बिजनेस डेस्क। हाल के दिनों में गिरावट के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में हल्की रिकवरी जरूर दर्ज की गई है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल सोना जल्द ही अपने रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंचता नहीं दिख रहा है। अंतरराष्ट्रीय रिसर्च एजेंसी Fitch Solutions की रिसर्च इकाई BMI ने अपनी ताजा रिपोर्ट में वर्ष 2026 के लिए सोने के औसत मूल्य अनुमान को पहले की तुलना में कम कर दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, बाजार की मौजूदा परिस्थितियां सोने में सीमित बढ़त की ओर इशारा कर रही हैं।
2026 के लिए घटाया गया औसत मूल्य अनुमान
BMI की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2026 के लिए सोने के औसत भाव का अनुमान 4,600 डॉलर प्रति औंस से घटाकर 4,400 डॉलर प्रति औंस कर दिया गया है। एजेंसी का मानना है कि आने वाले समय में सोने की कीमतों में कुछ उतार-चढ़ाव जरूर देखने को मिल सकता है, लेकिन जनवरी 2026 में बने उच्च स्तर तक कीमतों का पहुंचना फिलहाल आसान नहीं होगा।
वर्तमान में अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना लगभग 4,026 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रहा है। ऐसे में रिपोर्ट के अनुसार मौजूदा स्तर से कीमतों में सीमित बढ़ोतरी की संभावना ही दिखाई दे रही है।
मजबूत अमेरिकी डॉलर बना प्रमुख कारण
रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिकी डॉलर की मजबूती सोने की कीमतों पर सबसे बड़ा दबाव बना सकती है। जब डॉलर मजबूत होता है, तब अन्य देशों के निवेशकों के लिए सोना अपेक्षाकृत महंगा हो जाता है। इसका सीधा असर मांग पर पड़ता है और कीमतों में तेजी की संभावना कमजोर हो जाती है।
BMI का अनुमान है कि यदि डॉलर इंडेक्स 105 से 110 के दायरे तक पहुंचता है, तो सोने की कीमतों में तेजी आने की संभावना और कम हो सकती है।
ब्याज दरों की दिशा भी करेगी बाजार तय
विशेषज्ञों के अनुसार, सोना ऐसा निवेश है जिस पर निवेशकों को ब्याज या डिविडेंड नहीं मिलता। ऐसे में यदि अमेरिकी केंद्रीय बैंक Federal Reserve ब्याज दरों में कटौती नहीं करता और दरें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो निवेशकों का झुकाव बॉन्ड जैसे बेहतर रिटर्न देने वाले निवेश विकल्पों की ओर बढ़ सकता है।
इस स्थिति में सोने की मांग प्रभावित हो सकती है और कीमतों पर दबाव बना रह सकता है।
वैश्विक आर्थिक सुधार से बदला निवेशकों का रुख
BMI की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों में सुधार और भू-राजनीतिक तनाव में कमी से निवेशकों का विश्वास मजबूत हुआ है। ऐसे माहौल में निवेशक सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने की बजाय शेयर बाजार और अन्य जोखिम वाले निवेश विकल्पों की ओर अधिक आकर्षित हो सकते हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2026 में वैश्विक आर्थिक वृद्धि दर 2.4 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है। यह संकेत देता है कि आर्थिक गतिविधियों में सुधार निवेशकों की प्राथमिकताओं को प्रभावित कर सकता है।
क्या आगे और सस्ता हो सकता है सोना?
BMI का कहना है कि आने वाले समय में सोने की कीमतों पर दबाव बना रह सकता है, लेकिन फिलहाल बड़ी गिरावट की संभावना सीमित दिखाई देती है। इसकी प्रमुख वजह यह है कि दुनिया के कई केंद्रीय बैंक लगातार अपने स्वर्ण भंडार में बढ़ोतरी कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि केंद्रीय बैंकों की ओर से सोने की लगातार खरीद कीमतों को एक मजबूत आधार प्रदान कर सकती है। यही कारण है कि बाजार में कमजोरी के बावजूद सोने में बहुत बड़ी गिरावट की संभावना फिलहाल कम मानी जा रही है।
निवेशकों के लिए क्या संकेत हैं?
रिपोर्ट से संकेत मिलता है कि निकट भविष्य में सोने की कीमतों में रिकॉर्ड तेजी की संभावना सीमित रह सकती है। मजबूत डॉलर, ऊंची ब्याज दरें और बेहतर वैश्विक आर्थिक माहौल जैसी परिस्थितियां सोने की चाल को प्रभावित कर सकती हैं। हालांकि, केंद्रीय बैंकों की लगातार खरीदारी कीमतों को सहारा देती रहेगी, जिससे बड़ी गिरावट की आशंका फिलहाल कम नजर आती है। निवेशकों के लिए बाजार की वैश्विक परिस्थितियों और आर्थिक संकेतकों पर नजर बनाए रखना महत्वपूर्ण होगा।
