rere | Source: rererनई दिल्ली। सोने की कीमतों में हालिया तेजी पर भले ही कुछ समय के लिए ब्रेक लगा हो, लेकिन बाजार के जानकारों का मानना है कि सोने का दीर्घकालिक तेजी वाला दौर अभी खत्म नहीं हुआ है। गोल्डमैन सैक्स से जुड़े वरिष्ठ एक्सपर्ट टोनी किम के मुताबिक, आने वाले समय में सोने की कीमत एक बार फिर नया रिकॉर्ड स्तर बना सकती है। उनके अनुसार फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति को लेकर अनिश्चितता और अमेरिका-ईरान संघर्ष जैसी परिस्थितियों ने फिलहाल सोने की मांग पर असर डाला है, लेकिन लंबी अवधि में इसके लिए तस्वीर अभी भी सकारात्मक बनी हुई है।

4,000 डॉलर के आसपास बन सकता है खरीदारी का मौका

टोनी किम का मानना है कि यदि सोने की कीमत करीब 4,000 डॉलर प्रति औंस, यानी लगभग 1,34,000 रुपये के आसपास आती है, तो निवेशकों के लिए इसमें दांव लगाने का अवसर बन सकता है। हालांकि, मौजूदा समय में अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत करीब 4,479 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर बनी हुई है।

किम के मुताबिक, बाजार में मौजूद अनिश्चितताएं कम होने के बाद सोने की कीमतों में दोबारा तेजी देखने को मिल सकती है और यह नए रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच सकता है।

सोने की तेजी क्यों हुई धीमी?

जनवरी में उच्चतम स्तर पर पहुंचने के बाद से सोने की कीमतों में गिरावट का दौर देखने को मिला है। इसके पीछे कई वैश्विक आर्थिक और भू-राजनीतिक परिस्थितियां बताई जा रही हैं। फेडरल रिजर्व की नीतियों और महंगाई को लेकर बाजार में बनी अनिश्चितता ने भी निवेशकों के रुख को प्रभावित किया है।

इसके अलावा युद्ध की वजह से तेल की कीमतों में हुई तेज वृद्धि का असर कृषि से लेकर धातु बाजार तक देखने को मिला है। ऐसे माहौल में निवेशकों के बीच सुरक्षित निवेश के विकल्पों को लेकर भी रणनीति में बदलाव आया है।

1 सितंबर को सोने में आई थी बड़ी गिरावट

अंतरराष्ट्रीय बाजार में 1 सितंबर को सोने की कीमत में करीब 2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी। उस समय अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड और डॉलर में बढ़ोतरी देखने को मिली थी। वहीं, स्पॉट गोल्ड की कीमत में करीब 2.4 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 4,242.20 डॉलर के स्तर पर पहुंच गया था।

अमेरिका से जारी रोजगार संबंधी आंकड़ों ने भी सोने की कीमतों को प्रभावित किया। मौजूदा परिस्थितियों में बाजार में फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर भी उम्मीदें और आशंकाएं बनी हुई हैं।

केंद्रीय बैंकों की सोने में बढ़ती दिलचस्पी

टोनी किम के मुताबिक, सोने की लंबी अवधि की कहानी को समझने के लिए दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों की खरीदारी पर ध्यान देना जरूरी है। उनके अनुसार वर्ष 2022 सोने के बाजार के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ।

रूस-यूक्रेन युद्ध और रूस के केंद्रीय बैंक के रिजर्व को सीज किए जाने के बाद दुनिया के कई केंद्रीय बैंकों की ओर से सोने की खरीदारी में तेजी आई। इससे सोने की मांग की संरचना में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिला।

400-500 टन से बढ़कर 1,000-1,100 टन पहुंची खरीदारी

किम के अनुसार, रूस-यूक्रेन युद्ध से पहले दुनिया भर के केंद्रीय बैंक सालाना करीब 400 से 500 टन सोना खरीद रहे थे। अब यह खरीदारी बढ़कर लगभग 1,000 से 1,100 टन तक पहुंच गई है।

दूसरी ओर, सोने की खदानों से हर साल करीब 3,500 टन सोना निकलता है। इस हिसाब से वैश्विक स्तर पर हर साल खनन से निकलने वाले सोने का लगभग एक-तिहाई हिस्सा केंद्रीय बैंकों की खरीदारी में जा रहा है। यही वजह है कि किम लंबी अवधि में सोने की मांग को मजबूत मान रहे हैं।

क्या चांदी भी दे सकती है बड़ा रिटर्न?

सोने के साथ-साथ चांदी की कीमतों को लेकर भी टोनी किम ने अपनी राय रखी है। हालांकि, उन्होंने चांदी के बाजार में निवेश को लेकर सावधानी बरतने की बात कही है। उनके अनुसार चांदी का बाजार सोने की तुलना में काफी छोटा है, इसलिए इसमें कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

किम के मुताबिक, चांदी की कीमत 50 से 80 डॉलर के दायरे तक जा सकती है और आगे चलकर 100 डॉलर के स्तर को भी छू सकती है। हालांकि, यह काफी हद तक खुदरा मांग, भौतिक चांदी की मांग और निवेश मांग पर निर्भर करेगा।

निवेशकों के लिए क्या संकेत?

सोने की मौजूदा स्थिति से यह संकेत मिलता है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में अल्पकालिक उतार-चढ़ाव के बावजूद इसकी दीर्घकालिक मांग को लेकर कुछ विशेषज्ञ सकारात्मक बने हुए हैं। खासतौर पर केंद्रीय बैंकों की ओर से लगातार बढ़ती सोने की खरीदारी को बाजार के लिए महत्वपूर्ण कारक माना जा रहा है।

हालांकि, सोने और चांदी की कीमतें वैश्विक ब्याज दरों, डॉलर, महंगाई, भू-राजनीतिक घटनाओं और निवेश मांग जैसे कई कारकों से प्रभावित होती हैं। इसलिए किसी भी निवेश निर्णय से पहले बाजार की परिस्थितियों और जोखिम को ध्यान में रखना जरूरी है।

कुल मिलाकर, सोने की मौजूदा रफ्तार धीमी जरूर हुई है, लेकिन टोनी किम के अनुमान के मुताबिक इसकी तेजी की संभावनाएं पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं। यदि वैश्विक अनिश्चितताएं कम होती हैं और केंद्रीय बैंकों की खरीदारी मजबूत बनी रहती है, तो आने वाले समय में सोने के फिर से रिकॉर्ड स्तर की ओर बढ़ने की संभावना पर बाजार की नजर बनी रहेगी।