ज़की अख़्तर:

उत्तराखंड के बहुचर्चित एससी-एसटी छात्रवृत्ति घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ताजा कार्रवाई ने एक बार फिर पुराने मामले को सुर्खियों में ला दिया है। जांच एजेंसी ने लगभग 13.83 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया है। ये संपत्तियां मेरठ और उत्तराखंड के उन शिक्षण संस्थानों से जुड़ी बताई जा रही हैं, जिनका नाम वर्षों से छात्रवृत्ति घोटाले की जांच में सामने आता रहा है। मामला इसलिए भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो गया है क्योंकि इन संस्थानों का संबंध भाजपा एमएलसी धर्मेंद्र भारद्वाज और उनके परिवार से जोड़ा जा रहा है। हालांकि धर्मेंद्र भारद्वाज ने साफ कहा है कि इन संस्थानों से उनका कोई संबंध नहीं है और उनका नाम बेवजह इस मामले में घसीटा जा रहा है।ED का एक्शन, करोड़ों की संपत्ति कुर्क | फोटो: ABP

ED का एक्शन, करोड़ों की संपत्ति कुर्क | फोटो: ABP

छात्रवृत्ति योजना गरीब छात्रों के लिए थी, जांच में सामने आया बड़ा खेल

यह मामला वर्ष 2011-12 से 2016-17 के बीच अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के छात्रों के लिए चलाई गई पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना से जुड़ा है। इस योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए सहायता देना था। लेकिन जांच एजेंसियों का आरोप है कि कुछ निजी शिक्षण संस्थानों ने इस योजना का गलत फायदा उठाया। ईडी के अनुसार हजारों ऐसे छात्रों के नाम पर छात्रवृत्ति के दावे किए गए जो या तो कॉलेज में पढ़ते ही नहीं थे, परीक्षा में शामिल नहीं हुए थे, विश्वविद्यालय में पंजीकृत नहीं थे या फिर रिकॉर्ड में उनका कोई अस्तित्व ही नहीं था। आरोप है कि सरकारी धन छात्रों तक पहुंचने के बजाय संस्थानों और उनसे जुड़े नेटवर्क के माध्यम से दूसरी जगहों पर पहुंचाया गया।

6,208 दावे, 2,895 फर्जी पाए गए

जांच के दौरान सामने आया कि संबंधित संस्थानों ने कुल 6,208 छात्रवृत्ति दावे प्रस्तुत किए थे, जिनके आधार पर करीब 27.98 करोड़ रुपये की राशि जारी हुई। इनमें से लगभग 19.74 करोड़ रुपये सीधे संस्थानों के खातों में पहुंचे, जबकि 8.24 करोड़ रुपये छात्रों के नाम पर खोले गए बैंक खातों में जमा किए गए। ईडी की जांच में 2,895 दावे फर्जी पाए गए। इनमें अनुपस्थित छात्र, परीक्षा में असफल छात्र, विश्वविद्यालय में पंजीकृत न होने वाले छात्र, गैर-संबद्ध पाठ्यक्रमों के विद्यार्थी और डुप्लीकेट नाम शामिल थे। एजेंसी का दावा है कि छात्रवृत्ति की राशि को विभिन्न खातों के माध्यम से घुमाकर उसकी वास्तविक उत्पत्ति छिपाने की कोशिश की गई और बाद में उसका इस्तेमाल संपत्तियां खरीदने तथा अन्य निवेशों में किया गया।

मेरठ से हरिद्वार तक फैला नेटवर्क, कई संस्थान जांच के घेरे में

ईडी की कार्रवाई में मेरठ स्थित महावीर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, रुड़की स्थित आरआईएमएस (RIMS) और मदरहुड इंस्टीट्यूट से जुड़ी संपत्तियां शामिल हैं। जांच एजेंसी का कहना है कि इन संस्थानों और उनसे जुड़ी सोसायटियों एवं ट्रस्टों के माध्यम से छात्रवृत्ति राशि का दुरुपयोग किया गया। कुर्क की गई संपत्तियों में भूमि, संस्थागत भवन, बैंक जमा और अन्य परिसंपत्तियां शामिल हैं। जांच में मनिका शर्मा की भूमिका भी सामने आई है, जिन पर छात्रवृत्ति राशि के प्राप्ति, उपयोग और ट्रांसफर से जुड़े फैसलों में प्रभावी भूमिका निभाने का आरोप है। ईडी का कहना है कि कई मामलों में छात्रों के नाम पर बैंक खाते खोले गए, लेकिन उनका नियंत्रण कॉलेज प्रबंधन और कर्मचारियों के पास था।

धर्मेंद्र भारद्वाज का नाम क्यों चर्चा में है?

धर्मेंद्र भारद्वाज भाजपा के प्रभावशाली एमएलसी हैं और मेरठ-गाजियाबाद स्थानीय प्राधिकारी सीट से निर्वाचित हुए हैं। उनका नाम लंबे समय से शिक्षा क्षेत्र से जुड़ा रहा है और विभिन्न शिक्षण संस्थानों में उनकी भूमिका को लेकर चर्चा होती रही है। हालांकि इस मामले में उन्होंने खुद को पूरी तरह अलग बताते हुए कहा है कि जिन संस्थानों पर कार्रवाई हुई है, उनमें उनका कोई पद, सदस्यता या आर्थिक हित नहीं है। उनका दावा है कि राजनीतिक कारणों से उनका नाम इस मामले से जोड़ा जा रहा है। दूसरी ओर जांच एजेंसियां वित्तीय लेन-देन, संस्थागत संरचना और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की पड़ताल कर रही हैं।

सिर्फ छात्रवृत्ति घोटाला नहीं, शिक्षा व्यवस्था पर भी बड़ा सवाल

यह मामला केवल आर्थिक अनियमितता तक सीमित नहीं है। यह उन योजनाओं की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़ा करता है, जिन्हें समाज के सबसे कमजोर वर्गों के छात्रों की मदद के लिए बनाया गया था। यदि जांच में लगे आरोप सही साबित होते हैं, तो इसका मतलब होगा कि हजारों जरूरतमंद छात्रों के नाम पर जारी सरकारी धन का इस्तेमाल दूसरे उद्देश्यों के लिए किया गया। यही कारण है कि ईडी की कार्रवाई को इस घोटाले में अब तक की सबसे महत्वपूर्ण कार्रवाइयों में से एक माना जा रहा है। जांच अभी जारी है और एजेंसी ने संकेत दिए हैं कि आने वाले समय में और भी लोगों तथा संस्थाओं की भूमिका की जांच की जा सकती है।