
राम मंदिर दान चोरी मामले में SIT जांच और मुख्य आरोपी अविनाश शुक्ला।Source : Chrome
अयोध्या के राम मंदिर में कथित दान चोरी मामले की जांच में अब बड़ा खुलासा सामने आया है। विशेष जांच दल (SIT) ने अपनी रिपोर्ट में अविनाश शुक्ला को इस पूरे मामले का मुख्य आरोपी बताया है। रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 40 दिनों के भीतर दान राशि की लगभग 70 बार चोरी की गई। जांच एजेंसी का कहना है कि सीसीटीवी फुटेज, बरामद सामान, बैंक खातों और गवाहों के बयान के आधार पर आरोपियों की भूमिका सामने आई है।
SIT ने अविनाश शुक्ला को बताया मुख्य आरोपी
एसआईटी ने 23 जून को अपनी जांच रिपोर्ट एसीएस संजय प्रसाद को सौंपी थी। रिपोर्ट में अविनाश शुक्ला को दान चोरी का मुख्य आरोपी बताया गया है। जांच एजेंसी के अनुसार, मंदिर में दान की गिनती के दौरान हुई चोरी में उसकी अहम भूमिका सामने आई है।
अविनाश के बयान से सामने आए पांच अन्य आरोपी
जांच के दौरान अविनाश शुक्ला से मिली जानकारी के आधार पर पांच अन्य आरोपियों की पहचान की गई। एसआईटी का कहना है कि पूछताछ में मंदिर के दान गिनने की व्यवस्था में कई खामियां भी सामने आईं, जिनका फायदा उठाकर कथित तौर पर चोरी की जाती थी।
CCTV फुटेज में कैद हुई कथित चोरी
सीसीटीवी फुटेज में अविनाश शुक्ला कई बार दान की गिनती के दौरान नोटों के बंडल और खुले पैसे अलग करते हुए दिखाई दिया। जांच एजेंसी का कहना है कि फुटेज, गवाहों के बयान, रिकवरी और बैंक रिकॉर्ड के आधार पर उसके खिलाफ प्रथम दृष्टया पर्याप्त साक्ष्य मिले हैं।
अन्य आरोपी भी मदद करते दिखे
एसआईटी के अनुसार, सीसीटीवी में अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा और करुणेश पांडे कथित तौर पर अविनाश की मदद करते दिखाई दिए। वहीं मनीष कुमार यादव गिनती वाले कमरे के अंदर उसके साथ मौजूद था। जांच में यह भी सामने आया कि ट्रस्ट की ओर से उपलब्ध कराए गए फुटेज में रामाशंकर मिश्रा भी नकदी के बंडलों को संभालते और छिपाते हुए दिखाई दिए। जांच एजेंसी का कहना है कि अब तक मिले सबूतों से सभी छह आरोपियों की इस मामले में भूमिका सामने आई है।
तलाशी में नकदी, डॉलर, गहने और SUV बरामद
पुलिस की तलाशी के दौरान अविनाश शुक्ला के पास से 20.39 लाख रुपये नकद, 1,121 अमेरिकी डॉलर, सोने-चांदी के गहने, अन्य कीमती सामान और एक एसयूवी बरामद की गई। एसआईटी का कहना है कि इस मामले में अब तक किसी भी आरोपी से हुई यह सबसे बड़ी बरामदगी है, जिसे जांच में अहम सबूत माना गया है।
बैंक खातों की जांच से भी बढ़ा शक
जांच एजेंसी ने वित्तीय लेन-देन की भी जांच की। रिपोर्ट के अनुसार, दान गिनने वाले कर्मचारियों की मासिक सैलरी लगभग 20 हजार रुपये (कटौती के बाद करीब 15 हजार रुपये) थी, लेकिन अविनाश शुक्ला के बैंक खातों में सामान्य आय से कहीं अधिक वित्तीय गतिविधियां मिलीं। एसआईटी का मानना है कि इससे उसके खिलाफ संदेह और मजबूत हुआ है। अब इस मामले में अंतिम फैसला अदालत की सुनवाई के बाद ही होगा।
