
बिहार को 400 इलेक्ट्रिक बसों की सौगात।
बिहार में सार्वजनिक परिवहन की तस्वीर जल्द बदलने वाली है। प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना के तहत राज्य को 400 अत्याधुनिक एसी इलेक्ट्रिक बसों की सौगात मिलने जा रही है, जिनमें महिलाओं के लिए 50 विशेष 'पिंक बसें' भी शामिल होंगी। पटना समेत छह प्रमुख शहरों में चलने वाली ये बसें न सिर्फ यात्रियों को सुरक्षित, आरामदायक और आधुनिक सफर का अनुभव देंगी, बल्कि प्रदूषण कम करने और हरित परिवहन को बढ़ावा देने में भी अहम भूमिका निभाएंगी। इस महत्वाकांक्षी योजना को जमीन पर उतारने की दिशा में बुधवार को बिहार राज्य पथ परिवहन निगम, परिवहन विभाग और GreenCell Mobility के बीच महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर होने जा रहे हैं।
छह प्रमुख शहरों में चलेगी आधुनिक ई-बस सेवा
योजना के तहत बिहार को कुल 400 इलेक्ट्रिक बसें मिलेंगी, जिनमें 9 मीटर लंबाई की 200 बसें और 12 मीटर लंबाई की 200 बसें शामिल हैं। इन बसों का संचालन राज्य के छह प्रमुख शहरों पटना, गया, भागलपुर, मुजफ्फरपुर, दरभंगा और पूर्णिया में किया जाएगा। सबसे अधिक 150 बसें पटना को मिलेंगी, जबकि बाकी पांच शहरों में 50-50 बसों का परिचालन होगा। अधिकारियों के अनुसार पहले चरण में जुलाई 2026 से 9 मीटर की 200 बसें राज्य को मिल जाएंगी, जिससे शहरी परिवहन व्यवस्था को नई रफ्तार मिलेगी।
महिलाओं के लिए चलेंगी 50 विशेष ‘पिंक बसें’
परियोजना की एक खास पहल महिलाओं की सुरक्षित यात्रा को ध्यान में रखते हुए शुरू की जा रही है। पहले चरण में मिलने वाली 200 बसों में से 50 इलेक्ट्रिक एसी बसों को ‘पिंक बस’ के रूप में संचालित किया जाएगा। इन बसों का उद्देश्य महिलाओं को सुरक्षित, सम्मानजनक और सुविधाजनक सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध कराना है। शेष 150 बसें विभिन्न रूटों पर आम यात्रियों के लिए चलाई जाएंगी। बसों में आधुनिक सुविधाएं, आरामदायक सीटें और बेहतर सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध रहने की संभावना है।
प्रदूषण घटेगा, यात्रियों को मिलेगा आरामदायक सफर
परिवहन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि 400 इलेक्ट्रिक बसों के संचालन से बिहार के बड़े शहरों में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था मजबूत होगी। इलेक्ट्रिक बसें डीजल बसों की तुलना में कम प्रदूषण फैलाती हैं, जिससे वायु गुणवत्ता सुधारने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही यात्रियों को सुरक्षित, आरामदायक और आधुनिक यात्रा का अनुभव मिलेगा। परिवहन मंत्री दामोदर रावत, परिवहन सचिव राज कुमार, राज्य परिवहन आयुक्त आरिफ अहसन और BSRTC के प्रशासक अतुल कुमार वर्मा की मौजूदगी में होने वाला यह समझौता बिहार में हरित परिवहन (Green Mobility) की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
