CBSE Class 12 के फिजिक्स पेपर को लेकर सोशल मीडिया पर इन दिनों एक बड़ा विवाद छाया हुआ है। दिल्ली के एक छात्र ने दावा किया कि री-चेकिंग के दौरान उसे जो फिजिक्स की उत्तर पुस्तिका भेजी गई, वह उसकी थी ही नहीं। मामला तब और ज्यादा वायरल हो गया जब छात्र को सोशल मीडिया पर “पाकिस्तानी” कहकर ट्रोल किया जाने लगा। बाद में जांच में सामने आया कि छात्र की शिकायत सही थी और तकनीकी गड़बड़ी की वजह से किसी दूसरे छात्र की आंसर शीट उसके रोल नंबर पर अपलोड हो गई थी। इस पूरे मामले ने CBSE की डिजिटल प्रक्रिया, सोशल मीडिया ट्रोलिंग और री-इवैल्यूएशन सिस्टम को लेकर बड़ी बहस छेड़ दी है।
कैसे सामने आई पूरी गड़बड़ी?
दिल्ली के छात्र वेदांत श्रीवास्तव ने 13 मई 2026 को CBSE का रिजल्ट आने के बाद फिजिक्स में कम अंक मिलने पर री-चेकिंग प्रक्रिया के तहत अपनी उत्तर पुस्तिका की स्कैन कॉपी के लिए आवेदन किया था। 23 मई को जब उसे कॉपी मिली, तो वह देखकर हैरान रह गया।
वेदांत का दावा था कि अपलोड की गई फिजिक्स आंसर शीट उसकी नहीं थी। उसने अपनी इंग्लिश और कंप्यूटर साइंस की उत्तर पुस्तिकाओं की हैंडराइटिंग को फिजिक्स की कॉपी से तुलना करते हुए सोशल मीडिया पर स्क्रीनशॉट साझा किए। तस्वीरों में साफ दिखाई दे रहा था कि लिखावट, जवाब देने का तरीका और प्रश्न हल करने की शैली पूरी तरह अलग थी। देखते ही देखते यह मामला इंटरनेट पर वायरल हो गया।
‘South Asia’ देखकर छात्र को बता दिया पाकिस्तानी
मामले ने नया मोड़ तब लिया जब कुछ सोशल मीडिया यूजर्स और एक टीवी एंकर ने वेदांत के प्रोफाइल को निशाना बनाना शुरू कर दिया। दरअसल वेदांत ने अपने सोशल मीडिया प्रोफाइल की लोकेशन में “South Asia” लिखा हुआ था।
कुछ लोगों ने बिना जानकारी के यह मान लिया कि इसका मतलब पाकिस्तान है। इसके बाद छात्र को “पाकिस्तानी”, “एंटी-नेशनल” और “CBSE को बदनाम करने वाला” कहकर ट्रोल किया जाने लगा। जबकि सच यह है कि भारत खुद दक्षिण एशिया का हिस्सा है। इंटरनेट पर इस ट्रोलिंग को लेकर भी लोगों ने नाराजगी जताई और कहा कि बिना तथ्य जाने किसी छात्र को निशाना बनाना गलत है।

CBSE ने मानी गलती, नियमों में भी किए बड़े बदलाव
मामला बढ़ने के बाद CBSE ने आधिकारिक तौर पर अपनी गलती स्वीकार की। बोर्ड के अधिकारियों ने बताया कि ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम में तकनीकी गड़बड़ी के कारण किसी दूसरे छात्र की आंसर शीट वेदांत के रोल नंबर पर अपलोड हो गई थी। इसके बाद बोर्ड ने छात्र को उसकी असली फिजिक्स कॉपी ईमेल के जरिए भेजी और रिजल्ट अपडेट करने की प्रक्रिया शुरू की।
इसी विवाद के बीच री-इवैल्यूएशन को लेकर कई फर्जी नोटिस भी सोशल मीडिया पर वायरल हुए, जिन्हें CBSE ने पूरी तरह गलत बताया। बोर्ड ने 2026 के लिए री-चेकिंग नियमों में भी बदलाव किए हैं। अब छात्र कम फीस में स्कैन कॉपी, मार्क्स वेरिफिकेशन और री-इवैल्यूएशन के लिए आवेदन कर सकते हैं। साथ ही यदि री-इवैल्यूएशन में अंक बढ़ते हैं, तो फीस वापस करने का नियम भी लागू किया गया है।
इंटरनेट का दौर बड़ा खतरनाक है…
एक तकनीकी गलती कुछ मिनटों में वायरल हो जाती है,
और लोग फैक्ट चेक करने से पहले इंसान को कुछ भी बोल देते हैं बिना ये सोचे के उस व्यक्ति के ऊपर इस का क्या असर पड़ेगा।
