पटना। बिहार में चुनावी माहौल के बीच जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर बुधवार देर रात अचानक पटना के एक थाने पहुंच गए। उनके साथ पार्टी के कई नेता और समर्थक भी मौजूद थे। देर रात थाने पहुंचने की वजह और वहां दिए गए उनके बयान ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चा शुरू कर दी है।

प्रशांत किशोर का आरोप है कि चुनाव से ठीक पहले उनकी पार्टी के कई कार्यकर्ताओं और समर्थकों को पुलिस ने हिरासत में लिया। उनका कहना है कि जिन लोगों को पकड़ा गया, वे चुनाव प्रचार में लगे हुए थे। इसी मामले की जानकारी लेने और अपने समर्थकों से मिलने के लिए वह देर रात थाने पहुंचे।

थाने के बाहर मीडिया से बात करते हुए प्रशांत किशोर ने कहा कि अगर जन सुराज चुनाव हारती है तो इसका कारण जनता का फैसला नहीं, बल्कि चुनाव प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियां होंगी। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन पर दबाव बनाकर उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं को परेशान किया जा रहा है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

प्रशांत किशोर ने कहा कि उनकी पार्टी लोकतांत्रिक तरीके से चुनाव लड़ रही है और किसी भी तरह के दबाव से पीछे हटने वाली नहीं है। उन्होंने अपने समर्थकों से शांत रहने और कानून का पालन करने की अपील भी की। उनका कहना था कि चुनाव निष्पक्ष होना चाहिए और सभी दलों को बराबर अवसर मिलना चाहिए।

वहीं, पटना पुलिस ने इन आरोपों को खारिज किया है। पुलिस का कहना है कि कार्रवाई कानून के अनुसार की गई है और किसी राजनीतिक दल को निशाना बनाने का सवाल ही नहीं उठता। पुलिस के मुताबिक, जिन लोगों के खिलाफ कार्रवाई हुई है, वह उपलब्ध जानकारी और शिकायतों के आधार पर की गई है।

इस घटनाक्रम के बाद बिहार की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। जन सुराज इस मुद्दे को चुनावी पारदर्शिता से जोड़कर देख रही है, जबकि दूसरी ओर प्रशासन का कहना है कि कानून व्यवस्था बनाए रखना उसकी जिम्मेदारी है और उसी के तहत कार्रवाई की जा रही है।

बिहार में चुनाव के बीच इस मामले ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि चुनाव आयोग और प्रशासन आगे क्या कदम उठाते हैं। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि प्रशांत किशोर के आरोपों पर आगे क्या प्रतिक्रिया सामने आती है।

फिलहाल जन सुराज और पुलिस दोनों अपने-अपने दावों पर कायम हैं। ऐसे में मामले की पूरी तस्वीर जांच और आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद ही साफ हो

सकेगी।