rerer | Source: rerनई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र के दौरान लोकसभा में दिए गए एक बयान को लेकर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी एक नए विवाद में घिर गए हैं। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ सांसद अनुराग ठाकुर ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन और सदन की अवमानना का तीन पृष्ठों का नोटिस सौंपा है। नोटिस में आरोप लगाया गया है कि राहुल गांधी ने गृह मंत्री अमित शाह के संबंध में असंसदीय, अपमानजनक और आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया तथा गंभीर और निराधार आरोप लगाए। इस घटनाक्रम के बाद संसद के भीतर राजनीतिक माहौल और अधिक गर्म हो गया है।

लोकसभा अध्यक्ष से जांच और कार्रवाई की मांग

अनुराग ठाकुर ने अपने नोटिस में लोकसभा अध्यक्ष से पूरे मामले की विस्तृत जांच कराने का अनुरोध किया है। साथ ही उन्होंने मांग की है कि इस प्रकरण को आगे की कार्रवाई के लिए विशेषाधिकार समिति को भेजा जाए। नोटिस में यह भी कहा गया है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो राहुल गांधी को सदन और गृह मंत्री अमित शाह दोनों से बिना शर्त माफी मांगने का निर्देश दिया जाना चाहिए।

भाजपा सांसद का कहना है कि संसद की गरिमा बनाए रखना सभी सदस्यों की जिम्मेदारी है और सदन के भीतर ऐसी भाषा या आरोप स्वीकार नहीं किए जा सकते जो संसदीय परंपराओं के विपरीत हों।

29 जुलाई की लोकसभा कार्यवाही का किया गया उल्लेख

नोटिस में 29 जुलाई को लोकसभा में हुई कार्यवाही का विशेष रूप से उल्लेख किया गया है। उस दिन लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा चल रही थी। अनुराग ठाकुर का आरोप है कि इसी दौरान राहुल गांधी ने प्रदर्शनकारी छात्रों से हुई कथित बातचीत का हवाला देते हुए ऐसे शब्दों का इस्तेमाल किया, जो संसदीय मर्यादा के अनुरूप नहीं थे।

नोटिस के अनुसार, इस दौरान राहुल गांधी ने लोकसभा के नियम 352 का उल्लंघन किया। अनुराग ठाकुर का कहना है कि सदन में की गई टिप्पणी न केवल संसदीय गरिमा के विपरीत थी, बल्कि गृह मंत्री अमित शाह की व्यक्तिगत और आधिकारिक प्रतिष्ठा को भी प्रभावित करने वाली थी।

राहुल गांधी ने सदन में क्या कहा था?

29 जुलाई को एंटी पेपर लीक बिल पर चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने जंतर-मंतर पर एक महिला छात्र से हुई कथित बातचीत का उल्लेख किया था। उन्होंने किसी सांसद या व्यक्ति का नाम लिए बिना लोगों को तीन श्रेणियों—स्टूडेंट, इडियट और अंधभक्त—में विभाजित करते हुए अपनी बात रखी।

राहुल गांधी ने कहा था कि स्टूडेंट वह होता है जो खुले मन और विचारों के साथ सत्य की तलाश करता है। इडियट वह व्यक्ति है जो अहंकार में स्वयं को भगवान समझता है और किसी की बात नहीं सुनता। वहीं अंधभक्त वह व्यक्ति होता है जिसे पूरा विश्वास होता है कि वही इडियट भगवान है।

इस बयान पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने तत्काल आपत्ति जताई थी। इसके जवाब में राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि उन्होंने सदन के किसी सदस्य या किसी व्यक्ति का नाम लेकर यह टिप्पणी नहीं की, बल्कि केवल छात्रों द्वारा कही गई बात को साझा किया है।

भाजपा ने क्यों जताई आपत्ति?

भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर का आरोप है कि राहुल गांधी की टिप्पणी संसदीय मर्यादा और नियमों के अनुरूप नहीं थी। उनके अनुसार, इस प्रकार की भाषा से सदन की गरिमा प्रभावित होती है और इससे गृह मंत्री अमित शाह की प्रतिष्ठा पर भी प्रतिकूल असर पड़ता है।

नोटिस में कहा गया है कि संसद की कार्यवाही के दौरान प्रत्येक सदस्य को अपने शब्दों के चयन में संयम और संसदीय परंपराओं का पालन करना चाहिए। ऐसे मामलों में नियमों के अनुसार कार्रवाई होना आवश्यक है ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

क्या होता है विशेषाधिकार हनन?

विशेषाधिकार हनन वह स्थिति होती है जब संसद या किसी विधानमंडल के सदस्य अथवा सदन के अधिकारों, विशेषाधिकारों या गरिमा का उल्लंघन या अपमान किया जाता है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 105 के तहत संसद के सदस्यों तथा अनुच्छेद 194 के तहत राज्य विधानमंडलों के सदस्यों को विशेषाधिकार प्राप्त हैं।

इन विशेषाधिकारों का उद्देश्य जनप्रतिनिधियों को बिना किसी अनुचित दबाव या बाधा के अपने संसदीय दायित्वों का निर्वहन करने की स्वतंत्रता देना है।

किन मामलों में लगाया जा सकता है विशेषाधिकार हनन का आरोप?

विशेषाधिकार हनन के मामलों में सांसद या विधायक को उसके कर्तव्यों के निर्वहन से रोकना, सदन या उसके सदस्यों के विरुद्ध झूठे अथवा निराधार आरोप लगाना, सदन की अवमानना करना, सदन के आदेशों की अवहेलना करना या संसदीय कार्यवाही की गलत रिपोर्ट प्रकाशित करना जैसे मामले शामिल हो सकते हैं।

यदि किसी सदस्य को लगता है कि उसके विशेषाधिकारों का उल्लंघन हुआ है, तो वह लोकसभा अध्यक्ष या राज्यसभा के सभापति को विशेषाधिकार हनन का नोटिस देता है। यदि अध्यक्ष या सभापति प्रथम दृष्टया मामले को उचित मानते हैं, तो इसे जांच के लिए विशेषाधिकार समिति को भेजा जा सकता है।

विशेषाधिकार समिति की भूमिका क्या होती है?

विशेषाधिकार समिति मामले की जांच कर तथ्यों का परीक्षण करती है और अपनी रिपोर्ट सदन के समक्ष प्रस्तुत करती है। यदि समिति किसी व्यक्ति या सदस्य को दोषी मानती है और सदन उसकी सिफारिश स्वीकार कर लेता है, तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ चेतावनी, फटकार, निलंबन या नियमों के अनुरूप अन्य कार्रवाई की जा सकती है।