धरती एक बार फिर कांपी और कुछ ही सेकंड में हजारों लोगों की सांसें थम गईं। फिलीपींस के दक्षिणी हिस्से में आए 6.5 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप ने लोगों को घरों और इमारतों से बाहर निकलने पर मजबूर कर दिया। राहत की बात यह रही कि शुरुआती रिपोर्टों में किसी बड़े जान-माल के नुकसान की पुष्टि नहीं हुई, लेकिन महज कुछ दिन पहले इसी इलाके में आए भीषण भूकंप में 80 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी थी। ऐसे में नए झटकों ने पूरे क्षेत्र में फिर से डर और अनिश्चितता का माहौल पैदा कर दिया है।भूकंप की दस्तक: शहर पर मंडराता खतरा और भूकंपीय गतिविधि की वैज्ञानिक निगरानी | फोटो: आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस

भूकंप की दस्तक: शहर पर मंडराता खतरा और भूकंपीय गतिविधि की वैज्ञानिक निगरानी | फोटो: आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस

समुद्र के भीतर आया तेज भूकंप, लोगों में मची अफरा-तफरी

यूनाइटेड स्टेट्स जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) के अनुसार भूकंप की तीव्रता 6.5 मापी गई। इसका केंद्र फिलीपींस के मिंडानाओ द्वीप पर स्थित जोस अबाड सैंटोस शहर से करीब 35 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में समुद्र के भीतर था। भूकंप लगभग 52.4 किलोमीटर की गहराई पर आया। शुरुआत में इसकी तीव्रता 6.7 बताई गई थी, जिसे बाद में संशोधित कर 6.5 कर दिया गया। समुद्र के भीतर भूकंप आने के कारण सुनामी की आशंका पर भी नजर रखी गई, लेकिन फिलहाल किसी तरह की सुनामी चेतावनी जारी नहीं की गई है। स्थानीय अधिकारियों के अनुसार झटके काफी तेज महसूस किए गए। कई इलाकों में घरों के फर्नीचर, लाइटें और अन्य सामान हिलने लगे, जिससे लोग घबराकर खुले स्थानों की ओर भागे। हालांकि राहत की बात यह है कि अब तक किसी बड़ी इमारत के गिरने, जनहानि या व्यापक नुकसान की सूचना सामने नहीं आई है।

कुछ दिन पहले इसी इलाके में तबाही मचा चुका है भूकंप

यह वही इलाका है जहां 8 जून को 7.8 तीव्रता का बेहद विनाशकारी भूकंप आया था। उस आपदा में 80 से अधिक लोगों की जान चली गई थी, जबकि 1,400 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक करीब 3.46 लाख लोग इस आपदा से प्रभावित हुए और 45 हजार से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना पड़ा। उस भूकंप ने हजारों मकानों को क्षतिग्रस्त कर दिया था। कई गांवों का संपर्क टूट गया था और पहाड़ी क्षेत्रों में दर्जनों भूस्खलन हुए थे। सड़कें ध्वस्त हो गई थीं और कई इलाकों में राहत एवं बचाव दलों को पहुंचने में घंटों का समय लगा था। ऐसे में नया भूकंप लोगों के पुराने जख्म फिर से ताजा कर गया है।भूकंप का खतरा | फोटो: आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस

भूकंप का खतरा | फोटो: आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस

क्यों बार-बार कांप रही है फिलीपींस की धरती?

भूवैज्ञानिकों के अनुसार फिलीपींस दुनिया के सबसे सक्रिय भूकंपीय क्षेत्रों में से एक है। यह प्रशांत महासागर के 'रिंग ऑफ फायर' क्षेत्र में स्थित है, जहां कई टेक्टोनिक प्लेटें आपस में टकराती रहती हैं। इसी वजह से यहां अक्सर तेज भूकंप, ज्वालामुखी विस्फोट और समुद्री हलचल देखने को मिलती है। विशेषज्ञों का कहना है कि बड़े भूकंप के बाद आफ्टरशॉक यानी बाद के झटके कई दिनों या कई सप्ताह तक आते रह सकते हैं। इसलिए प्रभावित इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने, कमजोर इमारतों से दूर रहने और प्रशासन की सलाह का पालन करने की अपील की गई है।

बचाव एजेंसियां अलर्ट, दुनिया की नजर फिलीपींस पर

स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन एजेंसियां हालात पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ा दी गई है और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए राहत दलों को तैयार रखा गया है। फिलहाल सबसे बड़ी राहत यही है कि इस भूकंप के बाद किसी बड़े नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है। इधर, दुनिया के दूसरे हिस्सों में भी भूकंपीय गतिविधियां चिंता बढ़ा रही हैं। हाल ही में वेनेजुएला में आए भीषण भूकंप में मृतकों की संख्या 235 तक पहुंच गई। लगातार अलग-अलग देशों में आ रहे शक्तिशाली भूकंप इस बात का संकेत हैं कि प्राकृतिक आपदाओं के प्रति सतर्कता और मजबूत आपदा प्रबंधन व्यवस्था पहले से कहीं अधिक जरूरी हो गई है।