एक समय था जब गोवा विदेशी पर्यटकों की पहली पसंद माना जाता था। रूस, ब्रिटेन और यूरोप से हर साल लाखों लोग यहां छुट्टियां मनाने आते थे। गोवा के बीच, पार्टी कल्चर और किफायती ट्रिप विदेशियों को खूब आकर्षित करती थी। लेकिन अब हालात तेजी से बदल रहे हैं। विदेशी पर्यटकों की संख्या लगातार घट रही है, जबकि श्रीलंका, वियतनाम और थाईलैंड जैसे देश उनसे आगे निकलते दिखाई दे रहे हैं।
विदेशी पर्यटकों की संख्या में लगातार गिरावट
आंकड़ों के अनुसार, साल 2017 में गोवा में करीब 9 लाख विदेशी पर्यटक पहुंचे थे, लेकिन 2025 तक यह संख्या घटकर लगभग 5 लाख रह गई। वहीं 2019 में गोवा में करीब 9.37 लाख विदेशी टूरिस्ट आए थे, लेकिन 2023 में यह आंकड़ा करीब 4 लाख तक पहुंच गया। विदेशी पर्यटकों की कमी का सबसे बड़ा असर होटल, बीच शैक, टैक्सी और छोटे कारोबारियों पर पड़ा है, क्योंकि विदेशी पर्यटक आमतौर पर ज्यादा दिन रुकते हैं और अधिक खर्च भी करते हैं।
कोविड और युद्धों ने बढ़ाई मुश्किलें
कोविड महामारी ने सबसे पहले गोवा के पर्यटन को बड़ा झटका दिया। कोरोना के दौरान इंटरनेशनल फ्लाइट्स बंद हो गईं और कई देशों में यात्रा पर पाबंदियां लग गईं। इसके बाद जैसे-तैसे पर्यटन संभलना शुरू हुआ, तभी रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू हो गया।
गोवा में हर साल बड़ी संख्या में रूसी और यूक्रेनी पर्यटक आते थे, लेकिन युद्ध के बाद वहां के लोगों की आर्थिक स्थिति खराब हुई और ट्रैवल काफी महंगा हो गया। कई चार्टर फ्लाइट्स खाली जाने लगीं और कुछ बंद तक करनी पड़ीं।
मिडिल ईस्ट तनाव और महंगी फ्लाइट्स का असर
पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव और युद्ध का असर भी गोवा के पर्यटन पर पड़ा। खाड़ी देशों के एयरस्पेस में परेशानी बढ़ने से फ्लाइट्स महंगी हो गईं। तेल की कीमतें बढ़ीं, जिससे एयर टिकट के दाम भी ऊपर चले गए। यूरोप और रूस के लोगों के लिए भारत आना पहले के मुकाबले काफी खर्चीला हो गया। ऐसे में कई विदेशी पर्यटक अब उन जगहों को चुन रहे हैं जहां कम पैसों में बेहतर सुविधाएं मिल रही हैं।
वीजा प्रक्रिया भी बनी बड़ी वजह
गोवा में विदेशी पर्यटकों की संख्या कम होने के पीछे सिर्फ युद्ध और महंगाई ही वजह नहीं है। दरअसल यह गिरावट कई साल पहले ही शुरू हो चुकी थी।
गोवा के पर्यटन मंत्री रोहन खौंटे ने भी माना कि हालात को समझने के लिए आशावादी और निराशावादी दोनों नजरियों से देखने की जरूरत है। 1960 और 1970 के दशक में “हिप्पी कल्चर” की वजह से गोवा विदेशी पर्यटकों की सबसे पसंदीदा जगहों में गिना जाता था, लेकिन अब धीरे-धीरे लोग दूसरी जगहों की ओर जा रहे हैं
विदेशी पर्यटकों का मानना है कि भारत का वीजा प्रोसेस अब पहले के मुकाबले लंबा और थोड़ा मुश्किल हो गया है। कई टूरिस्ट्स ने पांच साल के वीजा की बढ़ी हुई फीस को भी बड़ी वजह बताया।
गोवा पर्यटन विभाग की समिति के सदस्य और ट्रैवल चार्टर कंपनी चलाने वाले अर्नेस्ट डायस के मुताबिक, वियतनाम और श्रीलंका जैसे देशों में ऑन-अराइवल वीजा आसानी से मिल जाता है, इसलिए लोग वहां जल्दी ट्रिप प्लान कर लेते हैं। उनका कहना है कि आजकल लोग आखिरी समय में छुट्टियों का फैसला करते हैं, ऐसे में वीजा में देरी होने पर वे दूसरी जगहों का चुनाव कर लेते हैं।
महंगे होटल और बढ़ती भीड़ से घटा आकर्षण
डायस ने यह भी बताया कि गोवा में अच्छे होटलों के दाम काफी बढ़ गए हैं। घरेलू पर्यटकों की बढ़ती भीड़ और मीटिंग-कॉन्फ्रेंस जैसे बड़े आयोजनों की वजह से होटल इतने महंगे हो गए हैं कि कई विदेशी पर्यटकों के लिए यहां रुकना मुश्किल हो रहा है।
दूसरी तरफ श्रीलंका ने खुद को तेजी से बेहतर टूरिस्ट डेस्टिनेशन के रूप में तैयार किया है। वहां सस्ते होटल, आसान वीजा और साफ-सुथरे बीच विदेशी पर्यटकों को खूब आकर्षित कर रहे हैं। भारत से भी बड़ी संख्या में लोग अब श्रीलंका घूमने जा रहे हैं। साल 2025 में करीब 5 लाख से ज्यादा भारतीय पर्यटक श्रीलंका पहुंचे हैं। वहां का पर्यटन अब कोविड से पहले वाले स्तर को भी पार कर चुका है।
साफ-सफाई और भीड़भाड़ पर भी उठ रहे सवाल
गोवा में एक और बड़ी समस्या साफ-सफाई और भीड़भाड़ को लेकर सामने आई है। कई विदेशी पर्यटकों का कहना है कि पहले जैसा शांत और रिलैक्स माहौल अब गोवा में कम होता जा रहा है। कुछ लोगों ने सोशल मीडिया पर यह भी लिखा कि गोवा अब जरूरत से ज्यादा कमर्शियल हो चुका है।
वहीं श्रीलंका, थाईलैंड और वियतनाम जैसे देश बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और आसान ट्रैवल एक्सपीरियंस देकर पर्यटकों को अपनी तरफ खींच रहे हैं।
