स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ दुनिया के लिए बहुत अहम जगह है।क्योंकि मध्य-पूर्व का ज़्यादातर तेल इसी रास्ते से दुनिया भर में जाता है। करीब 20% वैश्विक तेल सप्लाई यहीं से गुजरती है। इसलिए अगर यह रास्ता बंद हो जाए या रुकावट आ जाए, तो तेल की कीमतें तुरंत बढ़ जाती हैं, और पूरी दुनिया की ऊर्जा और व्यापार पर असर पड़ता है।
2026 में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने के कारण यह रास्ता कई बार बंद हुआ या इसका इस्तेमाल सीमित हुआ। इससे तेल बाजार में उथल-पुथल, जहाज़ चलाने वाली कंपनियों पर दबाव और सुरक्षा से जुड़े खतरे सामने आए।इसी वजह से अलग-अलग देशों के विदेश मंत्रियों ने अपनी बैठकों में सख्त संदेश दिया कि यह रास्ता अंतरराष्ट्रीय मार्ग है,इसे किसी भी हालत में बंद नहीं होना चाहिए, और इसके लिए राजनीतिक समाधान ज़रूरी है।
वॉशिंगटन-दिल्ली-जैपुर में व्यवस्थित संदेश
अमेरिका के विदेश सचिव मारको रुबियो ने स्पष्ट कहा है कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य को किसी भी हालत में खुला रहना चाहिए चाहे किसी समझौते के ज़रिए या अन्य किसी तरीके से। उन्होंने यह बयान भारत के जयपुर से रिपोर्टरों से बातचीत में दिया और कहा कि वार्ता की भाषा पर और काम करना बाकी है लेकिन मुख्य सिद्धांत यह है कि जलमार्ग खुला और सुरक्षित रहना चाहिए। रुबियो ने यह भी संकेत दिया कि संभवतः कुछ और दिन लग सकते हैं अगर दोनों पक्ष इससे जुड़ी किसी व्यापक डील पर सहमत होना चाहते हैं।
ईरान और होर्मुज़ का राजनीतिक संदर्भ
अमेरिका और ईरान बातचीत कर रहे हैं कि होर्मुज़ को युद्ध के बाद लगभग 30 दिन के भीतर फिर से खोल दिया जाए, जिसमें खदानें हटाई जाएँ और सभी देशों के जहाज़ सुरक्षित रूप से आवागमन कर सकें। ईरान के विदेश मंत्रालय की ओर से भी संकेत दिए गए हैं कि, उनके नजरिए में होर्मुज़ खुला हुआ है लेकिन यह खुलापन उन देशों पर निर्भर करेगा जिनके साथ तनाव है।
बैठक में निकला तनाव-भरा संदेश
विदेश मंत्रियों की बैठक में दिए गए संदेशों में सख़्त शब्दों के साथ यह संदेश स्पष्ट हुआ कि किसी भी तरह का अवरोध या बाधा चाहे टोल सिस्टम हो या अवैध रोक स्वीकार नहीं किया जाएगा। कई नेताओं ने यह वैश्विक अर्थव्यवस्था और समुद्री सुरक्षा के लिए जोखिम भरा बताया।यह बात विशेष रूप से तब और महत्त्व रखती है जब ईरान ने कुछ पलों पर इस मार्ग को लगभग बंद करने का संकेत दिया था, जिससे तेल के दामों में उठापटक और वैश्विक आपूर्तियों पर दबाव आया जिसे अन्य देशों के विदेश मंत्रियों ने गंभीर चिंता के रूप में देखा।
भारत और अन्य देशों की भागीदारी
भारत समेत कई देशों की नौकाएँ या जहाज़ होर्मुज़ से गुजरने का प्रयास कर रहे हैं भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार कुछ जहाज़ सुरक्षित तरीके से निकले हैं और कुछ अब भी इंतज़ार में हैं। इस मुद्दे पर भारत सरकार और विदेश मंत्री भी लगातार ईरान और अन्य देशों से बातचीत कर रहे हैं ताकि भारत के जहाज़ों और ऊर्जा मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
