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देश के कई हिस्सों में प्री-मानसून बारिश से लोगों को गर्मी से राहत जरूर मिली है, लेकिन दुनिया भर केई राज्य में मॉनसून की रफ्तार इस बार काफी धीमी हुई है। मौसम विभाग का कहना है कि अल-नीनो के कारण मॉनसून की रफतार काफी धीमी हो गई है, जिस वजह से राज्यों में औसत से काफी कम बारिश दर्ज की गई है। इसका असर कृषि, किसानों पर भी पड़ने काअनुमान जताया जा रहा है। इसी बीच कृषि मंत्रालय ने संभावित सूखे जैसी स्थिति से निपटने के लिए 111 संवेदनशील जिलों की पहचान कर राज्यों को सतर्क रहने और आवश्यक तैयारियां शुरू करने के निर्देश दिए हैं। वहीं, दिल्ली-एनसीआर में मॉनसून की एंट्री के लिए लोगों को अभी कुछ दिन और इंतजार करना पड़ सकता है। मौसम विभाग के मुताबिक, राजधानी में 4 से 5 जुलाई के आसपास मॉनसून दस्तक दे सकता है।
IMD के मुताबिक इन राज्यों में जल्द ही देगी दस्तक
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, अगले दो दिनों के दौरान दक्षिण-पश्चिम मॉनसून गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार के शेष हिस्सों तथा उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के कुछ इलाकों तक पहुंच सकता है। इसके बाद अगले 2-3 दिनों में इसके हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, दक्षिण-पूर्व राजस्थान और गुजरात के बाकी क्षेत्रों में भी आगे बढ़ने की संभावना है। हालांकि दिल्ली और आसपास के इलाकों में मॉनसून के पहुंचने में अभी कुछ दिन और लग सकते हैं।
दिल्ली में मौनसून कब देगी दस्तक?
दिल्ली में मॉनसून की सामान्य आगमन तिथि 27 जून मानी जाती है, लेकिन इस वर्ष इसकी दस्तक करीब एक सप्ताह देरी से होने की संभावना है। मौसम विभाग के वरिष्ठ वैज्ञानिकों के मुताबिक, एक नया मौसमीय सर्कुलेशन विकसित हो रहा है, जिससे 4-5 जुलाई के आसपास मॉनसून की रफ्तार दोबारा तेज हो सकती है। यदि ऐसा होता है तो दिल्ली समेत उत्तर-पश्चिम भारत के कई इलाकों में मॉनसून सक्रिय हो जाएगा।
मॉनसून में 42% से कम बारिश, कृषि मंत्रालय अलर्ट
देशभर में औसतन 1 जून से 29 जून के बीच 157.7 मिमी बारिश होनी थी, लेकिन इस समय केवल 92.2 मिमी वर्षा ही दर्ज की गई, जो सामान्य से करीब 42 ℅ से कम है। सबसे अधिक 54 प्रतिशत बारिश की कमी केंद्रीय भारत में रेकॉर्ड हुई, वहीं पूर्वी और उत्तर-पूर्वी भारत में 41 % , उत्तर-पश्चिम भारत में 30 % और दक्षिणी प्रायद्वीपीय क्षेत्र में 28 % कम बारिश रिकॉर्ड की गई।
धीमी मॉनसून के संभावित असर को देखते हुए कृषि मंत्रालय और ICAR ने 315 जिलों का वैज्ञानिक मूल्यांकन किया है। इनमें से 111 जिलों को सबसे ज्यादा असर पड़ने वाला माना गया है। केंद्रीय कृषि मंत्री ने राज्यों को जल संरक्षण, पुराने जलाशयों की मरम्मत, नई जल संरचनाओं के निर्माण और जरूरत पड़ने पर ग्रामीण रोजगार योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश दिए हैं, ताकि कम बारिश की स्थिति में किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों पर पड़ने वाले असर को कम किया जा सके।
