दिल्ली में कांग्रेस की एक अहम बैठक हुई, लेकिन इस बार चर्चा सिर्फ संगठन या रणनीति तक सीमित नहीं रही। बैठक के बीच लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का एक बयान अचानक सुर्खियों में आ गया। राहुल गांधी ने एक बार फिर अपनी पुरानी बात दोहराते हुए कहा कि "मोदी जी एक साल में जाने वाले हैं।" यह बयान सामने आते ही राजनीतिक हलचल तेज हो गई। बीजेपी ने तुरंत जवाब दिया और कहा कि सरकार पूरी तरह स्थिर है और उसे कोई चुनौती नहीं दे सकता। लेकिन इस पूरे घटनाक्रम में सिर्फ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर टिप्पणी ही नहीं थी, बल्कि राहुल गांधी ने कांग्रेस की पुरानी राजनीति, दलित प्रतिनिधित्व और क्षेत्रीय दलों के उभार पर भी बड़ी बात कही।दिल्ली में हुई यह बैठक कांग्रेस के अनुसूचित जाति विभाग की रणनीतिक बैठक थी। इसे विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेंद्र पाल गौतम ने बुलाया था। बैठक में दक्षिण भारत के 15 राज्यों से करीब 380 जिला अध्यक्ष और प्रतिनिधि शामिल हुए। बाहर से देखने पर यह एक संगठनात्मक बैठक लग सकती थी, लेकिन अंदर की चर्चा आने वाले समय की कांग्रेस राजनीति की दिशा का संकेत भी मानी जा रही है।
राहुल गांधी ने क्यों कहा- अगर पहले ध्यान दिया होता, तो SP-BSP-RJD जैसे दल इतने मजबूत नहीं होते
बैठक में राहुल गांधी ने सिर्फ वर्तमान राजनीति की बात नहीं की, बल्कि कांग्रेस के अतीत की भी समीक्षा की। सूत्रों के मुताबिक उन्होंने कहा कि अगर 1980 और 1990 के दशक में कांग्रेस ने अनुसूचित जाति समुदाय पर ज्यादा मजबूती से ध्यान दिया होता, तो कई क्षेत्रीय दल इतनी राजनीतिक ताकत हासिल नहीं कर पाते। यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि उत्तर भारत की राजनीति में SP, BSP और RJD जैसे दल सामाजिक न्याय और पिछड़े-दलित वर्गों की राजनीति से उभरकर मजबूत हुए। खासकर बहुजन समाज पार्टी ने दलित राजनीति को अलग पहचान दी, जबकि समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय जनता दल ने सामाजिक समीकरणों के आधार पर अपना राजनीतिक विस्तार किया। राजनीतिक विश्लेषकों की नजर में राहुल गांधी का यह बयान सिर्फ अतीत की समीक्षा नहीं, बल्कि कांग्रेस की नई सामाजिक रणनीति का संकेत भी माना जा रहा है। ऐसा लगता है कि पार्टी अब फिर से दलित और सामाजिक न्याय की राजनीति पर अधिक फोकस करना चाहती है।
'मोदी एक्सपोज हो चुके हैं- आर्थिक मुद्दों पर भी साधा निशाना
बैठक के दौरान राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आर्थिक मुद्दों पर भी घेरा। उन्होंने कहा कि महंगाई, बेरोजगारी और अमेरिका के साथ ट्रेड से जुड़े मुद्दों पर सरकार सवालों के घेरे में है। राहुल गांधी ने दावा किया कि इन मुद्दों पर प्रधानमंत्री "एक्सपोज" हो चुके हैं और आने वाले समय में जनता इसका जवाब देगी। हालांकि बीजेपी ने राहुल गांधी के दावे को तुरंत खारिज किया, बीजेपी ने भी इस मुद्दे पर प्रेस कॉन्फ्रेंस की और कहा कि सरकार अंगद के पैर की तरह स्थिर है और 100 राहुल गांधी भी इसे हिला नहीं सकते !पार्टी नेताओं ने कहा कि केंद्र सरकार मजबूत स्थिति में है और विपक्ष के दावे राजनीतिक बयानबाजी से ज्यादा कुछ नहीं हैं। बीजेपी की ओर से यह भी कहा गया कि सरकार अपना कार्यकाल पूरा करेगी।
बैठक का असली एजेंडा क्या था?
राजनीतिक बयान सुर्खियां जरूर बन गए, लेकिन बैठक का मुख्य एजेंडा संगठन के भीतर दलित भागीदारी बढ़ाना था। चर्चा इस बात पर हुई कि जिन राज्यों में कांग्रेस की सरकारें हैं, वहां सत्ता और संगठन दोनों स्तर पर अनुसूचित जाति समुदाय की भागीदारी बढ़ाने पर ज्यादा जोर दिया जाए। बैठक में दलित समुदाय के बीच पार्टी की पहुंच मजबूत करने, जमीनी स्तर पर संगठन को सक्रिय बनाने और सामाजिक न्याय से जुड़े मुद्दों पर रणनीति तैयार करने पर चर्चा हुई। राजेंद्र पाल गौतम ने कहा कि दलित समाज को राजनीतिक और सामाजिक रूप से मजबूत बनाने और कांग्रेस की विचारधारा को नीचे तक पहुंचाने पर विस्तार से बात हुई।
बयान से आगे की राजनीति क्या है?
राहुल गांधी का "मोदी जी एक साल में जाने वाले हैं" वाला बयान राजनीतिक बहस का विषय जरूर बन गया है, लेकिन उसके पीछे एक दूसरा संदेश भी दिखाई देता है। कांग्रेस आने वाले समय में सामाजिक न्याय, दलित प्रतिनिधित्व और संगठन के विस्तार को लेकर अपनी रणनीति बदलती दिख रही है। इसलिए यह बैठक सिर्फ एक राजनीतिक बयान तक सीमित नहीं दिखती। इसके जरिए कांग्रेस शायद यह संदेश देना चाहती है कि आने वाले चुनावों में उसकी राजनीति सिर्फ सत्ता विरोध तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि वह सामाजिक आधार को नए तरीके से मजबूत करने की कोशिश भी करेगी।
