री-NEET परीक्षा को लेकर एक बार फिर बड़ा विवाद सामने आया है। बिहार के लखीसराय से शुरू हुई जांच में एक ऐसे कथित सॉल्वर गैंग का खुलासा हुआ है, जिसने परीक्षा प्रणाली में सेंध लगाकर असली अभ्यर्थियों की जगह दूसरे छात्रों को परीक्षा में बैठाने का नेटवर्क तैयार कर रखा था। जांच एजेंसियों के अनुसार, इस पूरे खेल में बायोमेट्रिक सत्यापन प्रक्रिया का कथित दुरुपयोग किया गया और मेडिकल सहित अन्य प्रोफेशनल कोर्सों के मेधावी छात्रों को अभ्यर्थियों की जगह परीक्षा केंद्रों पर बैठाया गया।
मामले ने उस समय नया मोड़ लिया जब बिहार पुलिस मुख्यालय और NTA को एक गुप्त ईमेल प्राप्त हुआ। इसके बाद शुरू हुई जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। पुलिस का दावा है कि इस नेटवर्क में मेडिकल कॉलेजों के छात्र, बिचौलिए और बायोमेट्रिक प्रक्रिया से जुड़े कुछ लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
बायोमेट्रिक प्रक्रिया में कथित हेरफेर
जांच के मुताबिक, री-NEET परीक्षा के लिए बायोमेट्रिक सत्यापन की जिम्मेदारी एक एजेंसी को सौंपी गई थी, जिसने आगे यह कार्य दूसरी कंपनी को दिया। आरोप है कि परीक्षा से पहले कुछ सुपरवाइजरों को प्रभाव में लेकर असली अभ्यर्थियों का बायोमेट्रिक परीक्षा केंद्र से बाहर लिया गया, जबकि अंदर प्रवेश करने वाले स्कॉलर्स का अलग बायोमेट्रिक दर्ज किया गया।
जांच एजेंसियों का दावा है कि पहचान छिपाने के लिए बायोमेट्रिक लेने के बाद अंगूठे के निशानों के साथ भी छेड़छाड़ की गई। फिलहाल इन आरोपों की विस्तृत जांच जारी है।
गुप्त ईमेल से खुला पूरा खेल
21 जून को दोपहर के समय बिहार पुलिस मुख्यालय और NTA को एक गुप्त ईमेल प्राप्त हुआ, जिसमें दावा किया गया कि एक अभ्यर्थी की जगह दूसरी छात्रा परीक्षा दे रही है। इसी सूचना के आधार पर जांच आगे बढ़ी और कथित सॉल्वर गैंग का नेटवर्क सामने आने लगा।
जांच में पुलिस ने एक मेडिकल छात्र को मुख्य सेटर के रूप में चिन्हित किया है। पूछताछ के दौरान उसकी पहचान और गतिविधियों को लेकर कई अहम जानकारियां सामने आई हैं। जांच एजेंसियां अब उसके संपर्कों और पूरे नेटवर्क की पड़ताल कर रही हैं।
60 लाख रुपये तक की होती थी डील
पुलिस जांच में यह भी दावा किया गया है कि गैंग एक अभ्यर्थी को परीक्षा में सफल कराने के लिए 60 लाख रुपये तक की डील करता था। आरोप है कि इस रकम को नेटवर्क में शामिल विभिन्न लोगों के बीच बांटा जाता था। जांच एजेंसियां वित्तीय लेन-देन और बैंक रिकॉर्ड की भी जांच कर रही हैं।
कई मेडिकल और प्रोफेशनल छात्रों के नाम सामने आए
जांच के दौरान कई ऐसे छात्रों के नाम सामने आए हैं, जो MBBS, BSc Nursing, BAMS और अन्य प्रोफेशनल कोर्सों से जुड़े बताए जा रहे हैं। आरोप है कि इन्हें असली अभ्यर्थियों की जगह परीक्षा में बैठाया गया था। हालांकि मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
जांच जारी, और खुलासों की संभावना
फिलहाल पुलिस, NTA और अन्य जांच एजेंसियां पूरे नेटवर्क की तह तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं। बायोमेट्रिक रिकॉर्ड, डिजिटल साक्ष्य, कॉल डिटेल और वित्तीय लेन-देन की जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।
