदेशी बाजार से चीनी की आपूर्ति का रास्ता खुला और घरेलू बाजार में संभावित कमी की आशंका को कम करने की कोशिश की गई।
दूसरा बड़ा कदम चीनी की जमाखोरी और सट्टेबाजी पर सख्ती से निगरानी रखने का रहा। सरकार ने अवैध स्टॉक करने और मुनाफाखोरी की कोशिशों पर रोक लगाने के लिए निगरानी और पाबंदियां लागू कीं। इससे बाजार में कृत्रिम तरीके से कीमत बढ़ाने की कोशिशों पर लगाम लगाने का प्रयास किया गया।
67 रुपये से 55 रुपये किलो पहुंची एक्स-मिल कीमत
सरकार के फैसलों के बाद चीनी बाजार में इसका असर तेजी से दिखाई देने लगा। चीनी मिलों की एक्स-मिल कीमत 67 रुपये प्रति किलोग्राम से घटकर अब करीब 55 रुपये प्रति किलो हो गई है। यानी थोड़े समय में कीमत में करीब 12 रुपये प्रति किलो की कमी आई है।
एक्स-मिल कीमत वह दर होती है जिस पर चीनी मिलें अपने उत्पाद को थोक कारोबारियों को बेचती हैं। इसलिए इस स्तर पर कीमत में कमी आने का असर आगे थोक और खुदरा बाजार में भी दिखाई दे सकता है।
आने वाले दिनों में और सस्ती हो सकती है चीनी
खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा ने संकेत दिया है कि आने वाले दिनों में चीनी की कीमतों में और गिरावट देखने को मिल सकती है। सरकार की ओर से चीनी आयात की अनुमति दिए जाने के बाद बाजार में अतिरिक्त आपूर्ति पहुंचने की उम्मीद है।
इसके साथ ही घरेलू बाजार में आपूर्ति की स्थिति सामान्य होने और आयातित चीनी के उपलब्ध होने से कीमतों पर दबाव कम हो सकता है। इससे एक्स-मिल कीमत में आगे भी नरमी आने की संभावना जताई गई है।
खुदरा बाजार में कब दिखेगी राहत?
चीनी की एक्स-मिल कीमत में गिरावट के बाद अब उपभोक्ताओं की नजर खुदरा बाजार पर है। आम तौर पर कारखाने से निकलने वाली कीमत में कमी का असर थोक बाजार और उसके बाद खुदरा दुकानों पर दिखाई देता है। हालांकि, एक्स-मिल कीमत और खुदरा कीमत के बीच परिवहन, थोक मार्जिन और अन्य लागतें भी शामिल होती हैं।
ऐसे में 55 रुपये प्रति किलो की मौजूदा एक्स-मिल कीमत का पूरा असर खुदरा बाजार में तुरंत दिखाई देना जरूरी नहीं है। लेकिन यदि चीनी की आपूर्ति सामान्य रहती है और कीमतों में गिरावट का मौजूदा रुझान जारी रहता है, तो आने वाले दिनों में खुदरा ग्राहकों को भी राहत मिल सकती है।
सरकार के फैसलों से बाजार में क्या बदला?
चीनी की कीमतों में आई तेज गिरावट से यह स्पष्ट है कि आयात को मंजूरी देने और जमाखोरी पर निगरानी बढ़ाने के फैसलों का बाजार पर असर पड़ा है। 67 रुपये प्रति किलो के स्तर से 55 रुपये प्रति किलो तक पहुंची एक्स-मिल कीमत ने चीनी बाजार में कुछ ही समय में बड़ा बदलाव दिखाया है।
सरकार का उद्देश्य घरेलू बाजार में पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखना और कीमतों में असामान्य तेजी को नियंत्रित करना है। आयात के जरिए उपलब्धता बढ़ाने और अवैध स्टॉक पर कार्रवाई की निगरानी से बाजार में संतुलन बनाए रखने की कोशिश की जा रही है।
आम लोगों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह गिरावट?
चीनी देश के रोजमर्रा के इस्तेमाल वाले प्रमुख खाद्य उत्पादों में शामिल है। इसकी कीमत बढ़ने का असर घरेलू बजट के साथ-साथ मिठाई, पेय पदार्थ और चीनी का इस्तेमाल करने वाले कई कारोबारों पर भी पड़ सकता है। ऐसे में एक्स-मिल कीमत में 67 रुपये से 55 रुपये प्रति किलो की गिरावट बाजार के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
