
चंपत राय और अनिल मिश्रा की भूमिका।Source : Social media
अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े विवाद के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के दो प्रमुख नाम चंपत राय और अनिल मिश्रा लगातार चर्चा में हैं। सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में दोनों को लेकर कई तरह की बातें कही जा रही हैं। ऐसे में लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि आखिर ये दोनों कौन हैं, राम मंदिर आंदोलन और ट्रस्ट में इनकी क्या भूमिका रही है और हालिया विवाद में इनके नाम क्यों सामने आए।
कौन हैं चंपत राय?
चंपत राय उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के रहने वाले हैं। उनका जन्म वर्ष 1946 में हुआ था। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने कुछ समय तक प्रोफेसर के रूप में काम किया। बाद में उन्होंने नौकरी छोड़कर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और विश्व हिंदू परिषद (VHP) के साथ काम करना शुरू किया। कई वर्षों तक संगठन में सक्रिय रहने के बाद उन्हें श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का महासचिव बनाया गया। राम मंदिर आंदोलन और मंदिर निर्माण से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्यों में उनकी अहम भूमिका रही है।
चंपत बंसल नाम क्यों हो रहा है चर्चा में?
हाल के दिनों में सोशल Media पर कई लोग चंपत राय को चंपत बंसल कहकर संबोधित कर रहे हैं। दरअसल, उनका पूरा नाम चंपत राय बंसल बताया जाता है। संघ की परंपरा के अनुसार कई स्वयंसेवक अपने नाम के साथ जातिसूचक उपनाम का इस्तेमाल नहीं करते। इसी कारण उन्होंने भी अपने नाम से बंसल हटाकर केवल चंपत राय नाम रखना शुरू कर दिया। यही वजह है कि अब विवाद के बीच उनका पुराना नाम फिर चर्चा में आ गया है।
कौन हैं अनिल मिश्रा?
डॉ. अनिल मिश्रा भी श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के प्रमुख सदस्यों में शामिल हैं। वह लंबे समय से राम मंदिर आंदोलन से जुड़े रहे हैं और ट्रस्ट के प्रशासनिक कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं। मंदिर निर्माण से जुड़े कई फैसलों और व्यवस्थाओं में उनकी जिम्मेदारी रही है। इसी कारण हालिया विवाद में उनका नाम भी चर्चा में आया।
विवाद में दोनों के नाम क्यों आए?
राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े कथित विवाद के बाद ट्रस्ट के कुछ पदाधिकारियों को लेकर सवाल उठाए गए। विपक्ष ने इस मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की और चंपत राय तथा अनिल मिश्रा के नाम भी चर्चा में आए। दूसरी ओर, ट्रस्ट से जुड़े लोगों का कहना है कि पूरे मामले की जांच चल रही है और जांच पूरी होने से पहले किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।
समर्थक और विरोधी क्या कह रहे हैं?
चंपत राय और अनिल मिश्रा को लेकर लोगों की राय अलग-अलग है। एक पक्ष दोनों की भूमिका पर सवाल उठा रहा है, जबकि दूसरा पक्ष उनका बचाव कर रहा है। समर्थकों का कहना है कि चंपत राय ने सादा जीवन जिया है और अपना अधिकांश समय संगठन तथा राम मंदिर आंदोलन को समर्पित किया है। वहीं, विरोधियों का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि सभी तथ्य सामने आ सकें।
जांच पूरी होने का इंतजार
फिलहाल यह मामला जांच के दायरे में है। संबंधित एजेंसियां पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही हैं। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इस मामले में आगे क्या कार्रवाई होगी। ऐसे में चंपत राय और अनिल मिश्रा से जुड़े सभी दावों और आरोपों पर अंतिम स्थिति आधिकारिक जांच के बाद ही सामने आएगी।
